meditate during monsoon
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Monsoon Meditation: अवसाद और सुस्ती से निपटने के लिए इस मौसम में ध्यान करना मन-मस्तिष्क के लिए बहुत फायदेमंद हो सकता है।

अपने परिवार को भी जोड़ें- बच्चों के साथ बारिश मेडिटेशन करें, इससे उनके मन में भी कृतज्ञता और प्रकृति प्रेम जगेगा। आप शांत होंगी तो घर भी शांत रहेगा।

बारिश की बूंदें केवल धरती को ही नहीं, हमारे अंतर मन को भी धोती हैं। यह ऋतु हमें ठहरकर,
महसूस करके और भीतर झांकने का अवसर देती है। यही समय है जब आप होलिस्टिक
वेलनेस फिलॉसफी को अपनाकर ‘हम फिट तो इंडिया फिट’ के भाव से आगे बढ़ सकते
हैं। बस सांस लें, विश्वास करें, विश्वास के साथ ग्रहण करें कि आप ठीक हो जाएंगे।

बारिश के मौसम में प्रकृति खुद ध्यान करती हुई प्रतीत होती है- धीमे-धीमे चलती हवाएं, रिमझिम फूहारें, मिट्टी की सोंधी खुशबू- ये सभी हमारे विचारों को भी शांत करने का आमंत्रण देती हैं। खासकर गृहिणियों के लिए, जिनका दिन भर का समय परिवार की देखभाल और घर के कामों में निकल जाता है, यह मेडिटेशन आत्मिक ऊर्जा और संतुलन देने वाला हो सकता है। मेडिटेशन केवल आंखें बंद करके बैठ जाना नहीं, बल्कि भीतर के परमात्मा से जुड़ने की एक साधना है।

Monsoon Meditation-Silent Rain Meditation (5 min) - 'Listen and Connect'
Silent Rain Meditation (5 min) – ‘Listen and Connect’

समय: सुबह या शाम
स्थान: बालकनी या खिड़की के पास जहां
बारिश की आवाज साफ सुनाई दे।
विधि:
1. आराम से बैठ जाइए, पीठ सीधी रखें।
2. आंखें बंद करें।
3. तीन गहरी सांसें लें- नाक से सांस भरें, मुंह से छोड़ें।

4. अब केवल बारिश की ध्वनि को सुनें। न कोई विचार, न कोई चिंता।
5. महसूस कीजिए कि हर बूंद आपके मन की चिंता को धो रही है।

‘मैं प्रकृति से जुड़ी हूं, मैं शांत हूं, मैं संतुलित हूं।’
कृतज्ञता वर्षा ध्यान (7 मिनट)- प्रकृति और इस ब्रह्मïण्ड के प्रति कृतज्ञता।
समय: दोपहर या रात के समय जब काम
पूरे हो चुके हों।
स्थान: एकांत, जहां आप ध्यान लगा सकें।
विधि:
1. ध्यान मुद्रा में बैठें।
2. हल्का संगीत या वर्षा की रिकॉॄडग चला सकते हैं।
3. गहरी सांस लें और हर सांस के साथ ‘धन्यवाद’कहें- अपने शरीर को, अपने जीवन को, अपने परिवार को।
4. कल्पना कीजिए कि आपके चारों ओर सुनहरी बारिश हो रही है जो आशीर्वादों से
भरी है।

‘मैं आभारी हूं, मैं संपूर्ण हूं, मैं दिव्यता से जुड़ी हूं।’ स्वच्छता और समर्पण मेडिटेशन (5 मिनट)-
‘भीतर से बाहर तक स्वच्छता।’
समय: जब बारिश के बाद वातावरण साफ हो।

स्थान: बगीचा, छत या खुली हवा।
विधि:
1. खड़े होकर दोनो हाथ फैलाएं।
2. धीरे-धीरे आंखें बंद कर लें और अपने शरीर को वर्षा की ताजगी से भरता हुआ महसूस करें।
3. हर सांस के साथ कल्पना करें कि आपके भीतर की सारी नकारात्मकता बाहर निकल
रही है।

‘मैं मुक्त हूं, मैं स्वच्छ हूं, मैं सच्चे आत्मा से जुड़ी हूं।’
रसोई मेडिटेशन (3 मिनट)- ‘हर कार्य में
ध्यान’
समय: जब आप चाय या खाना बना रही हों तभी कर सकते हैं।
विधि:
1. अगली बार जब आप सब्जी काटें या चाय बनाएं, उस हर क्रिया में पूरी उपस्थिति रखें।
2. उस क्षण को ध्यानपूर्वक जिएं।
3. यह मेडिटेशन सिखाता है कि ध्यान केवल आंखें बंद करके ही नहीं होता, बल्कि हर
छोटे कार्य में भी हो सकता है।

‘मैं हर कार्य में पूर्ण हूं, मैं हर क्षण में सजीव हूं।’
दर्शन का सार: एक गृहिणी अगर दिन में केवल 10-15 मिनट इस तरह का मानसून मेडिटेशन करे, तो वह न केवल मानसिक रूप से संतुलित रहेगी, बल्कि उसके अंदर की ऊर्जा पूरे परिवार को संतुलित कर सकती है। बारिश आती है धूप के बाद, ठीक वैसे ही ध्यान आता है भागदौड़ के बाद। इस
मानसून में अपने भीतर उतरिए, शांति की बूंदों से भीगिए और कहिए-