बारिश के मौसम में बढ़ जाता है हेपेटाइटिस का खतरा, लापरवाही पड़ सकती है भारी: Hepatitis in Monsoon
Hepatitis in Monsoon

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। हेपेटाइटिस से हर साल दुनियाभर के लाखों बच्चे और बड़े प्रभावित होते हैं। यह पांच प्रकार का होता है, जो हेपेटाइटिस ए, बी, सी, डी और ई वायरस इसके कारण फैलता है। बच्चों में आमतौर पर हेपेटाइटिस ए और बी होता है।

Hepatitis in Monsoon: बारिश का मौसम शुरू हो गया है। लेकिन यह सुहाना मौसम अपने साथ बीमारियों का पिटारा भी लेकर आता है। इन्हीं बीमारियों में से एक है हेपेटाइटिस। लिवर को डैमेज करने वाला यह रोग बच्चों के साथ ही बड़ों के लिए भी खतरनाक हो सकता है। हेपेटाइटिस से हर साल दुनियाभर के लाखों बच्चे और बड़े प्रभावित होते हैं। यह पांच प्रकार का होता है, जो हेपेटाइटिस ए, बी, सी, डी और ई वायरस इसके कारण फैलता है। बच्चों में आमतौर पर हेपेटाइटिस ए और बी होता है। वहीं बारिश के दिनों में इसके होने की आशंका कई गुणा बढ़ जाती है। कैसे करें इस गंभीर रोग से खुद का बचाव और क्या हैं इसके लक्षण यह जानना सभी के लिए जरूरी है।

Hepatitis in Monsoon
Hepatitis disease spreads due to many reasons.

हेपेटाइटिस रोग कई कारणों से फैलता है। बच्चों में ज्यादा हेपेटाइटिस ए और बी फैलता है। हेपेटाइटिस ए संक्रमण का कारण है साफ सफाई की कमी। इसके कारण यह वायरस बच्चों के लिवर को डैमेज करता है। लिवर ज्यादा क्षतिग्रस्त होने से मृत्यु तक हो सकती है। वहीं बारिश के दिनों में दूषित खाने और पानी दोनों की समस्याएं बढ़ जाती हैं, ऐसे में इस मौसम में सभी को अपनी सेहत का दोगुना ध्यान रखना चाहिए। इसी के साथ हाथ हमेशा साफ रखें, नाखून काटें, स्वच्छ और साफ पानी पिएं, ताजा खाना खाएं, बाहर का खाना कम खाएं। इनसे आप हेपेटाइटिस ए से बचाव कर सकते हैं।

दूसरी ओर हेपेटाइटिस बी ब्लड के माध्यम से बच्चों में फैलता है। यह शातिर वायरस बच्चों के शरीर में क्रोनिक करियर स्टेट के रूप में सालों तक घर बनाए रखता है और लिवर को डैमेज करता है। कई बार तो इसका पता 20 से 25 साल के बाद चल पाता है। अधिकांश मामलों में यह संक्रमित मां के कारण बच्चों में फैलता है। अध्ययन बताते हैं कि 10 में से 9 मामलों में संक्रमित मां के कारण बच्चे हेपेटाइटिस का शिकार हो जाते हैं। इसलिए गर्भवती मां को हेपेटाइटिस की जांच जरूर करवानी चाहिए। इसी के साथ यह असुरक्षित यौन संबंध बनाने, बिना स्टरलाइज किए गए इंजेक्शन के उपयोग, संक्रमित ब्लड चढ़ाने आदि के कारण होता है।  

हेपेटाइटिस के लक्षण समय पर पहचानना जरूरी है। हेपेटाइटिस ए से पीड़ित बच्चों में पीलिया, तेज बुखार आना, मतली आना, उल्टी आना जैसे लक्षण नजर आते हैं। अगर गर्भावस्था के दौरान मां को हेपेटाइटिस बी था तो शिशु को टीकाकरण जरूर करवाना चाहिए।  

हेपेटाइटिस ए से बचाव के लिए सबसे जरूरी है कि आप साफ सफाई का पूरा ध्यान रखें और स्वच्छ पानी व पौष्टिक भोजन करें। हेपेटाइटिस ए से बच्चों का बचाव करने के लिए उनका वैक्सीनेशन जरूर करवाएं। यह वैक्सीन जिंदगीभर आपके बच्चे की हेपेटाइटिस से सुरक्षा करेगा। अगर अपने बच्चे को बचपन में हेपेटाइटिस का टीका नहीं लगवाया है तो आप बाद में भी इसे लगवा सकते हैं। हालांकि इससे पहले हेपेटाइटिस एंटीबॉडी टेस्ट करवाना जरूरी है। वहीं हेपेटाइटिस बी से बचाव के लिए गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के शुरुआती तीन माह में हेपेटाइटिस बी सरफेस एंटीजन टेस्ट करवाना चाहिए। रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर वैक्सीनेशन की जरूरत नहीं होती है। बच्चों को भी हेपेटाइटिस बी वैक्सीन जरूर लगवाना चाहिए। यह वैक्सीन बच्चे के जन्म के 24 घंटे के अंदर ही लगाई जाती है। इसके एक माह बाद दूसरी डोज व छह माह बाद तीसरी डोज लगाई जाती है। अगर बच्चा  हेपेटाइटिस बी संक्रमित है तो उसे हेपेटाइटिस वैक्सीन के साथ इम्यूनोग्लोबुलिन वैक्सीन भी लगाई जाती है। 

मैं अंकिता शर्मा। मुझे मीडिया के तीनों माध्यम प्रिंट, डिजिटल और टीवी का करीब 18 साल का लंबा अनुभव है। मैंने राजस्थान के प्रतिष्ठित पत्रकारिता संस्थानों के साथ काम किया है। इसी के साथ मैं कई प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबों की एडिटर भी...