Summary: सही वजन, स्वस्थ प्रेग्नेंसी की पहली शर्त
प्रेग्नेंसी के लिए वजन का संतुलित होना बेहद ज़रूरी है, क्योंकि बहुत कम या बहुत ज्यादा वजन हार्मोनल असंतुलन पैदा कर सकता है। स्वस्थ वजन फर्टिलिटी बढ़ाने और सुरक्षित गर्भधारण की मजबूत नींव बनाता है।
Healthy Weight, Happy Pregnancy: मां बनना सिर्फ एक इमोशन नहीं, बल्कि शरीर, मन और हार्मोनल संतुलन की गहरी तैयारी होती है। इस खूबसूरत सफर की शुरुआत से पहले ही महिलाओं के मन में यह सवाल उठने लगता है कि क्या प्रेग्नेंसी के लिए सही वजन होना वाकई ज़रूरी है। क्या अधिक वजन गर्भधारण में रुकावट बन सकता है, या फिर बहुत दुबला होना भी इस सफर को कठिन बना देता है। दरअसल सच्चाई यह है कि वजन का सीधा असर प्रेगनेंसी पर पड़ता है। बहुत कम या बहुत ज्यादा वजन शरीर के हार्मोनल संतुलन को प्रभावित करता है, जिससे ओव्यूलेशन और पीरियड्स की नेचुरल प्रक्रिया बिगड़ सकती है। इसलिए प्रेग्नेंसी में वजन को केवल
बढ़ने या घटने के नजरिए से नहीं, बल्कि संतुलन और स्वास्थ्य के नज़रिये से देखना बहुत जरूरी है।
वजन और फर्टिलिटी

महिला के शरीर का हार्मोनल सिस्टम बहुत नाज़ुक होता है। सही वजन होने पर हार्मोन संतुलित रहते हैं, ओव्यूलेशन नियमित होता है और गर्भधारण की संभावना बढ़ती है। बहुत कम या बहुत ज्यादा वजन इस संतुलन को बिगाड़ सकता है, जिससे पीरियड्स अनियमित हो सकते हैं और ओव्यूलेशन की प्रक्रिया गंभीर रूप से प्रभावित होती है।
संतुलित वज़न की वजह
प्रेग्नेंसी के समय शरीर पर पहले से ही अतिरिक्त दबाव होता है। अगर वजन पहले से संतुलित हो, तो शरीर इस बदलाव को बेहतर तरीके से संभाल पाता है। सही वजन होने से हार्मोन स्थिर रहते हैं, बच्चे को पोषण बेहतर मिलता है और मां की ऊर्जा बनी रहती है। यह न केवल प्रेगनेंसी को आसान बनाता है, बल्कि एक स्वस्थ प्रेग्नेंसी की नींव भी रखता है।
ज्यादा वजन है खतरा
अधिक वजन या मोटापा भी प्रेग्नेंसी के रास्ते में बाधा बन सकता है। ज्यादा फैट से इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ता है, जो पीसीओएस जैसी समस्याओं को जन्म दे सकता है। इससे ओव्यूलेशन अनियमित होता है और गर्भधारण में समय लग सकता है। प्रेग्नेंसी के दौरान भी हाई ब्लड प्रेशर, जेस्टेशनल डायबिटीज और सिजेरियन डिलीवरी का खतरा बढ़ता ही जाता है।
जरूरी संकेत
डॉक्टर्स अक्सर बॉडी मास इंडेक्स (BMI) के आधार पर सलाह देते हैं। प्रेगनेंसी के लिए स्वस्थ बीएमआई रेंज लगभग 18.5 से 24.9 के बीच सबसे अच्छा होता है। हालांकि, हर शरीर अलग होता है, इसलिए केवल नंबर पर नहीं, बल्कि आपकी पूरी सेहत पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी है।
कम वजन, बढ़ती समस्या

बहुत सी महिलाएं फिट दिखने या सामाजिक दबाव में जरूरत से ज्यादा वजन कम कर लेती हैं। कम बॉडी फैट के कारण शरीर को यह संकेत मिल सकता है कि वह प्रेग्नेंसी के लिए सुरक्षित स्थिति में नहीं है। नतीजा होता है ओव्यूलेशन रुक जाना या कमजोर होना। इसके अलावा, कम वजन वाली महिलाओं में प्रेगनेंसी रुक भी जाए तब भी एनीमिया, कमजोरी और प्रीमैच्योर डिलीवरी का खतरा बढ़ जाता है।
क्या करें
क्रैश डाइट या अचानक वजन बढ़ाने की कोशिश करने के बजाय, धीरे-धीरे और समझदारी से बदलाव करें। पोषक तत्वों से भरपूर हरी सब्जियां, फल, साबुत अनाज, प्रोटीन और अच्छे फैट को अपनी दिनचर्या में शामिल करें। नियमित हल्का व्यायाम, योग और पर्याप्त नींद भी हार्मोन संतुलन में मदद करती है। सबसे जरूरी है अपने शरीर की सुनें और डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
मानसिक स्वास्थ्य
वज़न को लेकर तनाव और अपराधबोध प्रेग्नेंसी के खूबसूरत सफर को कठिन बना देता है। याद रखें, परफेक्ट बॉडी नहीं, बल्कि स्वस्थ शरीर और शांत मन प्रेग्नेंसी के लिए सबसे जरूरी हैं। खुद को स्वीकार करना और धैर्य रखना इस यात्रा का अहम हिस्सा है।
