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एंजाइना कैसे ठीक होता है?

अक्सर ये माना जाता है कि एंजाइना का दर्द महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों को ज्यादा होता है लेकिन ये बात गलत है। विभिन्न शोध व परिणाम बताते हैं कि ये दर्द अक्सर महिलाओं को ही ज्यादा होता है। घर-परिवार व ऑफिस की जिम्मेदारियों के बीच वे अक्सर इस तरह के दर्द की अनदेखी कर देती हैं और इसे थकान या एसिडिटी समझ कर दर्द को हल्के में ले लेती हैं। लेकिन उनका ये रवैया उनके लिए गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न कर सकता है। गंभीर समस्याओं से बचने के लिए सबसे जरूरी है कि आप समय रहते एंजाइना के दर्द को समझें व समय पर इसका इलाज करवाएं।

वास्तव में सीने का दर्द स्वयं में कोई रोग नहीं यह तो रोगों का लक्षण मात्र है। जिस व्यक्ति को सामान्य गोली से सीने के दर्द में आराम मिल जाता है वह एंजाइना का रोगी होता है। दूसरी ओर यदि दर्द प्लूरिसी या न्यूमोनिया के कारण हो तो रोगी को बुखार-खांसी होती है तथा खांसने या सांस की तकलीफ के साथ उठने वाला दर्द दिल का दौरा पड़ने का संकेत हो सकता है। एंजाइना और हार्ट-अटैक जैसे दिल के रोग भी सीने में दर्द पैदा करते हैं। एंजाइना के रोगी में दर्द सीने के बीच में या कुछ बायीं ओर होता है। लगभग तीन से दस मिनट तक लगातार होने वाले इस दर्द की तीव्रता मामूली भी हो सकती है और बहुत अधिक भी। अधिक ठंड, रोगी की मानसिक स्थिति, आवश्यकता से अधिक भोजन, दैनिक जीवन का तनाव, दिल की धड़कन बढ़ना तथा रक्तचाप आदि कुछ ऐसे कारक हैं जो दर्द को उभारने में सहायक होते हैं। जीभ के नीचे ग्लीसरिल नाइट्रेट की गोली रखने से इस रोग में तुरन्त लाभ होता है। सीने का दर्द यदि मायोकार्डिर्यल इंफार्कशन के कारण हो तो चक्कर तथा पसीना आना, सांस लेने में कठिनाई होना, जी कच्चा होना आदि अन्य लक्षण भी दृष्टिगत हो सकते हैं। ऐसे में रोगी का रक्तचाप सामान्य से बहुत कम हो जाता है साथ ही दिल की धड़कन भी अनियमित हो जाती है। वैसे एओर्टिक डाइसेक्शन, पल्मोनरी एम्बोलिज्म तथा एओर्टिक एन्यूरिज्म जैसे रोगों के कारण भी सीने में दर्द हो सकता है। इन रोगों का यदि समय पर निदान नहीं किया जाए तो ये जानलेवा भी हो सकते हैं।

क्या है एंजाइना?

आमतौर पर सीने में होने वाले दर्द को ‘एंजाइना’ कहा जाता है, जिसे मेडिकल लैंग्वेज में एंजाइना पेक्टोरिस कहा जाता है। एंजाइना की समस्या तब होती है, जब कोरोनरी डिजीज के चलते दिल तक पहुंचने वाले रक्त की मात्रा कम हो जाती है। इससे दिल को ऑक्सीजन की कमी महसूस होने लगती है, जो दर्द के रूप में सामने आती है। एंजाइना कोई बीमारी नहीं है बल्कि यह दिल से जुड़ी समस्याओं के आप पर हावी होने का संकेत देती है। कभी-कभी एंजाइना का दर्द सीने के अलावा बांह, कंधे, जबड़ों, गर्दन और कमर में भी होता है।

ये हृदय मांसपेशियों में रक्त की कमी को दिखाता है। कई बार एंजाइना में दर्द नहीं होता, लेकिन सांस लेने में परेशानी, नाड़ी गति का बढ़ना, सीने में जलन, घुटन, बेचैनी देखी जाती है। बहुत ही कम ऐसा देखा जाता है कि छाती/बाहों में दांयी तरफ दर्द होता है। जबड़े में भी दर्द देखा जा सकता है लेकिन ये सभी मेहनत करने पर बढ़ते हैं तथा विश्राम के साथ कम होते हैं। कुछ लोगों को पसीना या डकार भी आते हैं।

एंजाइना क्यों होता है?

रक्त या ऑक्सीजन की कमी से हृदय में होने वाले दर्द को एंजाइना कहते हैं। यह सामान्यत: तब होता है जब जमाव 70 प्रतिशत से ज्यादा हो होता है।

जैसा कि हृदय को रक्त 100 प्रतिशत मिलता है जबकि उसकी जरूरत 30 प्रतिशत ही होती है अगर 30 प्रतिशत तक रक्त संचार है, तो हृदय को कोई कठिनाई नहीं होती है। हृदय की रक्त आवश्यकता हमारी गतिविधि या जो भी काम हम कर रहे हैं उससे भी प्रभावित होती है। अगर आप बैठे हुए हैं तो हृदय को बहुत कम रक्त, लगभग 10 प्रतिशत की जरूरत होती है। जब चलते हैं तो ये जरूरत 20 प्रतिशत तक हो जाती है और जब हम दौड़ते हैं तो जरूरत 30 तक हो जाती है।

इसलिए, जिन्हें 80 प्रतिशत ब्लॉकेज है, वो चलते समय एंजाइना की शिकायत करते हैं। जिन्हें दौड़ते समय कठिनाई होती है उन्हें 70 प्रतिशत ब्लॉकेज है। अगर किसी को आराम करते समय या बैठे रहने पर भी एंजाइना है तो उसको ब्लॉकेज 90 प्रतिशत तक हो चुका है।

एंजाइना कैसे ठीक होता है?

लक्षण

सीने में दर्द होना। यह दर्द निम्न स्थानों पर हो सकता है।

● सीने के बीचों-बीच

● सीने के बायींं तरफ  या कभी-कभी दायीं तरफ

● गर्दन में

● बाएं जबड़े में

● पीठ के बीचों-बीच

कई बार दर्द उपरोक्त किसी भी स्थान से शुरू होकर उपरोक्त किसी भी स्थान की तरफ  फैलता है और यह फैलता हुआ दर्द निश्चित रूप से हृदय रोग का कारण ही होता है। 

● भारीपन महसूस होना

● जलन महसूस होना

● जकड़न

● नाड़ी गति का बढ़ना

● सांस फूलना

● घुटन सी महसूस होना

● यह दर्द कई बार पसीने, घबराहट, बैचेनी, धड़कन आदि के साथ होता है।

● कई लोगों को बहुत ठंडा पसीना आता है।

● कुछ को साथ में उल्टी जैसा या उल्टियां भी होती हैं।

● कुछ को साथ में चक्कर आता है।

● कोरोनेरी आर्टरी का जाम होना।

कोरोनेरी आर्टरी या उसकी शाखा के पूर्ण जाम होने से अलग-अलग तरह के लक्षण हो सकते हैं। ये तीन प्रकार के होते हैं-

1. अस्थायी दर्द होना या अनस्टेबल एंजाइना- यह दिल में दर्द उठने का नया लक्षण होता है, जो कि दिल के दौरे में भी बदल सकता है। इसके लिए इलाज निहायत जरूरी है।

2. दिल का दौरा बगैर ईसीजी में बदलाव के- यह हल्का हार्ट अटैक होता है, जिसमें कि ईसीजी की जांच में कोई फर्क नहीं दिखता है। लेकिन अन्य रक्त जांच से पता चलता है कि दिल को नुकसान हुआ है या नहीं। इस हालत में कोरोनेरी आर्टरी और उसकी शाखा में थोड़ी रुकावट होती है। इसमें भी इलाज की जरूरत पड़ती है।

3. दिल के दौरे के साथ ईसीजी में बदलाव- यह भारी हार्ट अटैक होता है, जिसमें कि ईसीजी की जांच में फर्क दिखता है और अन्य रक्त जांच से भी पता चलता है कि दिल को भारी नुकसान हुआ है। इस हालत में कोरोनेरी आर्टरी और उसकी शाखा में पूर्ण रुकावट होती है। इसमें भी तत्काल इलाज चाहिए।

जमाव के कारण

जब 20-30 सालों तक यह ब्लॉकेज बढ़ते हैं तो इनके कुछ कारण जरूर होते हैं। इन कारणों को खतरनाक कारक कहते हैं। यहां लगभग 15 कारक हैं, जिसे मुख्य प्रभावित कारक कहते हैं, और कुछ ऐसे हैं जिन्हें लघु कारक कहते हैं।

मुख्य खतरनाक कारक

1. रक्त में कॉलेस्ट्रॉल का बढ़ना (160-180 मि.ग्राम/डेसी.ली. ज्यादा होने पर हृदय रोग हो सकता है)। इसे 130 तक ही रखना चाहिए।

2. रक्त में ट्राइग्लीसराइड का बढ़ना (100-130 मि.ग्राम/डेसी.ली. से ज्यादा होने पर हृदय रोग हो सकता है)।

3. रक्त में एच डी एल का कम होना 40 मि.ग्राम/डेसी.ली. से ज्यादा होना चाहिए। इसे अच्छा कॉलेस्ट्रॉल कहते हैं और ये ब्लॉकेज में से कॉलेस्ट्रॉल हटाने का काम करता है।

4. उच्च कॉलेस्ट्रॉल- एच. डी. एल. अनुपात (ये अनुपात 4 से कम होना चाहिए। जितना कम हो तो हृदय के लिए अच्छा है।

5. रक्त में उच्च एल.डी.एल. स्तर (70-100 मि.ग्राम/डेसी.ली. से ज्यादा होने पर ब्लॉकेज हो सकता है। इसे खराब कॉलेस्ट्रॉल कहते हैं। ये रक्त में कॉलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ाता है।

6. रक्त में उच्च वी.एल.डी.एल. कॉलेस्ट्रॉल स्तर (20-25 मि.ग्राम/डेसी.ली. से ज्यादा होने पर ब्लॉकेज हो सकता है। ये ट्राइग्लीसराइड की मात्रा पर निर्भर करता है और रक्त में ट्राइग्लीसराइड की मात्रा का पांचवां भाग होता है।

7. उच्च रक्तचाप- 120-80 मि.ग्राम/डेसी.ली. से ज्यादा होने पर ब्लॉकेज को बढ़ावा देता है। वृद्धों में उच्च रक्तचाप हो सकता है, यह मान्यता अब गलत मानी जाती है।

8. रक्त शर्करा का बढ़ना या मधुमेह- जब रक्त शर्करा फास्टिंग में 100 मि.ग्राम/डेसी.ली. से ज्यादा और खाने के 2 घंटे बाद 140 मि.ग्राम/डेसी.ली. से ज्यादा हो तो ब्लॉकेज ज्यादा गति से बढ़ता है।

9. मोटापा या ज्यादा वजन (मोटापा पता करने का सबसे नया तरीका बी. एम. आई. बॉडी मास इंडेक्स है यह 25 से ज्यादा नहीं होना चाहिए। कमर का माप 34 इंच से ज्यादा नहीं होना चहिए)।

10. तनाव या मानसिक तनाव- बहुत ज्यादा मानसिक तनाव ब्लॉकेज को बढ़ाता है। आज के समय में तनाव हृदय रोग का मुख्य कारण है।

11. धूम्रपान और तंबाकू का सेवन- ये रक्त नलिकाओं की आन्तरिक परत को चिपचिपा बनाती है जिससे ब्लॉकेज अधिक गति से होता है। इसलिए इसे बिल्कुल बन्द कर देना चाहिए।

12. मद्यपान- शराब भी ब्लॉकेज को बढ़ाती है क्योंकि ये रक्त में ट्राइग्लीसराइड के स्तर को बढ़ाती है। हृदय के अलावा पूरे शरीर पर भी इसका खराब असर पड़ता है।

13. शारीरिक व्यायाम या शारीरिक सक्रियता की कमी- हमारे व्यस्त समाज की यह बहुत ही आम समस्या है। इसकी वजह से हम जो खाते हैं, उस वसा को हमारा शरीर तोड़ नहीं पाता और फालतू वसा हमारे शरीर में जमने लगती है। हमें अपने जीवन में व्यायाम को शामिल करना चाहिए।

14. भोजन में रेशों की कमी-  रेशे फलों तथा सब्जियों में होते हैं इन्हें ज्यादा मात्रा में खाना चाहिए। ये आंतों में वसा के अवशोषण को कम करते हैं।

15. एन्टीऑक्सीडेन्ट की कमी- ब्लॉकेज को रोकने के लिए एन्टीऑक्सीडेन्ट जैसे विटामिन ए, सी, ई और रसायन सिलेनियम, मैग्नीज, जिंग बहुत जरूरी है।

हृदय रोग के रिवर्सल के लिए हम इन 15 खतरनाक कारकों को नियंत्रित करते हैं और शरीर को कम से कम वसा प्रदान करते हैं। यह जरूरी नहीं है कि ब्लॉकेज के लिए पूरे 15 कारक उपस्थित हों। इनमें से केवल दो या तीन कारण भी ब्लॉकेज कर सकते है। अगर 4-5 से ज्यादा कारण उपस्थित हैं, तो निश्चित ही हृदय रोग होगा।

कुछ समय से कई नए खतरनाक कारक देखने को मिले हैं। इन्हें माइनर रिस्क फैक्टर कहते हैं। वे हैं रक्त में होमोस्टिन का ज्यादा होना, फाइब्रोनजेन और लाइपोप्रोटीन का ज्यादा होना आदि।

एंजाइना से हो सकता है हार्ट अटैक

हार्ट अटैक किसी को भी हो सकता है। इसके लिए जरूरी नहीं कि आपको कोई काम करने में दिक्कत होगी ही। लगातार काम करते-करते भी आप हार्ट अटैक का शिकार हो सकते हैं। आपको यदि कभी-कभी छाती में दर्द हो तो तुरंत हार्ट स्पेशलिस्ट को दिखाना ही सही कदम है। समय-समय पर सीने में होने वाला हल्का दर्द ही इस बात का संकेत देता है कि आपका दिल बीमार है। उसे दवा और देख-रेख की जरूरत है। आमतौर पर महिलाएं सीने में रह-रह कर उठने वाले हल्के दर्द पर ध्यान नहीं देतीं, जो आगे जाकर बड़ी समस्या का रूप ले लेता है। ऐसे में एंजाइना को हल्के में लेना खतरनाक साबित हो सकता है। 

मेनोपॉज के बाद महिलाओं में एंजाइना

आमतौर पर माना जाता है कि मेनोपॉज के बाद ही महिलाएं एंजाइना से पीड़ित होती हैं लेकिन अब तो यह समस्या युवा महिलाओं में भी आम हो गई है। महिलाओं में आमतौर पर स्टेबल एंजाइना की परेशानी ही ज्यादा देखने को मिलती है, जो थोड़ी देर आराम करने के बाद नियंत्रित हो जाती है। इसी कारण महिलाएं इसे ज्यादा तवज्जो नहीं देती। अगर एंजाइना को शुरुआती लक्षणों के दौरान ही भांप लिया जाए तो इसे दवाइयों से नियंत्रित किया जा सकता है और हार्ट से जुड़े बड़े खतरे को टाला जा सकता है।

ऐसे करें बचाव

● यदि आपको हाई ब्लड प्रैशर है, तो उस पर कंट्रोल करें, नियमित रूप से बीपी चेक कराएं।

● गीले कपड़े न पहनें।

● डॉक्टर द्वारा प्रिस्क्राइब्ड मेडिसिन रोजाना लें।

● डाइट में एहतियात बरतें।

● ठंडे, फ्राइड व डिब्बाबंद भोजन से दूर रहें। 

स्वस्थ हृदय के लिए जरूरी बातें

● हृदय की मांसपेशियों को स्वस्थ रखने के लिए नियमित रूप से व्यायाम बहुत जरूरी है। इससे हृदय की धड़कन प्रक्रिया बेहतर तरीके से होती है, साथ ही शरीर को रक्त से आसानी से ऑक्सीजन प्राप्त होती है, जिससे आपकी कार्यक्षमता बढ़ती है और ताकत मिलती है। वैज्ञानिकों द्वारा यह बात सिद्ध की जा चुकी है कि धूम्रपान करने वाले व्यक्तियों में दिल का दौरा या आकस्मिक हृदय रोग से मृत्यु होने की संभावना आम व्यक्तियों की तुलना में दोगुनी होती है। 

● यदि आपका वजन अधिक है तो आपके हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और उसे तेजी से धड़कना पड़ता है। अधिक वजन का कारण असंतुलित भोजन और व्यायाम की कमी है, जिससे कई अन्य रोग भी जन्म लेते हैं। इससे बचने के लिए हरी पत्तेदार सब्जियां, फल व संतुलित भोजन का सेवन करें। 

● अपने भोजन में अधिक वसायुक्त पदार्थ जैसे मांस, मक्खन, चीज न लें। इनसे शरीर में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा तो बढ़ती ही है साथ ही हृदय भी अस्वस्थ होता है। 

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