Summary:राजाओं की नहीं, सेहत की परंपरा
चांदी के गिलास में रखा पानी सुबह पीने से गुस्सा कम होता है, दिमाग शांत रहता है और शरीर डिटॉक्स होकर इम्यूनिटी मजबूत होती है। यह आदत पेट, लिवर-किडनी और मेटाबॉलिज़्म को भी बेहतर बनाती है, जिससे सेहत और मूड दोनों संतुलित रहते हैं।
Silver Water for Anger Control: गुस्सा करना किसी को भी नहीं अच्छा लगता, लेकिन ना चाहते हुए भी बहुत लोग अपने गुस्से पर कंट्रोल नहीं कर पाते। ऐसा नहीं है कि गुस्सा करने वाले स्वाभाव के अच्छे नहीं होते। नहीं यह लोग बहुत भावुक किस्म के होते हैं लेकिन स्वयं को किसी अमुक परिस्थति में नियंत्रित नहीं कर पाते। गुस्सा करने की सबसे खराब बात यह है कि इसका पहला नुकसान स्वयं को होता है। इससे इंसान तनाव में रहता है और कई बार हाईब्लड प्रेशर की समस्या भी देखने को मिलती है। लेकिन अगर आप भी चाहते हैं कि आप गुस्सा कम करें तो आप पानी चांदी के गिलास में पिएं। आयुर्वेद के अनुसार चांदी एक ठंडी धातु है। इसमें अगर आप पानी पीते हैं तो आपका बॉडी का टेम्प्रेचर कंट्रोल होता है और आप दिमागी तौर से रिलेक्स फील करते हैं।
सुबह उठकर पिएं

चांदी के गिलास में पानी पीने से ना केवल आप मेंटेली खुद को रिलेक्स फील करेंगे बल्कि इसमें पानी पीने से आपकी बॉडी का भी डिटॉक्सफिकेशन होता है। आप रात में चांदी के गिलास में पानी को रखें और सुबह सबसे पहले उठते ही इसे पिएं। एक दो हफ्ते जब आप इसे इस्तेमाल करेंगे तो आपको इसका असर नजर आने लगेगा। यह आपके पेट को भी ठीक रखता है।
दिमाग और सेहत दोनों रहती है दुरुस्त

चांदी के गिलास में पानी पीने से आपका मेटाबॉलिक रेट भी फास्ट होता है। जिससे कि आपका वजन भी कंट्रोल में रहता है। इसके अलावा यह लिवर और किडनी के लिए भी अच्छा है। चांदी में एंटी माइक्रोबियल और एंटी बैक्टेरियल खूबियां मौजूद हैं। यही वजह है कि इसमें पानी पीने से हमारी इम्यूनिटी मजबूत होती है और शरीर में इंफेक्शन के चांसेज भी कम होते हैं। वहीं पेट की गर्मी भी शांत होती है और एसिडिटी और गैस की समस्या से भी छुटकारा मिलता है। कई बार देखा गया है कि लोग पेट की समस्या से भी परेशान रहते हैं। इस वजह से वे कई बार चिड़चिड़े और परेशान से रहते हैं।
यह वैभवता नहीं सेहत है
अगर हम पुराने जमाने की बात करें तो हमें पता चलता है कि पुराने जमाने में राजे महाराजे चांदी के बर्तनों का अपने खानों में इस्तेमाल करते थे। यह वैभवता का प्रदर्शन नहीं था बल्कि यह मामला सेहत से जुड़ा था। यही वजह है कि आज भी दादियां नानियां छोटे बच्चों को चांदी के बर्तन में ही खाना खिलाना पसंद करती हैं। इसमें खाने से बच्चों की सेहत अच्छी रहती है। अन्नाप्राशन के समय यानी शिशु को जब पहली बार खाना खिलाया जाता है वह चांदी के बर्तनों में ही होता है।
आप याद रखिए गुस्सा करना कोई अच्छी चीज नहीं है। यह हमारे आपस के संबंधों को तो खराब करता ही है। हमारी सेहत के खजाने को भी कम करता है। बस अपने गुस्से को कंट्रोल करना सीखें। चांदी के गिलास में पानी पीने की आदत डालें। अगर आपके पास चांदी का गिलास नहीं है तो भी आप परेशान ना हों। आप तांबे के गिलास में चांदी का सिक्का डालकर पानी पी सकते हैं। बस यह ध्यान रखें कि वो सिक्का शुद्ध हो।
