हेपेटाइटिस मूलरूप से लीवर की बीमारी होती है, जो वायरल इंफेक्शन होने के कारण होती है। इस अवस्था में लिवर में सूजन आती है। इसके साथ ही हेपेटाइटिस अल्कोहल, दवाइयों के साइड इफेक्ट और ऑटोइम्यून डिज़ीज के कारण भी होती है। वायरस के कारण होने वाला हेपेटाइटिस गंभीर हो सकता है, जो फिब्रोसिस या लिवर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का रूप ले सकता है। पूरी दुनिया में लगभग 325 मिलियन लोग हेपेटाइटिस बीमारी से प्रभावित हैं, जिनमें से हर साल लगभग 1.34 मिलियन लोगों की मौत हो जाती है। भारत में इसके पीड़ितों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। भारत में 40 मिलियन लोग हेपेटाइटिस वारयल से प्रभावित हैं, जिसमें हेपेटाइटिस बी और सी वायरस से लगभग 6 से 12 मिलियन लोग प्रभावित हैं। लोगों को हेपेटाइटिस वारयस के बारे में जागरूक करने के लिए हर साल 28 जुलाई को ‘वर्ल्ड हेपटाइटिस डे’ मनाया जाता है, इसका उद्देश्य लोगों को इस बीमारी के रोकथाम, परीक्षण और इलाज के प्रति जागरूक करना है। ज्यादातर मरीज़ों की मौत इस बीमारी के प्रति जागरूक ना होने के कारण हो जाती है, इसी को ध्यान में रखते हुए साल 2019 के लिए ‘वर्ल्ड हेपेटाइटिस डे’ का थीम ‘फाइन्ड द मिसिंग मिलियन’ रखा गया है।

जेपी हॉस्पिटल, नोएडा के एसोसिएट डायरेक्टर- गेस्ट्रोएन्टरोलॉजिस्ट डॉ. माणिक शर्मा, के अनुसार- हेपेटाइटिस सी भारत में लीवर कैंसर के सबसे प्रमुख कारणों में से एक है। हमारे देश में हेपेटाइटिस से जुड़े तथ्य निश्चित ही डराने वाले हैं। लगभग 4 प्रतिशत आबादी हेपेटाइटिस बी वायरस से संक्रमित हैं और 85.12 मिलियन लोग भारत में हेपेटाइटिस सी वायरस से संक्रमित हैं। हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी वायरस आमतौर पर क्रोनिक हेपेटाइटिस का कारण बनता है। लगभग 30 प्रतिशत लिवर सिरोसिस हेपेटाइटिस बी के कारण होता है और 10-12 प्रतिशत सिरोसिस भारत में हेपेटाइटिस सी वायरस संक्रमण के कारण होता है।

हेपेटाइटिस के प्रकार और कारण

हेपेटाइटिस के मुख्य पांच वायरस होते हैं, जिनमें ए, बी, सी, डी और ई शामिल है। यह पांच बेहद खतरनाक वायरस होते हैं, जिनमें से हेपेटाइटिस बी और सी वारयस के कारण लगभग 80 प्रतिशत लोग लिवर कैंसर का शिकार हो जाते हैं। हेपेटाइटिस ए और ई वायरस आमतौर पर दूषित पानी और खाने के सेवन से फैलता है। हेपेटाइटिस बी वायरस इंजेक्शन, संक्रमित खून दिए जाने और यौन सम्पर्क के कारण फैलता है। हेपेटाइटिस बी, सी और डी वायरस संक्रमित व्यक्ति के मूत्र, रक्त या अन्य द्रव्य पदार्थों के संपर्क में आने से फैलता है। इसके साथ ही यह संक्रमित रक्त, दूषित सुई एंव अन्य संक्रमित चिकित्सीय उत्पादों के प्रयोग से होता है। हेपेटाइटिस बी वायरस संक्रमित मां से उसके होने बच्चे को भी हो सकता है।

हेपेटाइटिस से बचाव के उपाय

  • अपने आस-पास साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।
  • समय पर टीकाकरण कराएं, समय पर टीकाकरण से काफी हद तक इस बीमारी से बचा सकता है।
  • अधिक तैलीय पदार्थों के सेवन से बचना चाहिए।
  • कार्बोहाइड्रेट वाली चीज़ों से परहेज़ करना चाहिए।
  • मीठे से भी दूरी बनानी चाहिए।
  • शराब व अन्य नशीले पदार्थों से खासतौर पर दूर रहना चाहिए।
  • डॉक्टर की सलाह के बिना किसी दवा का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • नवजात बच्चे के जन्म के बाद ही समय-समय पर हेपेटाइटिस बी का टीका लगाना चाहिए।

हेपेटाइटिस के लक्षण

  • बुखार लगना
  • भूख ना लगना
  • बदन दर्द होना
  • जी मिचलाना
  • आंखों के नीचे पीलापन होना
  • उल्टी आना
  • पैरों में सूजन होना
  • पेट में दर्द होना
  • कमजोरी महसूस होना

हेपेटाइटिस का इलाज 

धर्मशिला, नारायणा सुपर स्पेशेलिटी हॉस्पिटल के कंसलटेंट- गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉक्टर महेश गुप्ता का कहना है कि हेपेटाइटिस के लक्षण महसूस होने पर तुरंत डॉक्टर के पास जाकर जांच करानी चाहिए, जिससे उचित समय पर बीमारी की पहचान कर इसका इलाज किया जा सके। इलाज में लापरवाही बरतने से इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। हेपेटाइटिस बी से पीड़ित ज्यादातर मरीजों को इसके लक्षण कम दिखाई देते हैं, जिसके कारण इसके इलाज में देरी हो जाती है। हेपेटाइटिस बी की पहचान ब्लड टेस्ट के माध्यम से की जा सकती है। इसके साथ ही लिवर बायोप्सी, एलएफटी (लिवर फंक्शन टेस्ट), अल्ट्रासाउंड के माध्यम से हेपेटाइटिस के सभी प्रकारों की जांच की जाती है। टेस्ट रिपोर्ट पॉजिटीव आने पर डॉक्टर की सलाह पर तुरंत इलाज शुरू करना चाहिए। इसके अलावा हेपेटाइटिस से बचाव के लिए कई वैक्सीन भी उपलब्ध हैं।

श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ सलाहकार, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी और हेपेटोलोजी डॉ. मोनिका जैन के अनुसार, ‘भारत उन 11 देशों में से एक है, जो पूरे विश्व में हेपेटाइटिस के बोझ का लगभग 50 प्रतिशत भार उठाते हैं। भारत में वायरल हेपेटाइटिस एक प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई है, जिसमें हेपेटाइटिस बी की एक अहम भूमिका है। भारतीय जनसंख्या का 3.5 प्रतिशत हिस्सा हेपेटाइटिस बी संक्रमण से जूझ रहा है। भारत में हेपेटाइटिस फैलने का प्रमुख कारण मां से बच्चे में वायरस का संचारित होना है, संचरण के अन्य मार्ग असुरक्षित रक्त संक्रमण, प्रतिरक्षाविज्ञानी उत्पादों, असुरक्षित यौन संबंध, असुरक्षित सुइयों और सिरिंज हैं। लोगों को मेरी सलाह है कि उन्हें इस घातक बीमारी के बारे में जागरूक होना बेहद आवश्यक है और इसके लिए सुरक्षात्मक उपायों को अपनाना चाहिए। इसी माध्यम से हम मिलकर हेपेटाइटिस का खात्मा करने में सफल हो सकते हैं।’

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