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How to prevent cancer in hindi

Cancer Prevent : कैंसर रोग लोगों को इतना भयाक्रांत करता है कि वे जीवन के प्रति आशा छोड़ मृत्यु के दिन गिनने लगते हैं, लेकिन अब कैंसर लाइलाज रोग नहीं रह गया है। आइए कैंसर से बचने के उपायों पर नजर डालें।

कैंसर कोई नई बीमारी भी नहीं है। आयुर्वेदिक ग्रंथों में इसे कर्क रोग की संज्ञा दी गई है। यदि समय रहते इस रोग की शुरुआती अवस्था का पता चल जाए, तो इसका इलाज संभव है।

कैंसर आज विश्वव्यापी रोग बन गया है जिसकी वजह से कई लोग असमय ही ‘काल के गाल’ में समाते जा रहे हैं। दिनोंदिन यह रोग ‘सुरसा की मुंह’ की तरह फैलता ही जा रहा है, जिसे रोकने के लिए विश्व स्तर पर वैज्ञानिकों द्वारा नित्य नये-नये शोधों को अंजाम दिए जा रहें हैं। हाल ही में कई शोध सामने आए हैं जो कैंसर जैसी बिमारियों पर लगाम लगा सकते हैं। ऐसे शोधों पर ही आधारित है यह आलेख जिससे आप खुद को इस रोग से सर्तक रख सकते हैं।

कैंसर के इलाज

कैंसर के इलाज की तीन चिकित्सा विधियां हैं- पहली, कीमोथैरेपी (दवा द्वारा कैंसर का इलाज)। दूसरी, रेडियोथैरेपी (रेडिएशन द्वारा इलाज) और ऑपरेशन द्वारा इलाज। इसके अलावा हार्मोन थैरेपी एवं इम्यूनोथैरेपी पर भी शोधकार्य जारी हैं। अब कीमोथैरेपी के तहत नई कारगर दवाएं उपलब्ध हो चुकी हैं। इन दवाओं का साइड एफैक्ट भी पूर्ववर्ती दवाओं की तुलना में काफी कम है।

कैंसर की दवा है-शहद

क्रोएशिया में हुए अध्ययन के अनुसार शहद और जेली के सेवन से कैंसर से बचा जा सकता है। जगरेब यूनिवर्सिटी में हुए अनुसंधान के दौरान मधुमक्खियों से तैयार उत्पाद चूहों में ट्यूमर की वृद्धि रोकने में बेहद कारगर साबित हुए। अध्ययन के दौरान वैज्ञानिकों ने चूहों में ट्यूमर पैदा करने वाली कैंसर से प्रभावित कोशिकाओं को इंजेक्ट किया।

इससे शहद का सेवन करने वाले चूहों में ट्यूमर बनना रुक गया तथा जिन चूहों में मधुमक्खियों का विष इंजेक्ट किया गया उनके ट्यूमर सिकुड़ने लगे। वैज्ञानिकों ने शोध में पाया कि शहद के सेवन से कैंसर का खतरा कम हो जाता है। लेकिन पहले से ही कैंसर से पीड़ित मरीजों में यह उतना कारगर नहीं हो पाया।

कैंसर की रोकथाम करे ब्रेड से

जर्मनी के वैज्ञानिकों के अनुसार ब्रेड की बाहरी सतह एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होती है जो कि कैंसर की रोकथाम में सक्षम है। शोधकर्ताओं के अनुसार ‘ब्रेड बनाते समय ब्रेड की इस बाहरी सतह में बड़ी मात्रा में रेशे इक_े हो जाते हैं। इन रेशों में कैंसर रोधी गुण होते हैं। ब्रेड बनाते समय प्रोनायललाइसिन नामक एंटीऑक्सीडेंट जो कैंसर को रोकने में काफी प्रभावी है, ब्रेड की बाहरी परतों में आकर जमा हो जाता है। यह एंटीऑक्सीडेंट विशेष प्रकार का प्रोटीन बनाता है। जो कैंसर से लड़ने में पूरी तरह सक्षम है।’

धूप करे कैंसर का इलाज

वैज्ञानिकों के अनुसार ‘धूप त्वचा कैंसर सहित कुछ खास किस्म के कैंसर रोगियों के लिए लाभदायक है।’

कैरोलिंस्का इंस्टीट्यूट और उपसाला यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों के अनुसार ‘सूर्य की रोशनी और सन लैंप से निकलने वाली अल्ट्रावॉयलेट (पराबैंगनी) किरणें कैंसर के खतरे को 30 से 40 प्रतिशत तक कम कर देती हैं।’ वैज्ञानिकों के अनुसार ‘शरीर में विटामिन-डी के अत्यधिक निर्माण से त्वचा कैंसर का खतरा कम हो जाता है। हालांकि अधिक समय तक तेज धूप के संपर्क में रहना भी त्वचा के लिए नुकसानदेह होता है।’

विटामिन ‘डी’ युक्त धूप न केवल आपकी हड्डियों को मजबूत बनाता है, बल्कि कैंसर और दिल की बिमारियों को रोकने में भी मददगार साबित हो सकता है। एक अध्ययन में खुलासा हुआ है।

समाचार पत्र ‘डेली मेल’ के अनुसार, ठंडे देशों में धूप के नियमित रूप से न मिलने की वजह से आधी आबादी में विटामिन ‘डी’ की कमी पाई जाती है। विटामिन ‘डी’ से शरीर को कैल्शियम मिलता है और हड्डियां मजबूत होती हैं। इसके साथ ही यह अल्जाइमर जैसी घातक बीमारी को रोकने में भी मददगार साबित हो सकता है।

गौरतलब है कि विटामिन डी मछली और अंडों से मिलता है, लेकिन इसकी 90 फीसदी आपूर्ति सूर्य के धूप से होती है। हाल ही में हुए शोध से पता चला है कि विटामिन डी को पूरक के तौर पर लेने से प्रोस्टेट कैंसर पर काबू पाया जा सकता है। यह भी कहा गया है कि गर्भावस्था में महिलाओं को और बच्चों को विटामिन ‘डी’ पूरी खुराक देने से ‘मल्टीपल स्केलेरोसिस’ से 80 फीसदी तक बचा जा सकता है।

‘साइंस्टीफिक एडवाइजरी कमिटी ऑन न्यूट्रीशन एंड सुरे युनिवर्सिटी’ की सुजान लनहाम ने कहा, ‘ब्रिटेन में 14 हजार गर्भवती महिलाओं पर किए गए एक शोध से पता चला कि उनमें से 90 फीसदी से अधिक को विटामिन ‘डी’ पर्याप्त मात्रा में नहीं मिलता है।’ उन्होंने बताया, ‘शरीर को सही रूप से कार्य करने के लिए विटामिन ‘डी’ की जरूरत होती है।’

कैंसर का दुश्मन कोको

न्यूयॉर्क के कॉर्नेल यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों के अनुसार ‘गर्म कोको का सेवन कैंसर से लड़ने में मदद कर सकता है।’

फूड केमिस्ट्री के प्रोफेसर चांगली ने गर्म चॉकलेट पेय की तुलना कैंसर से लड़ने वाले अन्य पदार्थों ग्रीन टी, ब्लैक टी और रेड वाइन से की। इनमें कोको के रिजल्ट सबसे असरदार रहे।

प्रो. चांगली के अनुसार ‘कोको में एंटीऑक्सीडेंट प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। ये एंटीऑक्सीडेंट ही शरीर में कैंसर उत्पन्न करने वाले फ्री रेडिकल्स से लड़ते हैं। फ्री रेडिकल्स शरीर में स्वत: उत्पन्न होते हैं तथा इनके अधिक मात्रा में इक_ा होने के कारण कैंसर होता है। इनसे बचाव के लिए शरीर को एंटीऑक्सीडेंट की जरूरत होती है, जो फलों, सब्जियों और कोको से मिलते हैं।’

ताजी सब्जियां खाएं, कैंसर भगाएं

स्कॉटलैंड में रौलेड अनुसंधान संस्थान के प्रभारी प्रोफेसर फिलिप जेम्स के अनुसार ‘विटामिनों से भरपूर फल व सब्जियां लेने से कैंसर से बचाव किया जा सकता है। लेकिन अभी यह पता नहीं चल सका है कि फल व सब्जियों में ऐसा कौन-सा पदार्थ है जो कैंसर से बचाव करता है।’ प्रो.जेम्स के मुताबिक ‘धूम्रपान करने वाले लोग जो नियमित रूप से ताजा सब्जियां खाते हैं उन्हें फेफड़ों का कैंसर बहुत कम होता है। हरी व पीली सब्जियों की खुराक लेने से धूम्रपान से होने वाले कैंसर का खतरा बीस प्रतिशत तक कम हो जाता है।’

एथेंस में हुए एक अध्ययन के अनुसार कम मात्रा में ताजी सब्जियां खाने वाली महिलाओं में स्तन कैंसर की दर उन महिलाओं की अपेक्षा आठ गुना ज्यादा मिली जो हरी सब्जियां का भरपूर प्रयोग करती थीं।

कैंसर से बचाव में मददगार है टमाटर

वैज्ञानिकों के मुताबिक टमाटर खाने से लोगों में प्रोस्टेट कैंसर का खतरा कम हो जाता है। साथ ही टमाटर का सेवन ट्यूमर बढ़ने की गति कम करने में मददगार साबित होता है। नेपल्स विश्वविद्यालय द्वारा किए गए एक शोध के दौरान चूहों को टमाटर से भरपूर भोजन देने पर उनमें प्रोस्टेट कैंसर की रोकथाम के बेहद सकारात्मक प्रभाव देखने को मिले। ब्रिटेन के कैंसर शोध संस्थान के जोना ओविंस ने हालांकि अध्ययन के इन निष्कर्षों से असहमति जताई है। उन्होंने कहा ‘इस अध्ययन में इस बात के पर्याप्त सबूत नहीं मिले हैं कि टमाटर के सेवन से इन्सानों में बिमारियों का विकास रुक जाता है।’

एक्सटैसी से मिल सकती है कैंसर मरीजों को राह

एक्सटैसी से मिल सकती है कैंसर मरीजों को राहत
अमेरिका में एक महत्त्वपूर्ण अध्ययन के अंतर्गत विवादित दवा एक्सटैसी का प्रयोग उन मरीजों पर किया जाएगा, जिनमें कैंसर रोग अंतिम चरण में पहुंच चुका है। हॉवर्ड मेडिकल स्कूल के शोधकर्ता इस दवाई का प्रयोग ऐसे मरीजों पर करेंगे जो कि अपनी बीमारी से हताश होकर आत्महत्या के बारे में सोचने लगते हैं।

उनके अनुसार इस दवा से ऐसे मरीजों को मदद मिल सकती है। ऐसे कई मरीज जो मौत के विषय में अपने मित्रों और परिजनों से बात नहीं करते थे, लेकिन एक्सटैसी लेने के बाद वे मौत के अलावा अन्य विषयों पर भी चर्चा करने लगे, जिनसे वे पहले बचते थे। यह दवा एम.डी.एम.ए के नाम से जानी जाती है। इसके उपयोग से ऊर्जा में वृद्धि, कार्यशक्ति में वृद्धि तथा यह भूख को भी बढ़ाती है। लेकिन ज्यादा मात्रा में लेने पर यह गुर्दे व हृदय को नुकसान पहुंचाती है।

होम्योपैथी में है कैंसर का इलाज

कैंसर जैसी भंयकर बीमारी भी अब लाइलाज नहीं है। होम्योपैथी के द्वारा इस पर रोक लगाई जा सकती है। यह दावा है विश्व होम्योपैथी विकास संगठन के अध्यक्ष डॉ.अलख मोहन माथुर का।

होम्योपैथी में कैंसर क्योर नाम से एक दवा की खोज की गई है, जिसे भारत सरकार द्वारा पेटेंट भी कर दिया गया है। कैंसर के लक्षण सबसे पहले नाखून, आंखों और जीभ पर आते हैं। इसमें मरीज की आंखें पीली हो जाती हैं, नाखून काले पड़ जाते हैं तथा जीभ में सूजन आ जाती है। इन सब लक्षणों से कैंसर की पुष्टि होती है। इसकी जांच बगैर बायोप्सी टेस्ट के भी हो सकती है। डॉ. माथुर का दावा है कि होम्योपैथी में कैंसर के इलाज के साथ-साथ अस्थिरोग का भी सफल इलाज संभव है।

मूंगफली से होगा कैंसर से बचाव

मंूगफली सेहत के लिए बेहद फायदेमंद है। फ्लोरिडा यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों के अनुसार मूंगफली के सेवन से कोशिकाएं स्वस्थ रहती हैं। इसमें पाया जाने वाला एंटीऑक्सीडेंट कोशिकाओं को क्षतिग्रस्त होने से रोकता है जिससे दिल की बीमारी व कैंसर होने का खतरा कम हो जाता है।

वैज्ञानिकों के मुताबिक भुनी हुई मूंगफली और भी फायदेमंद होती है इसमें एंटीऑक्सीडेंट की मात्रा 22 प्रतिशत तक होती है। इसके प्रयोग से कैंसर व दिल की बीमारी की संभावना काफी कम हो जाती है। मूंगफली में एंटीऑक्सीडेंट की मात्रा फलों से कम नहीं होती।

ब्रेस्ट कैंसर को रोकता है जैतून का तेल

नार्थ वेस्टर्न यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए अनुसंधान के अनुसार जैतून का तेल ब्रेस्ट कैंसर के रोगियों में ट्यूमर की वृद्धि को रोकता है। जैतून के तेल में ओलिक एसिड की भरपूर मात्रा होती है। ओलिक एसिड उस जीन को निष्क्रिय कर देता है जो ट्यूमर की वृद्धि करता है।

इसके अलावा ओलिक एसिड ब्रेस्ट कैंसर में दी जाने की दवा टरसेप्टिन की क्षमता को भी बढ़ा देता है। ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित ऐसी महिलाएं जो नियमित रूप से जैतून का तेल प्रयोग करती हैं, ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित अन्य महिलाओं के मुकाबले अधिक समय तक जीवित रहती हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक जैतून का तेल ब्रेस्ट कैंसर के अलावा हार्ट डिजीज और बुढ़ापे से भी सुरक्षा प्रदान करता है।

ब्लड कैंसर से मिल सकती है मुक्ति

ब्रिटिश वैज्ञानिकों के अनुसार भविष्य में ब्लड कैंसर से बचाव के लिए टीका उपलब्ध होगा। यह टीका स्वस्थ व्यक्तियों को भी दिया जा सकेगा। यह शरीर की रोग निरोधक क्षमता बढ़ाकर कैंसर से प्रभावित कोशिकाओं पर हमला करता है। बोन मैरो में पाई जाने वाली प्लाज्मा कोशिकाओं में गड़बड़ी होने से बोन मैरो में ट्यूमर का खतरा रहता है।

इस बीमारी में कीमोथैरेपी और बोन मैरो प्रत्यारोपण के बाद भी रोगी दो-चार साल से ज्यादा जीवित नहीं रहते हैं। जबकि इस टीके से बीमारी से पीड़ित व्यक्तियों में रोग निरोधक क्षमता बढ़ जाएगी।

कैंसर की रोकथाम करेगा ‘एड्स का वायरस’

अमेरिकी वैज्ञानिकों के अनुसार एड्स के विषाणु एच.आई.वी. को कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने में प्रयोग किया जा सकता है।’ कैलीफोर्निया यूनिवर्सिटी में वैज्ञानिकों ने एच.आई.वी. में एड्स पैदा करने वाले अंश को हटाकर उससे चूहों में कैंसर कोशिकाओं को खत्म करने में सफलता प्राप्त की है।
प्रयोग के दौरान त्वचा कैंसर से पीड़ित चूहे पर इस एच.आई.वी. वायरस के प्रभाव को देखा गया। प्रयोग के अगले चरण में इस विषाणु में एक अन्य जीन को प्रवेश करवाने के बाद मानव शरीर पर इसका प्रयोग करने की योजना है।

लीवर कैंसर में फायदेमंद है कॉफी

टोक्यो स्थित नेशनल कैंसर सेंटर के वैज्ञानिकों के अनुसार कॉफी के सेवन से लीवर कैंसर का खतरा कम हो जाता है। अध्ययनकर्ताओं द्वारा नब्बे हजार लोगों पर किए गए शोध के बाद पाया गया कि रोजाना कॉफी पीने वालों को कॉफी नहीं पीने वालों की तुलना में लिवर कैंसर का खतरा 50 फीसदी कम रहता है।

मुख्य अध्ययनकर्ता मोनामी इनोयू के अनुसार ‘दस वर्ष तक किए गए अध्ययनों के आधार पर पता चला है कि कॉफी नहीं पीने वाले एक लाख लोगों में से 547.2 को लीवर कैंसर का खतरा रहता है। जबकि कॉफी का सेवन करने वाले इतने ही लोगों में 214.6 को लिवर कैंसर का खतरा रहता है।’

कैंसर की दवा के अच्छे परिणाम

स्किन कैंसर की एक दवा के शुरुआती परीक्षण में बेहतरीन परिणाम सामने आए हैं। ‘पीएलएक्स 4032’ नाम की यह दवा एडवांस स्टेज के स्किन कैंसर को और फैलने से रोकती है। अमेरिका और ऑस्टे्रलिया में 48 मरीजों पर इस दवा का परीक्षण किया गया। इनमें से 37 मरीजों के ट्यूमर बहुत हद तक सिकुड़ गए। जबकि तीन मरीजों के ट्यूमर पूरी तरह से गायब हो गए। इस दवा का अब बड़े पैमाने पर चिकित्सीय परीक्षण किया जा रहा है।

ग्रीन टी भी है कैंसर रोधी

अमेरिकी अध्ययनकर्ताओं के अनुसार ग्रीन टी (हरी चाय) कैंसर रोधक का कार्य करती है। कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक डॉक्टर जियान यू राव के मुताबिक ‘मूत्राशय कैंसर से पीड़ित रोगियों के लिए ग्रीन टी लाभदायक हो सकती है।’ डॉ. राव के अनुसार ‘ग्रीन टी कैंसर से पीड़ित कोशिकाओं के विभाजन को रोकती है। इस वजह से पीड़ित कोशिकाओं का इलाज आसान हो जाता है।’

मूंगफली से होगा कैंसर से बचाव

मूंगफली सेहत के लिए बेहद फायदेमंद है। फ्लोरिडा यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों के अनुसार मूंगफली के सेवन से कोशिकाएं स्वस्थ रहती हैं।

इसमें पाया जाने वाला एंटीऑक्सीडेंट कोशिकाओं को क्षतिग्रस्त होने से रोकता है जिससे दिल की बीमारी व कैंसर होने का खतरा कम हो जाता है वैज्ञानिकों के मुताबिक भुनी हुई मूंगफली और भी फायदेमंद होती है इसमें एंटीऑक्सीडेंट की मात्रा 22 प्रतिशत तक होती है। इसके प्रयोग से कैंसर व दिल की बीमारी की संभावना काफी कम हो जाती है। मूंगफली में एंटीऑक्सीडेंट की मात्रा फलों से कम नहीं होती।

फल सब्जियां खाओ और कैंसर को दूर भगाओ

धूम्रपान करने वालों को फेफड़ों का कैंसर होने का खतरा रहता है लेकिन विभिन्न प्रकार के फल और सब्जियों को खाने से यह खतरा कम हो जाता है। यह दावा एक नए शोध में किया गया है।

नीदरलैंड के ‘नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर पब्लिक हेल्थ एंड द एनवायर्नमेंट’ के शोधकर्ताओं के मुताबिक कैंसर के खतरे को कम करने का यह उपाय मात्र है। प्रमुख शोधकर्ता प्रोफेसर एच. बास ब्यूनो दे मेसक्यूटा के अनुसार ‘फेफड़ों के कैंसर को रोकने के लिए धूम्रपान छोड़ना सबसे जरूरी है, लेकिन विभिन्न प्रकार की सब्जियों और फलों के सेवन से कैंसर का खतरा कम हो जाता है।’

शोधकर्ताओं ने यह निष्कर्ष 14 सामान्य फल और 26 सब्जियां के गुणों की जांच करके निकाला है। साथ ही शोध के लिए, साढ़े चार लाख से ज्यादा प्रतिभागियों का मूल्याकंन करने के लिए ‘यूरोपियन प्रास्पेक्टिव इन्वेस्टीगेान इन टू कैंसर’ (ईपीआईसी) नामक शोध का इस्तेमाल किया गया।

इस शोध में शामिल 1600 लोगों को फेफड़े का कैंसर था। ताजा शोध के मुताबिक विभिन्न प्रकार के फल और सब्जियों के सेवन से, खास तौर पर धूम्रपान करने वालों को फेफड़े का कैंसर होने का खतरा कम हो जाता है। ब्यूनो के अनुसार, फलों और सब्जियों का सेवन निश्चित मात्रा में करना चाहिए। साथ ही, इन्हें मिलाकर खाना चाहिए।

तंबाकू में निकोटीन पाया जाता है जिससे कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है। इससे बचाव के लिए सुरक्षा उपाय करने जरूरी है। ब्यूनो ने इस बात पर जोर दिया कि धूम्रपान को छोड़कर ही फेफड़ों के कैंसर को रोका जा सकता है। फल खाने से कम होता है

कैंसर का जोखिम

किसी विषय पर नए शोध-अनुसंधानों से नई-नई बातें सामने आती है। अभी तक यह माना जाता रहा है कि विटामिन युक्त टैब्लेट्स -खासकर बीटा कैरोटिन, विटामिन ‘सी’ और विटामिन ‘ई’ का सेवन करने से महिलाओं में कैंसर होने की आशंका या जोखिम कम हो जाता है, पर बात ऐसी है नहीं। अमेरिका के हार्वर्ड मेडिकल स्कूल में हुई एक रिसर्च के तहत 7000 महिलाओं को शुमार किया गया, जिनमें से आधी महिलाएं नियमित तौर पर विटामिन सप्लीमेंंट्स का सेवन करती थीं, जबकि आधी नहीं।

इन सभी लोगों को एक अर्से तक चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया। अंत में यह निष्कर्ष निकाला गया कि सप्लीमेंट्स लेने या न लेने से महिलाओं में कैंसर होने का खतरा कम नहीं होता। इसके विपरीत शोधकर्ताओं का मानना है कि जो महिलाएं अपने आहार में फलों व सब्जियों को अधिक महत्त्व देती हैं, उनमें कैंसर होने की संभावनाएं काफी हद तक कम हो जाती हैं।

पैदल चलने से कैंसर का खतरा कम होता है

रोज पैदल चलने से घटता है कैंसर का खतरा प्रतिदिन आधे घंटे का व्यायाम कैंसर के खतरे को कम देता है। यह व्यायाम तेजी से पैदल चलना, जॉगिंग या फिर सीढ़ियों से चढ़ना-उतरना किसी भी रूप में हो सकता है। यह दावा वर्ल्ड कैंसर रिसर्च कैंसर फंड द्वारा कराए गए शोध में किया गया है।

डेली एक्सप्रेस के मुताबिक जो लोग स्वस्थ रहते हैं, उम्रदराज होने के साथ उन्हें कैंसर होने का खतरा कम हो जाता है। कारण स्वस्थ व्यक्ति छरहरी काया वाले होते हैं। शोध के मुताबिक मोटे लोगों में कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। फंड के प्रमुख रिचर्ड थामसन ने कहा कि ‘इस बात के पुख्ता प्रमाण हैं कि कैंसर से बचने के लिए शारीरिक रूप से स्वस्थ रहना जरूरी है।’

उनके मुताबिक स्वस्थ रहकर कैंसर ही नहीं, बल्कि स्ट्रोक और डायबिटीज के खतरे को भी कम किया जा सकता है। फंड के शीर्ष अधिकारी पल प्रेटवेल ने कहा कि ‘आप कहीं भी रहें लेकिन पैदल चल सकते हैं। इस अभियान का उद्देश्य धन एकत्र करने के साथ कैंसर के प्रति लोगों को जागरूक करना है। साथ ही यह बताना है कि पैदल चलने में आनंद आता है।’

कैंसर में बहुत प्रभावी है जलकुंभी

एक नए शोध के मुताबिक यदि जलकुंभी को खाने में शामिल कर लिया जाए तो यह स्तन कैंसर को रोकने में सहायक साबित हो सकती है। साउथम्पटन यूनिवर्सिटी के शोधार्थियों ने बताया कि विटामिन की प्रचुरता वाला शाकाहारी सलाद भी ऐसा पहला प्राकृतिक स्रोत है जो इस बीमारी से लड़ने में मदद कर सकता है।

शोध में पाया गया कि एक धान के कटोरे के आकार का यह सुपरफूड ब्लड कोशिका में बदलाव के लिए कारगर है जो ट्यूमर की निर्माण प्रक्रिया को बंद कर देता है। रिपोर्ट के मुताबिक जलकुंभी में पाए जाने वाला रसायन पेनीथिल आइसोथियोसाइनेट कोशिकाओं को नुकसान से बचाता है।

शोधार्थियों के अनुसार जलकुंभी खाने के बाद उसके रसायन ब्लड में कई दिनों तक रुके हुए थे। हालांकि शोधकों ने स्तन कैंसर के विरुद्ध जलकुंभी के बेहतर परिणाम को लेकर अभी ज्यादा आशान्वित नहीं है कि यह काम करेगा। शोधार्थियों ने जलकुंभी के परीक्षण के लिए स्तन कैंसर से पीड़ित 12 महिलाओं को शामिल किया था।

लेबोरेटरी टेस्ट में देखा गया है कि जलकुंभी मिश्रण कैंसर कोशिका के विरुद्ध काफी प्रभावी सिद्ध हुई। शोध दल के प्रमुख प्रोफेसर ग्राहेम पैकहम ने बताया कि ‘यह शोध जलकुंभी से होने वाले संभावित स्वास्थ्य लाभों को समझने के लिए एक महत्त्वपूर्ण कदम है।’

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