बच्चों जैसी हरकतें करने वाले बड़े लोग रहते हैं खूब फायदे में, जाने कैसे
जिस तरह बच्चे माता पिता को देख कर बहुत कुछ सीखते हैं ठीक उसी तरह माता पिता को भी चाहिए की बच्चों से बहुत से गुण सीख कर उन्हें अपनाएं।
Stay Positive in Life: बच्चों के सबसे पहले गुरु हैं माता पिता। बचपन से लेकर बड़े होने तक बच्चे माता पिता को देख कर बहुत सी चीजें सीखते हैं। बच्चों की आदतें , व्यवहार, बातचीत का तरीका रहन सहन आदि सभी कहीं न कहीं उन्होंने माता पिता से ही देखकर सीखा होता है। अधिकतर गुण बच्चों में माता पिता के ही होते हैं। इसलिए परवरिश का बच्चों के मन पर गहरा असर होता है। इन सभी बातों के साथ एक ऐसी बात है जिस से हम छह कर भी इंकार नहीं कर सकते हैं। जिस तरह बच्चे माता पिता को देख कर बहुत कुछ सीखते हैं ठीक उसी तरह माता पिता को भी चाहिए की बच्चों से बहुत से गुण सीख कर उन्हें अपनाएं। बच्चों से खुश रहने के तरीके, छोटी छोटी बातों में खुशियां ढूंढ लेना सीखें।
आइये जानते हैं बड़े हो कर भी आप बच्चों से क्या क्या सीख सकते हैं जिसका आपके जीवन पर सकारात्मक असर होगा।
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मस्ती करना ना भूलें

बच्चों की तरह मस्ती करना बड़ों के लिए एक मज़ेदार अनुभव होगा। हर वक़्त जीवन में कुछ न कुछ परेशानी लगी ही रहती है। इसका मतलब ये तो नहीं, जीवन को नकारात्मक चीजों का घर बना लिया जाए। बच्चों के साथ बैठे, उनसे बातें करें। उनके मन को समझने की कोशिश करें। जब आप उनसे बात करेंगे और उन्हें अच्छी तरह समझने की कोशिश करेंगे तो कहीं न कहीं बच्चों के साथ आपका मन भी अच्छा हो जाएगा। बच्चों के साथ मिल कर मस्ती करें। इस थोड़े से समय में ही आप अपने सारे दुख भुला देंगे।
लापरवाह होना भी जरुरी है

कभी कभी जब मन ना हो रूटीन वाली चीजें करने का तो बिलकुल अपने मन की सुनें। कुछ न कुछ ऐसा करें जिसे कर के आपको अंदर से सुकून का एहसास हो। घर फैला है तो कुछ समय फैले रहने दें। रूटीन से हट कर खाना बनाएं। कहीं दूर बच्चों के साथ पिकनिक मानाने निकल जाएं। इस बीच दुसरे आपको देख कर क्या कह रहे हैं, क्या सोच रहे हैं इस बात मकई परवाह बिलकुल ना करें। अपनी मस्ती में रहें। वापस रूटीन में आने पर आपको अपने अंदर एक नयी ऊर्जा पनपती हुई महसूस होगी।
खुद को खुश करें

बड़े होने पर सबके बारे में तो सबसे पहले सोचा जाता है। लेकिन हर व्यक्ति अपने बारे में सोचना भूल जाता है। उसे लगता है अगर वो अपने बारे में सोचेगा तो लोग उसे स्वार्थी कहेंगे। उसके अपने परिवार वाले उसके बारे में गलत सोचेंगे। सबसे पहले एक बात सोचिये अगर आपके परिवार वाले आपको सील इ चाहते हैं और खुश देखना चाहते हैं तो आपकी लापरवाही और अपने बारे में सोचे जाने पर भी वो आपको ही सपोर्ट करेंगे। उन्हें ख़ुशी होगी की इतने लम्बे समय के बाद आपने अपने बारे में कुछ सोचा। अपने बारे में सोचिये अपने मन का करिये, सकारात्मक रूप से कभी कभी स्वार्थी होना अच्छा है।
बचपन के खेल

अक्सर अपने बचपन की यादों में हमारा पुराण घर, दोस्त, पुराने ज़माने के खेल खिलोने और मस्ती सब याद आ जाता है। याद रखिये आज भी आपके पास मौका है उस खोये हुए बचपन को फिर से जी लेने का। अगर आप पुराने दोस्तों के साथ संपर्क में हैं तो उनको एक दिन प्लान बना कर बुलाइये और अपने बच्चों के साथ बचपन के पुराने खेल आप सभी मिल कर खेलिए। अपने बचपन की शैतानी, मस्ती के किस्से एक दूसरे से साझा कीजिये। देखिये फिर आपके साथ साथ आपके बच्चे भी आपके बचपन को जी पाएंगे और सभी के बीच में एक सकारात्मक रिश्ता बना रहेगा।
