गुण धर्म- लौंग चरपरी, अग्निदीपक, रुचि बढ़ाने वाली, वात और पित्त का शमन करती है, कफ को बाहर निकालती है। तृषा और वमन (उल्टी) को दूर करती है। नेत्रों के लिए लाभदायक, हृदय रोग एवं क्षय रोग में लाभदायक है। लौंग कृमि नाशक भी है। रोगों से लड़ने की शक्ति लौंग में है। लौंग का सबसे बड़ा गुण श्वेत रक्त कणों को बढ़ाना और जीवनी शक्ति में वृद्धि करना है। यही वह विशेष गुण है, जिसके कारण यह क्षय रोग एवं ज्वर में एंटीबायोटिक औषधियों की तरह प्रयोग किया जाता है। लौंग श्वसन तंत्र के रोगों को नष्ट कर श्वसन तंत्र को बल प्रदान करती है। दांतों के रोगों में भी बड़ी प्रभावकारी है। दांतों के कीड़े नष्ट कर मसूड़ों को निरोग एवं श्वास में ताजगी देती है। लौंग मूत्रल एवं रक्त शोधक होने से शरीर के दूसरी जाति के तत्त्वों को निकाल बाहर करती है। आंतों में स्थित आंत्र कृमि अपच एवं वायु दोष पैदा करते हैं। आंतों के कृमियों को नष्ट करने में और पाचन शक्ति बढ़ाने में लौंग की महत्त्वपूर्ण भूमिका है। लौंग लिवर के लिए लाभदायक है। लौंग पाचक रसों के स्राव को बढ़ाने का कार्य करती है। अत: नियमित रूप से आम दैनिक क्रम में 1-2 लौंग भोजन के बाद चबा लेना चाहिए।

विभिन्न रोगों में उपयोग

सिर दर्द में- लौंग को पत्थर पर पानी में पीसकर या घिसकर लेप तैयार कर उसको गर्म कर मस्तक और कनपटियों पर लेप करने से स्नायुजन्य सिर दर्द मिटता है।

दंत रोगों में- नियमित भोजन के बाद नित्य एक लौंग मुंह में रखकर धीरे-धीरे चबाकर इस्तेमाल करने से दंत रोगों से बचाव होता है। लौंग का साफ तेल रुई से 1-2 बूंद टपका लें और रुई का फाहा दुखते दांत या दाढ़ पर रखने से दर्द में राहत मिलती है।

हैजा रोगों में- 5-7 लौंग कूट-पीसकर एक गिलास पानी में डालकर उबाल लें, जब आधा पानी शेष रहे, तब उतारकर ठंडा कर लें और उस पानी को 2-3 बार थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पिला दें। इससे हैजा में तृषा मिटती है।

फोड़े-फुंसियों में- फोड़े और फुंसियों पर लौंग एवं चंदन का लेप लगाने से भरपूर लाभ होता है। घाव भी जल्दी भरता है।

खांसी में- 4-5 लौंग को आग की लौ में सेंककर पीस लें तथा शहद के साथ चटाएं। नियमित कुछ दिनों तक प्रयोग करें। यह कुक्कर में भी लाभकारी प्रयोग है।

गर्भवती की उल्टी में- गर्भावस्था की उल्टी में लौंग को उबालकर ठंडा किया पानी पिलाने से लाभ होता है। लौंग को पीसकर मिसरी की चाशनी के साथ चटाने से भी चाहा हुआ लाभ मिलता है।

कफ विकारों में– 6-7 नग पिसी हुई लौंग को 250 मिली पानी में डालकर उबालें और जब आधा पानी शेष रहे तब उतार लें। यह गर्म पानी (सहने योग्य) थोड़ी देर बाद थोड़ा गर्म रहे, तभी चाय की तरह पिला दें, इससे श्वास नलिकाओं में जमा कफ बाहर निकल जाता है।

ज्वर में- लौंग एवं चिरायता बराबर भाग में पीसकर पानी में मिलाकर शहद के साथ इस्तेमाल करने से ज्वर उतर जाता है।

नासूर में- जब घाव ठीक न हो रहा हो तो साफ हल्दी और लौंग को पीसकर लगाने से लाभ होता है।

गठिया एवं संधिवात आदि में- लौंग का तेल मेडिकल स्टोर्स में उपलब्ध हो जाता है। जोड़ों में दर्द में जोड़ों पर लौंग के तेल से प्रतिदिन मालिश करने से जोड़ों के दर्द में राहत मिलती है।

जुकाम में- लौंग का तेल बताशे पर बूंद टपकाकर बताशा इस्तेमाल करा दें तथा लौंग का तेल सुंघाने से जुकाम दूर होता है।

भूख बढ़ाने के लिए- जठराग्नि बढ़ाने के लिए लौंग और छोटी पीपली दोनों को पीसकर चूर्ण बना लें तथा 1 से 2 ग्राम मात्रा में लेकर शहद के साथ इस्तेमाल कराएं, इससे खुलकर भूख लगती है।

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