Fake Paneer Identify: बॉडी को हेल्दी और फिट रखने के लिए एक्सपर्ट प्रोटीन रिच फूड खाने की सलाह देते हैं। सामान्यतौर पर नॉन-वेजिटेरियन प्रोटीन की पूर्ति चिकन और अंडे से कर लेते हैं लेकिन वेजिटेरियन पनीर और सोया को ही प्रोटीन का मुख्य स्त्रोत मानते हैं। यही वजह है कि तीज-त्योहारों के अलावा पनीर दैनिक आहार का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। पनीर जिसे एक हेल्दी ऑप्शन माना जाता है आज की तरीख में उससे ज्यादा मिलावटी और खतरनाक और कुछ नहीं हो सकता। FSSAI द्वारा हाल ही में किए गए परीक्षणों में 1300 किलोग्राम से भी अधिक नकली पनीर का पता लगाया गया जिसे धडल्ले से मार्केट में अधिक कीमत पर बेचा जा रहा था। ये फेक पनीर स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। यदि आप भी अपनी डेली डाइट में पनीर को शामिल कर रहे हैं तो सावधान हो जाइए। पनीर खाने से पहले एक बार ये क्वालिटी टेस्ट जरूर कर लें।
क्या कहती है FSSAI की रिपोर्ट

FSSAI यानी फूड सेफ्टी एंड स्टेंर्डड अथॉरिटी ऑफ इंडिया द्वारा किए गए परीक्षणों में दूध और दूध से बने अन्य प्रोडक्ट्स को मिलावटी बताया गया है। फूड डिपार्टमेंट ने पनीर के 122 सैंपल लिए थे जिसमें से 83 प्रतिशत पनीर के सैंपल क्वालिटी के मानकों पर खरे नहीं उतरे। पनीर को हानिकारक केमिकल्स और तरल पदार्थों से तैयार किया जा रहा है जो हार्ट अटैक, कैंसर और किडनी संबंधित बीमारियों को बढ़ावा दे सकते हैं।
कैसे बनता है फेक पनीर
फेक पनीर को यूरिया, स्टार्च, डिटर्जेंट, मैदा और अरारोट से तैयार किया जाता है। ये देखने में बिल्कुल सामान्य पनीर की तरह ही लगता है इसलिए इसकी पहचान करना बेहद मुश्किल है। नकली पनीर में फॉर्मेलिन नामक केमिकल भी मिलाया जाता है जो विभिन्न प्रकार के कैंसर को बढ़ावा दे सकता है। इसके अलावा इस पनीर में पाम ऑयल भी होता है जो फैटी लिवर और हार्ट प्रॉब्लम को बढ़ा सकता है।
फेक पनीर के नुकसान
– फेक पनीर का नियमित सेवन करने से पाचन से जुड़ी समस्या हो सकती है। इससे गैस, अपच और फूड पॉइजनिंग हो सकती है।
– फेक पनीर कैंसर और लिवर डैमेज जैसी गंभीर समस्याओं को बढ़ावा दे सकता है।
– ऐसे पनीर का सेवन करने से बच्चों की ग्रोथ पर असर पड़ता है।
– नकली पनीर को सिंथेटिक और डिटर्जेंट से तैयार किया जाता है जो किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है।
– पनीर में इस्तेमाल किया गया यूरिया और फॉर्मेलिन कैंसर का कारण बन सकता है।
– इस प्रकार का पनीर स्किन एलर्जी को भी बढ़ावा दे सकता है।
ऐसे करें फेक पनीर की पहचान

आयोडीन टेस्ट
FSSAI के अनुसार फेक पनीर की पहचान आयोडीन टेस्ट से कर सकते हैं। सबसे पहले आप पनीर का एक टुकड़ा लें उसमें आयोडीन की कुछ बूंदें डाल दें। यदि पनीर का रंग सफेद से नीला या काला हो जाता है तो इसका मतलब है कि पनीर मिलावटी है।
वॉटर टेस्ट
ये एक बेहद आसान तरीका है पनीर की क्वालिटी चेक करने का। इसके लिए आप एक पनीर का टुकड़ा ले लें और इसे गर्म पानी में 10-15 मिनट के लिए डाल दें। यदि पनीर का टुकड़ा पानी में तैरता रहता है और उसकी बनावट में भी अंतर नहीं आता तो ये पनीर असली है। लेकिन यदि पनीर पानी में घुल जाता है या रबड़ की तरह हो जाता है तो पनीर नकली है।
स्मेल टेस्ट
दूध और दूध से बनी चीजों में हल्की दूधिया स्मेल होती है। लेकिन यदि पनीर को केमिकल से बनाया गया है तो उसमें खट्टी बदबू आ सकती है। केमिकल से तैयार किया गया पनीर रबड़ की तरह सख्त और चिमचोड़ होता है।
दाल टेस्ट
दाल टेस्ट करने के लिए सबसे पहले पनीर को गर्म पानी में उबाल लें। फिर पनीर को ठंडा कर लें। इसमें थोड़ी सी तुअर डाल डालें और लगभग 10 मिनट के लिए ऐसे ही छोड़ दें। यदि पानी का रंग हल्का लाल हो जाता है तो समझ लीजिए कि आपका पनीर खराब है।
इन बातों का रखें ध्यान
– पनीर असली है या नकली इसकी जांच अवश्य करें।
– खासकर बच्चों को पनीर देने से पहले क्वालिटी चेक जरूर करें।
– प्रोटीन के लिए पनीर की जगह सोया और दालों का सेवन कर सकते हैं।
– पनीर यदि नकली है तो तुरंत शिकायत करें।
– जहां तक हो सके घर में पनीर बनाने का प्रयास करें। ताकि बीमारियों से बचा जा सके।
