Tips for a Healthy Heart: हमारे दिल तक खून पहुंचाने वाली आर्टरीज समय के साथ संकुचित हो जाती हैं, जिससे हार्ट अटैक और गंभीर कार्डियक समस्याएं हो सकती हैं।
नियमित जांच करवाएं
लिपिड प्रोफाइल, ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर समय-समय पर जांचें और डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या हाई कोलेस्ट्रॉल को समय रहते नियंत्रित करें।
दिल की सेहत बनाए रखना अब पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गया है। सर्दियों और बदलती जीवनशैली से यह खतरा और बढ़ जाता है। इसे रोकने के लिए रोजाना शारीरिक गतिविधि, स्वस्थ आहार, तनाव पर नियंत्रण और समय पर हेल्थ चेकअप बेहद जरूरी हैं।
हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट
हार्ट अटैक का मुख्य कारण कोरोनरी धमनी (आर्टरीज) का संकुचन है, जिससे हार्ट को पर्याप्त ऑक्सीजन और पोषक तत्व नहीं मिल पाते। एंजाइना में छाती में भारीपन आराम करने पर गायब हो जाता है, हार्ट अटैक में रक्त प्रवाह पूरी तरह रुक जाता है और मांसपेशियां 20 मिनट में नुकसान उठाने लगती हैं, जबकि कार्डियक अरेस्ट में हार्ट पूरी तरह काम करना बंद कर देता है। एंजाइना आराम करने पर दूर होने वाली छाती की असुविधा है और यह भविष्य में हार्ट अटैक का संकेत हो सकती है। हार्ट अटैक में पहली एक घंटे के भीतर आपातकालीन उपचार देने से 95′ नुकसान रोका जा सकता है। देर होने पर मृत्यु का जोखिम 30-40′ और तुरंत इलाज मिलने पर केवल 2-3′
रहता है। कार्डियक अरेस्ट में अस्पताल के बाहर खतरा और बढ़ जाता है। इसलिए सीपीआर सीखना हर किसी के लिए जरूरी है। 1-5′ जीवन बचाना भी बड़ा फर्क डाल सकता है।
सर्दियों में हार्ट अटैक का बढ़ता जोखिम
सर्दियों में हार्ट अटैक और एंजाइना का खतरा बढ़ जाता है क्योंकि ठंड शरीर पर अतिरिक्त तनाव डालती है। ठंडे तापमान में रक्तचाप बढ़ सकता है, शरीर पूरी तरह ठंड के लिए तैयार नहीं होता, और तनाव हार्मोन व सूजन बढ़ाते हैं। साथ ही, सर्दियों में लोग अधिक निष्क्रिय हो जाते हैं, बाहर कम निकलते हैं
और तला हुआ, मीठा व भारी भोजन का सेवन बढ़ जाता है। इन सभी कारणों से हार्ट संबंधी घटनाएं इस मौसम में ज्यादा होती हैं।
सर्दियों में प्रदूषण और हार्ट हेल्थ
क्रॉनिक प्रदूषण हार्ट और रक्त वाहिकाओं ब्लड वेसल्स की बीमारियों का जोखिम 10-15′ बढ़ा देता है। सर्दियों में दिल्ली-एनसीआर जैसे क्षेत्रों में हवा स्थिर और धूप कम होने के कारण प्रदूषण सुबह सबसे ज्यादा रहता है। इसलिए मॉर्निंग वॉक से बचें, लेट मॉर्निंग, दोपहर या शाम को बाहर जाएं
और घर में एयर प्यूरीफायर इस्तेमाल करें।
हार्ट अटैक के लक्षण और उपचार

पुरुषों में छाती में जकड़न या तेज दर्द, महिलाओं में एसिडिटी, गले में जलन या पेट से खट्टा पानी हार्ट अटैक के संकेत हो सकते हैं। आराम के बाद भी असुविधा बनी रहे तो तुरंत चिकित्सकीय मदद लें और खुद ड्राइव न करें। अचानक सांस फूलना या रोजमर्रा की गतिविधियों में असुविधा भी चेतावनी है।
70-80′ ब्लॉकेज पर बायपास, कम अवरोध पर एंजियोह्रश्वलास्टी और स्टेंट से रक्त प्रवाह बहाल होती है और लक्षणों में सुधार होता है।
दिल के लिए जरूरी आहार
हार्ट की सेहत और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने के लिए मेडिटेरेनियन डाइट और डैश डाइट प्रभावी मानी जाती हैं। मेडिटेरेनियन डाइट में सब्जियां, फल, पूरे अनाज, मेवे, जैतून का तेल और समुद्री भोजन शामिल होते हैं, जबकि डैश डाइट उच्च रक्तचाप नियंत्रित करने के लिए फाइबर और पोषक
तत्वों से भरपूर भोजन पर आधारित है। दोनों डाइट्स का उद्देश्य है स्वस्थ वसा और पोषक तत्वों के जरिए हार्ट की सुरक्षा करना। दिनभर के आहार में 4-5 भाग कार्बोहाइड्रेट (चपाती, चावल, पास्ता), 3-4 भाग ताजी सब्जियां (सैलेड, खीरा, गाजर), 2-3 भाग फल और 2-3 भाग डेयरी, अंडा, मांस या मछली शामिल करें। खाना बनाते समय तेल, घी और नमक न्यूनतम मात्रा में रखें। ताजी सब्जियां और फल अधिक लें, अस्वस्थ वसा और नमक कम करें।
चीनी और नमक का ज्यादा सेवन
आजकल शुगर इतनी आसानी से मिल जाती है कि इसे ‘नई धूम्रपान’ कहा जाता है। अतिरिक्त शुगर सिर्फ वजन नहीं बढ़ाती, बल्कि कोलेस्ट्रॉल और वसा में बदलकर हार्ट, किडनी और मस्तिष्क जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ाती है। नमक का सेवन दिनभर में लगभग 6 ग्राम यानी एक चम्मच तक सीमित रखें। घर में सामान्य नमक ठीक है, लेकिन प्रोसेस्ड फूड, स्नैक्स और चिप्स में नमक ज्यादा होता है।
