Irregular Heartbeat and Stroke Risk: एट्रियल फिब्रिलेशन यानीअनियमित दिल की धड़कन, दुनिया भर में दिल से जुड़ी सबसे आम बीमारियों में से एक है और यह स्ट्रोक का एक बड़ा कारण भी है। पिछले कुछ दशकों में इस बीमारी से पीड़ित लोगों की संख्या तेजी से बढ़ी है। 1990 से 2021 के बीच दुनिया भर में इसके मामलों में 57% की बढ़ोतरी हुई, इससे होने वाली मौतों में 71% की वृद्धि हुई, और विकलांगता के मामलों में 62% की बढ़ोतरी देखी गई। इसलिए जिन लोगों को यह बीमारी पहले से है, उनमें स्ट्रोक को रोकना सबसे जरूरी काम है।
इस बीमारी में दिल की धड़कन अनियमित हो जाती है। इसकी वजह से दिल के ऊपरी हिस्सों में खून का बहाव सही तरह से नहीं हो पाता और खून का थक्का बनने का खतरा बढ़ जाता है। यह थक्का खून की नलियों के जरिए शरीर के किसी भी हिस्से में जा सकता है। अगर यह दिमाग की नसों में पहुंच जाए तो दिमाग को खून मिलना बंद हो जाता है और स्ट्रोक हो सकता है।
धड़कन सुधरने से अच्छा लगता है, पर यह काफी नहीं

दिल की धड़कन को सामान्य करना इस बीमारी के इलाज का एक जरूरी हिस्सा है। यह दवाओं या एब्लेशन जैसी प्रक्रिया से किया जा सकता है। इससे घबराहट, सांस फूलना और थकान जैसी तकलीफें कम होती हैं। लेकिन लक्षण कम होने का मतलब यह नहीं कि स्ट्रोक का खतरा भी खत्म हो गया।
छुपा हुआ खतरा
यह बीमारी कभी-कभी बिना किसी लक्षण के, चुपचाप थोड़े-थोड़े समय के लिए आती रहती है। मरीज को पता भी नहीं चलता, लेकिन इन शांत दौरों में भी खून का थक्का उतना ही बन सकता है जितना लक्षण वाले दौरों में। इसके अलावा, कुछ मामलों में यह बीमारी दिल की बनावट में भी स्थायी बदलाव कर देती है। ऐसे में धड़कन काबू में आने के बाद भी थक्का बनने का खतरा बना रह सकता है।
असली सुरक्षा: खून पतला करने वाली दवाइयां

स्ट्रोक से बचाव का सबसे भरोसेमंद तरीका है एंटीकोएगुलेशन थेरेपी, यानी वो दवाइयां जो खून को पतला रखती हैं और थक्का बनने से रोकती हैं। यह दवा शुरू करने का फैसला मरीज की उम्र और दूसरी बीमारियों जैसे हाई ब्लड प्रेशर, शुगर, दिल की कमजोरी, नसों की बीमारी या पहले कभी स्ट्रोक होने के आधार पर किया जाता है। अगर स्ट्रोक का खतरा मध्यम या अधिक हो, तो यह दवा लेनी चाहिए, चाहे धड़कन काबू में हो या नहीं।
पूरा इलाज एक साथ जरूरी है
स्ट्रोक रोकने के लिए सिर्फ धड़कन ठीक करना काफी नहीं है। इसके साथ-साथ खून पतला करने वाली दवाइयां लेना, ब्लड प्रेशर और शुगर को काबू में रखना, और वजन नियंत्रण सहित स्वस्थ जीवनशैली अपनाना भी उतना ही जरूरी है। धड़कन सुधरने से मरीज को बेहतर महसूस होता है और जीवन की गुणवत्ता सुधरती है। लेकिन स्ट्रोक से बचाव एक लंबी प्रक्रिया है और इस बीमारी की गंभीर जटिलताओं को कम करने के लिए यह बेहद जरूरी है।
डॉ. कार्तिकेय भार्गव, वरिष्ठ निदेशक, इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी, कार्डियक केयर, मेदांता, गुरुग्राम
