अगर आप मां बनने वाली हैं तो आपने अपना काफी काम पहले ही बढ़ा लिया है। नौकरी के साथ शिशु को जन्म देने का काम भी आपके जिम्मे है यानी ओवरआइम जॉब! आपका वर्कलोड दुगना हो गया है। आपको ग्राहकों व डॉक्टरों से मीटिंग, बॉथरूम व मॉल रूम के ट्रिप,बिजनेस लंच व मॉर्निंग सिकनेस, सहेली से लेकर बॉस को बताने की उत्सुकता, स्वस्थ व प्रेरणा से भरपूर रहने की कोशिश, शिशु के आने व मेटरनिटी लीव लेने की तैयारी जैसी चुनौतियों से जूझना होगा। यहां हम आपकी मदद के लिए कुछ टिप्स दे रहे हैं‒

बॉस से कब कहें :- आप भी सोच रही होंगी कि यह खबर बॉस को कब सुनानी चाहिए? हालांकि इसका कोई खास नियम नहीं है पर आपको थोड़ी जल्दी करनी होगी, कहीं आपके पेट का उभार ही सब कुछ न कह दे। यह सब इस बात पर निर्भर करता है कि आपके काम करने का माहौल कितना दोस्ताना या औपचारिक है या शारीरिक अथवा भावनात्मक रूप से इसे कैसे लेती हैं।

आप कैसा महसूस कर रही हैं :- अगर मॉर्निंग सिकनेस की वजह से आपका काफी समय सिंक पर बीत रहा है, अगर आप पर पहली तिमाही की थकान इतनी बुरी तरह से हावी है कि आप बिस्तर से सिर भी नहीं उठा पा रहीं है, तो यह राज ज्यादा समय तक नहीं टिकेगा। बेहतर होगा कि आप स्वयं ही सबको और बॉस को इस बारे में बता दें। अगर आप बिल्कुल ठीक महसूस कर रही हैं तो अपनी मर्जी से इस खबर को कुछ समय तक छिपा सकती हैं।

आप कैसा काम करती हैं :- अगर आप ऐसे हालात में काम करती हैं, जो आपके व शिशु के लिए हानिकारक हो सकते हैं तो आपको तबादले या काम बदलने के लिए यह खबर देनी ही होगी।

काम कैसा चल रहा है :-  जब भी कोई गर्भवती महिला यह सूचना ऑफिस में देती है तो सामने वाले के मन में यही सवाल पैदा होता है कि ‘‘क्या वह गर्भावस्था के दौरान काम कर पाएंगी?”कहीं उसका मन काम की बजाए अजन्मे बच्चे में तो नहीं रमा रहेगा? कहीं वह हमारे काम को अधूरा तो नहीं छोड़ देगी? आप यह खबर तभी दें जब कोई रिपोर्ट पूरी करें, कोई डील करें, कोई नया आइडिया दें या यह साबित कर दें कि आप गर्भवती होने के बावजूद काम में कोई कोताही नहीं बरतने वाली हैं।

गप्पों की फैक्ट्री :- जी हां। अगर आप गप्पों की फैक्टरी में काम करती हैं तो थोड़ा संभल जाएं। क्या आप चाहेंगी कि आपके बताने से पहले ही कोई इस खबर को बॉस तक पहुंचा दे। आपको सिर्फ भरोसेमंद साथियों को ही यह बात बतानी चाहिए ताकि वे आपकी मर्जी के बना दूसरों के आगे मुंह न खोलें।

नियोजक का रवैया :- आपको इस बारे में अपने नियोजक का रवैया जानना होगा। उन महिलाओं से पूछें जो हाल ही में मां बनी हों लेकिन यह बातचीत गुपचुप तरीके से होनी चाहिए। पता करें कि ऑफिस में मेटरनिटी लीव के लिए क्या नीति अपनाई जाती है। आप एच.आर के किसी व्यक्ति से भी मीटिंग कर सकती हैं वे आपको इस बारे में बेहतर जानकारी दे पाएंगे। यदि कंपनी गर्भवती मांओं की सुविधा का पूरा ध्यान रखती है, फिर तो आपको जल्द से जल्द यह खबर देनी होगी।यदि नहीं तो आप बेहतर जानती हैं कि क्या करना होगा।

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योजना बनाएं :- हर काम पूरी तरह योजनाबद्ध होना चाहिए। आपकी कार्यकुशलता की तारीफ भी होगी। जब भी यह खबर सुनाएं तो योजना भी बना लें कि आप अंदाजन कितने समय तक ऑफिस आ पाएंगी, कितने दिन की छुट्टी लेंगी, जाने से पहले काम कैसे खत्म करेंगी या अपना काम दूसरों को कैसे सौंपेंगी? यदि आप बाद में पार्ट-टाइम आना चाहें तो उसे भी अभी बता दें। यदि यह योजना लिखित होगी तो आप कुछ भूलेंगी नहीं और अतिरिक्त कार्य कुशलता के अंक भी पाएंगी।

खबर सुनाना :- अगर एक बार आप खबर सुनाने के बारे में फैसला ले लेती हैं तो फिर आपको यह तय करना चाहिए कि यह सही तरीके से पहुंचे।

अपने-आपको तैयार करें :- अपनी खबर सुनाने से पहले थोड़ी छानबीन कर लें, अपने ऑफिस की मेटरनिटी लीव पॉलिसी की जानकारी लें। कई जगह वेतन सहित छुट्टी मिलती है तो कई जगह वेतन नहीं दिया जाता। कई जगह आपको अपनी सिकलीव को इन छुट्टियों में शामिल करने की इजाजत दी जाती है।

अपने अधिकार जानें :- आपको पता होना चाहिए कि गर्भवती होने के नाते आपको कौन से अधिकार प्राप्त हैं। जानकारी होने पर ही आप उन सुविधाओं का लाभ ले पाएंगी।

समय निकालें :- सीढ़ी, लिफ्ट या मीटिंग में आते-जाते यह खबर न सुनाएं। अपने बॉस से मिलने का समय लें ताकि वे भगदड़ मचाए बिना आपकी बात सुन सकें। ऐसा समय चुनें-जब ऑफिस में काम का ज्यादा तनाव न हो। अगर अचानक माहौल गर्म हो जाए तो अपनी मीटिंग टाल दें।

सकारात्मक रहें :- अपनी खबर को माफी और बहानों से शुरू न करें। बड़े आत्मविश्वास से बताएं कि आप गर्भवती होने से प्रसन्न हैं और बखूबी घर व दफ्तर के कामों को संभाल पाएंगी।

लोच बनाए रखें :- अपनी योजना बना कर,उसमें फेर बदल की थोड़ी गुंजाइश रखें ताकि उन्हें लगे कि आप अपनी जिद पर नहीं अड़ी हैं लेकिन बिल्कुल ही हथियार न डालें एक व्यावहारिक बॉटम लाइन तय कर लें व उसी के हिसाब से चलें।

लिखित रूप हो :- अपने प्रेगनेंसी प्रोटोकॉल व मेटरनिटी लीव की योजना बना लेने के बाद उसे लिखित रूप दें ताकि किसी भी गलतफहमी की गुंजाइश न रहे (मैंने ऐसा तो नहीं कहा था…..)

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