Sam Village showcases family tourism transforming desert experiences
Family travelers reshape traditional desert tourism character today

Summary : सम गांव की सबसे ख़ास बात

बीते कुछ वर्षों में यहाँ ‘फैमिली टूरिज्म’ के बढ़ते चलन ने राजस्थान के जैसलमेर ज़िले में स्थित इस गांव को मरुस्थलीय पर्यटन का चरित्र बदल दिया है।

Sam Sand Dunes Tourism: राजस्थान के जैसलमेर ज़िले में स्थित सम गांव लंबे समय तक रोमांच और एडवेंचर टूरिज्म के लिए जाना जाता रहा है। लेकिन बीते कुछ वर्षों में यहाँ ‘फैमिली टूरिज्म’ के बढ़ते चलन ने मरुस्थलीय पर्यटन का चरित्र बदल दिया है। अब सम केवल ऊँट सफारी या रेत के टीलों तक सीमित नहीं बल्कि सुरक्षित, सांस्कृतिक और पारिवारिक अनुभवों का केंद्र बनता जा रहा है। जिसकी वजह से देश भर से सैलानी इस जगह पर अपने परिवार के साथ घूमने आ रहे हैं। आइए जानते हैं कि ‘फैमिली टूरिज्म’ से क्या बदला और इस जगह की कुछ ख़ास बातें। 

Sam Sand Dunes Tourism
Sam Village emerges as gateway to desert tourism

सम गांव जैसलमेर शहर से लगभग 40 किलोमीटर दूर थार मरुस्थल के बीच बसा हुआ है। यह इलाका अपने विशाल रेत के टीलों, खुले आसमान और पारंपरिक मरुस्थलीय जीवन के लिए प्रसिद्ध रहा है। पहले यहाँ आने वाले पर्यटक ज़्यादातर युवा या विदेशी सैलानी होते थे, जो ऊँट सफारी, जीप सफारी और रात के कैंप अनुभव के लिए आते थे। सम का पर्यटन लंबे समय तक रोमांच और सीमित सुविधाओं पर आधारित रहा जिससे परिवारों और बुज़ुर्ग पर्यटकों की संख्या अपेक्षाकृत कम थी लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है। 

पिछले एक दशक में पर्यटन की सोच बदली है। लोग अब सुरक्षित, आरामदायक और बच्चों के अनुकूल स्थानों की तलाश करते हैं। इसी बदलाव ने सम गांव में फैमिली टूरिज्म को बढ़ावा दिया। स्थानीय पर्यटन संचालकों ने पारंपरिक टेंट्स की जगह सुविधाजनक डेजर्ट कैंप, स्वच्छ शौचालय, बेहतर भोजन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर ध्यान देना शुरू किया। इससे परिवारों के लिए सम एक भरोसेमंद और सहज गंतव्य बन सका।

Cultural experiences become primary attraction for visitors
Cultural experiences become primary attraction for visitors

फैमिली टूरिज्म के साथ सम गांव में संस्कृति आधारित पर्यटन को नई पहचान मिली। अब शाम के समय लोकनृत्य, कालबेलिया नृत्य, मंगणियार संगीत और राजस्थानी वेशभूषा में प्रस्तुतियां आम हो गई हैं। परिवार, खासकर बच्चे, इन कार्यक्रमों के ज़रिए राजस्थान की लोक परंपराओं से परिचित होते हैं। यह बदलाव मरुस्थलीय पर्यटन को केवल रोमांच से आगे ले जाकर सीखने और अनुभव करने वाला बना रहा है।

फैमिली टूरिज्म के बढ़ने से सम गांव के स्थानीय लोगों को सीधा लाभ मिला है। कैंप संचालन, लोक कलाकार, गाइड, ड्राइवर और हस्तशिल्प विक्रेता, सभी को स्थायी रोज़गार मिलने लगा है। स्थानीय परिवार अब पर्यटन को केवल मौसमी कमाई नहीं बल्कि आजीविका के स्थायी साधन के रूप में देखने लगे हैं। इससे गांव का सामाजिक और आर्थिक ढांचा भी मज़बूत हुआ है।

Desert tourism character transforms with comfort culture
Desert tourism character transforms with comfort culture

आज सम गांव का मरुस्थलीय पर्यटन अधिक संतुलित और समावेशी हो गया है। रोमांच अभी भी मौजूद है, लेकिन उसके साथ आराम, सुरक्षा और संस्कृति का मेल दिखाई देता है। फैमिली टूरिज्म ने सम को ऐसा पर्यटन स्थल बना दिया है जहाँ बच्चे, बुज़ुर्ग और महिलाएँ सभी सहज महसूस करते हैं। यही बदलाव मरुस्थलीय पर्यटन के चरित्र को नया रूप दे रहा है, जहाँ रेत के टीलों के साथ रिश्तों और यादों की गर्माहट भी जुड़ गई है।

संजय शेफर्ड एक लेखक और घुमक्कड़ हैं, जिनका जन्म उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में हुआ। पढ़ाई-लिखाई दिल्ली और मुंबई में हुई। 2016 से परस्पर घूम और लिख रहे हैं। वर्तमान में स्वतंत्र रूप से लेखन एवं टोयटा, महेन्द्रा एडवेंचर और पर्यटन मंत्रालय...