थकान, उबकाई, पीठ व सिर दर्द, सूजे हुए टखने और बार-बार मूत्र की इच्छा। इन सबके बीच कोई गर्भवती महिला, नौकरी के घंटों में आरामदेह कैसे महसूस कर सकती है। अगर उसे सूजे हुए पांव ले कर बार-बार झुकना पड़े या सामान उठाना पड़े तो गर्भावस्था के आराम पाने के लिए हमारे टिप्स पढ़ें :-
- आरामदेह कपड़े पहनें। तंग या कसे हुए वस्त्र न पहनें, जिनसे रक्त प्रवाह में बाधा आए। ऊंची हील भी तंग कर सकती है। स्पोर्टिंग होज़ पहनेंगी तो वैरीकोज़वेन्स से बच सकती हैं क्योंकि हो सकता है कि आपको कई घण्टे खड़ा रहना पड़ता हो।
- अपने भीतर का मौसम जानें। शहर का तापमान जो भी हो। गर्भावस्था में आपके शरीर का तापमान बदलता रहता है। एक मिनट में पसीना छूटता है तो दूसरे मिनट में कंपकंपी होने लगती है। आपको अपने कपड़े इसी हिसाब से पहनने हैं कि गर्म व सर्द दोनों तापमान का मुकाबला हो सके। यदि संभव हो तो अपने ड्राअर में स्कार्फ व स्वेटर रखें। जब अचानक ठंड लगने लगे तो आपको झट से गरमाहट मिल जाए। इन दिनों आपके शरीर का तापमान तेजी से घट-बढ़ सकता है।
- अपने पांव पर भार देकर न खड़ी हों। यदि काम के घंटों में लगातार खड़ा होना पड़ता हो तो बीच-बीच में बैठे या हल्की चहलकदमी करें। एक पांव छोटे स्टूल पर रखें व घुटना मोड़ लें। इस तरह थोड़ा भार घटेगा। बार-बार पांव बदलती रहें व उन्हें हिलाएं-डुलाएं।
- कोई भी बॉक्स या ऊंची चीज़ दिखाई दे तो थोड़ी देर के लिए पांव ऊंचे कर लें।
- बीच-बीच में ब्रेक लें। बैठी हैं तो उठकर एक चक्कर लगा लें। खड़ी हैं तो पांव ऊंचे करके बैठ जाएं। यदि केबिन में सोफा हो तो मौका मिलते ही पीठ के बल लेट जाएं। शरीर में खिंचाव देने वाले कुछ व्यायाम करें ताकि पीठ, टांगों व गर्दन को आराम मिल सके। तकरीबन हर घंटे बाद अपने दोनों बाजू टिका कर पीठ अकड़ाएं। यदि बैठे -बैठे झुक सकें तो अपने हाथों को पैरों तक ले जाकर गर्दन व कंधों का तनाव दूर करें।
- अपनी कुर्सी ठीक करें। यदि पीठ को आराम देना चाहती हैं तो कुशन लगाएं।अपनी सीट के नीचे एक हल्का सा तकिया रखें। अगर कुर्सी खिसक सकती है तो मेज व कुर्सी के बीच थोड़ी जगहबना लें ताकि आपके पेट को पूरी जगह मिल सके।
- वजन के कांटे पर रखें नजर! कहीं ऐसा न हो कि ऑफिस के तनाव की वजह से आप अंधाधुंध खाने लगें और फालतू वजन बढ़ा लें। अगर आपका ऑफिस किसी वेंडिंग मशीन या जंकफूड रेस्त्रां के पास है, तब तो और भी ध्यान रखना होगा।

- हर गर्भवती मां के लिए सबसे जरूरी काम है, अपने शिशु का पेट भरना।अपने व्यस्त शैड्यूल के बीच भी खाने का समय निकालना न भूलें। आपकी मेज पर भी पौष्टिक स्नैक्स होने चाहिए। अगर पर्स बड़ा है तो उसमें भी कुछ रखें। आपके लिए व शिशु के लिए सही समय पर कुछ न कुछ खाना जरूरी है।
- वाटर कूलर के आसपास रहें। जी नहीं,गप्पें मारने के लिए नहीं, पानी भरने के लिए। आपको दिन में पर्याप्त मात्रा में पानी पीना है ताकि शरीर में सूजन न आए और मूत्राशय संक्रमण भी न हो। इसके अलावा और भी कई तरह की तकलीफों से छुटकारा मिलेगा।
- हर दो घंटे बाद मूत्र के लिए शौचालय जाएं। इस तरह आप संक्रमण से बची रहेंगी चाहे जरूरत हो या न हो, टॉयलेट जरूर जाएं चूंकि अब आपके हड़बड़ाहट में भागने के दिन नहीं रहे इसलिए हर थोड़ी देर बाद मूत्र के लिए जाएं।
- अपने पास दांतों का ब्रश रखें। उलटियों से परेशान हैं तो बीच-बीच में ब्रश करने से दांतों की सफाई होगी और सांस भी तरोताजा रहेगी। माऊथवाश भी काम आ सकता है। अगर बहुत ज्यादा लार बन रही हो तो इससे फर्क पड़ेगा (पहली तिमाही में अक्सर ऐसा होता है, जो कि ऑफिस में काफी बुरा लग सकता है)।
- सामान आराम से उठाएं ताकि पीठ पर किसी तरह का दबाव न पड़े।
- धुंए से भरे स्थानों से दूर रहें। धुंआ आपके व शिशु के लिए हानिकारक है इससे थकान भी हो सकती है।
- जरूरत से ज्यादा तनाव न पालें। कूल रहें। आईपॉड से संगीत सुनें। आंखें बंद करके ध्यान लगाएं। इमारत के आसपास चक्कर लगाएं।
- अपने शरीर की सुनना सीखें। अगर थकान हो रही है तो जल्दी छुट्टी लेकर घर जाने में कोई हर्ज नहीं है।
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