Mind Training: आपके पास ऑफिस का एक अहम प्रोजेक्ट है, आपका अगला प्रमोशन उसी पर निर्भर करता है। जाहिर सी बात है कि आपको इसे अच्छे से पूरा करना है लेकिन आपको डर बहुत लग रहा है। चाहे कोई डरावनी रिपोर्ट लिखनी हो, वर्कआउट प्लान पर टिके रहना हो, या उस प्रोजेक्ट को पूरा करना हो जिसे आप लंबे समय से टाल रहे थे, ऐसे मुश्किल हालातों के लिए अपने ब्रेन को ट्रेन करना सबसे जरूरी काम है। जरूरी तो यह है कि हम ऐसे मुश्किल हालातों के लिए अपने मस्तिष्क की मांसपेशियों को ट्रेनिंग दें ताकि कठिन से कठिन चीजों को भी बेहतर तरीके से किया जा सके। आइए जानते हैं कैसे।
धीमी शुरुआत करें, लेकिन जरूर करें

हम अक्सर “सही” पल का इंतजार करते हैं, सोचते हैं कि जब हम सही मूड में होंगे तब करेंगे। लेकिन ऐसा शायद ही कभी होता है। इसलिए बस शुरुआत कर दें, भले ही यह शुरुआत गड़बड़ी से हो। कुछ न करने से बेहतर है कि कुछ करना, शुरुआत इसी से ही होती है।
बड़े को बदलें छोटे में
यह सच है कि जब आपका दिमाग कुछ बड़ा देखता है, तो वह घबरा जाता है, डर जाता है। जैसे किताब लिखने का काम बहुत बड़ा लगता है लेकिन सिर्फ 300 शब्द लिखने हों तो डर नहीं लगता है। इसी तरह बड़े लक्ष्यों को छोटे छोटे कामों में ब्रेक करके करने से आपके दिमाग को तैयार करता है।
पैटर्न बनाना है जरूरी
दिमाग को पैटर्न पसंद है, इसलिए ऐसा रिचूअल बना लें जो “काम के मूड” का इशारा दे। यह आवाज कैंसल करने वाला हेडफोन हो सकता है, चाय बनाना हो सकता है या कोई खास डाक्यूमेन्ट देखना हो सकता है। इस तरह की आदतें ध्यान केंद्रित करने के लिए ट्रिगर की तरह काम करती हैं।
बोरियत के साथ हो जाएं कम्फर्टेबल

कठिन काम बहुत बोर करते हैं। यदि आप बोर होने में कम्फर्टेबल हो जाते हैं, तो यह एक ऐसी सुपर पावर है, जो सबके पास नहीं होती है। बेचैनी महसूस होने पर अपने फ़ोन को देखने से परहेज करें। इस तरह से आपका मेंटल स्टैमिना मजबूत होता है।
टाइम बॉक्सिंग का करें इस्तेमाल
अपने आप को एक फिक्स्ड समय दें, उदाहरण के लिए फलां काम को पूरा करने के लिए 25 मिनट। इसके बाद एक छोटा ब्रेक लें। इस तरह से “मुझे पूरे दिन इस काम को करना है” का डर दूर हो जाता है।
सोचें संघर्ष के बारे में भी
माना कि सब कहते हैं अपनी सफलता के बारे में सोचो, लेकिन निराशा, छोड़ने की इच्छा और कड़ी मेहनत के बारे में भी सोचें। यदि आप मानसिक रूप से कठिन जीवन को देखने और जीने के लिए तैयार हैं, तो आपका डर काफी हद तक कम हो जाएगा।
खुद से करें बात

आप मानें या न मानें, आपके अंदर से आने वाली आवाज आपके कई मुश्किल हालातों को कम करके आपको आगे बढ़ने का जज्बा देती है। “मैं इसे नहीं कर पाऊंगी” की जगह “यह काम बेहद कठिन है, लेकिन मैं इसे कर लूंगी” जैसी बात सोचने की कोशिश करें। यह जान लें कि आपकी भाषा मस्तिष्क और सोच को आकार देती है, इसलिए ऐसे बोलें जैसे कोई काम पूरा होने वाला हो।
सबको बताएं (यदि मदद मिले तो)
अपने किसी दोस्त से कहें कि आप सप्ताह के अंत तक बताएंगे कि अअपने कहां तक प्रगति की है। जब दूसरे जान जाएंगे कि आप किसी चीज पर काम कर रहे हैं, तो मुश्किल होने पर भी आपके पीछे हटने की आशंका कम हो जाएगी। आप किसी न किसी तरह से उस काम को पूरा करने की पूरी कोशिश करेंगी।
कड़ी मेहनत को दें पुरस्कार
यदि आपने किसी कठिन लेख को पूरा कर लिया तो टहलने जाएं। यदि अपना एक चैप्टर पूरा कर लिया, तो अपने फेवरेट शो का एक एपिसोड देख लें। खुद को रिवार्ड दें, यह आपको आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है।
प्रो की तरह करें आराम

अपने मस्तिष्क को ट्रेनिंग देने का मतलब सिर्फ पुश करना नहीं है। यह रिलैक्स करने के बारे में भी है। भरपूर नींद लें, सोशल मीडिया से अलग असल में ब्रेक लें, और अपने मस्तिष्क को ठीक होने दें। बर्नआउट फ्लेक्सिबिलिटी नहीं बनाता बल्कि बैलेंस बनाता है।
