कहा जाता है कि आपका चेहरा ही आपके स्वास्थ्य का आईना होता है। यहां हम सिर्फ चेहरे से नहीं बल्कि पूरे शरीर पर उभरने वाले लक्षणों की बात कर रहे हैं। हमारे विशेषज्ञ डॉक्टर हमें बता रहे हैं कि शरीर के किस हिस्से पर उभरने वाले कौन से लक्षण हमारे शरीर की किस कमी या किस बीमारी की ओर इशारा करते हैं। कम उम्र की कन्याओं को अपने चेहरे और प्रत्यक्ष दिखने वाली दाग-धब्बे, मुहांसे, रूखी-सूखी त्वचा व बाल जैसी समस्याओं की ज्यादा चिंता होती है जबकि वयस्क महिलाओं को व्यवहार संबंधित समस्याओं जैसे ऑस्टियोपोरोसिस, जननांग संबंधी समस्याएं, स्तन कैंसर, यौन संचारित रोग की चिंता और आशंका अधिक होती है।

 सिर

अपने सिर पर अंगुलियां फिराकर बालों की मात्रा को टटोलें। यदि आपको लगता है कि आपके बाल बहुत ज्यादा पतले होते जा रहे हैं तो यह थायरॉयड की गड़बड़ी, विटामिन बी12 का अभाव, आयरन की कमी की वजह से हो सकता है। थायरॉयड के दूसरे लक्षणों में सूखी त्वचा, सूजी आँखें, अनियमित मासिक और बालों का झड़ना भी शामिल है। बालों को हल्का होने से बचाने के लिए इन तीनों कारकों की जॉच करवाएं और डॉक्टर से मिलें। अगर बालों के बीच में रूसी नज़र आए तो यह तनाव के कारण हो सकती है। रोजमर्रा की भागदौड़ में होने वाला तनाव एक हॉरमोन कोर्टिसोल पैदा करता है जो बीमारियों से लड़ने की आपकी क्षमता को कम कर देता है। वजन का बढ़ना और सिर की त्वचा का रूखा होना इसके लक्षण होते हैं। आप कितना भी कोशिश करें, यह रूसी आसानी से नहीं जाती, जब तक कि आप इसके कारण का निवारण न करें। इसे ठीक करने के लिए आप छोटी-छोटी बातों पर तनाव लेना छोड़ दें।

चेहरा
अगर आपको अपने चेहरे या शरीर की त्वचा पर कहीं भी कोई पैच नज़र आता है, तो यह एक संकेत है कि आप अपने त्वचा विशेषज्ञ से मिलें। चेहरे पर होने वाले काले धब्बों की वजह मेलाज़्मा, हाइपर पिगमेंटेशन, मुहांसे, फ्रेकल्स या लेंटिजिल्स हो सकती है। यह सभी समस्याएं घूप के असर, हारमोनल बदलाव, आनुवंशिक प्रभाव या गलत प्रकार के सौंदर्य प्रसाधनों का नतीजा हो सकती हैं। अगर चेहरे या शरीर पर कहीं भी आपको सफेद धब्बे नजर आते हैं तो यह फंगल संक्रमण, एलर्जी, सूरज की किरणों का नतीजा, ल्यूकोडर्मा नामक बीमारी या आनुवंशिक स्थितियों के कारण हो सकते हैं। यह समस्याएं काफी गंभीर हो सकती हैं जिनके लिए त्वचा विशेषज्ञ से मिलकर आसानी से समाधान किया जा सकता है।

आंखें
किसी दिन सोकर उठें तो खुद को शीशे में निहारें और अपनी आंखों को परखें। यदि आपकी आंखों के नीचे डार्क सर्किल(काले निशान) हैं तो ऐसा अच्छी नींद का अभाव, एनीमिया या एलर्जी के कारण हो सकता है। यदि एक आंख से पीला द्रव ज्यादा निकलते हुए वह लाल रहती है तो यह कनजंक्टिवाइटिस (नेत्र शोथ) के लक्षण हो सकते हैं। अपनी आंखों की पुतली पर निगाह डालें। यदि पुतली के सफेद हिस्से में आपको पीला उभार नजर आए तो यह पिंगुकुला का लक्षण हो सकता है जो धूप, हवा या धूल से आंखों को होने वाले नुकसान के कारण होता है।

नाक
अगर आपकी नाक अक्सर बंद रहती है, सिर दर्द और गले में बलगम की शिकायत रहती है और सुबह उठते वक्त भी सिर में दर्द रहता है तो आपको क्रॉनिक साइनुसाइटिस हो सकता है। अगर आप रात में खर्राटे लेते हैं या दम घुटने के अहसास से बार-बार आपकी नींद टूटती है तो यह ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एप्निया के लक्षण हो सकते हैं। इसी तरह अगर आपके बच्चे की नाक बंद रहती है, बहती है, बार-बार सर्दी जुकाम होता है और भूख मर जाती है तो यह क्रॉनिक एडिनोटॉन्सिलाइटिस के लक्षण हो सकते हैं और इसके कारण ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एप्निया हो सकता है और इससे बच्चों की बढ़वार रुक सकती है। इसलिए ऐसे लक्षण होने पर बच्चे को तुरंत विशेषज्ञ के पास ले जाना चाहिए।

कान
अगर आप टीवी अथवा म्यूजिक सिस्टम की आवाज साधारण से अधिक रखते हैं तो इसका अर्थ है कि आपकी सुनने की शक्ति कमजोर हो गई है। अगर आपके कान में दर्द रहता है या कान से पानी बहता है तो ये सब कान में पुराने संक्रमण के लक्षण हैं।

जीभ
शीशा देखने के दौरान अपनी जीभ पर भी गौर करें। जीभ पर सफेद, नारंगी या पीली परत एसिड रिफ्लक्स के लक्षण हो सकते हैं। ऐसा मसालेदार और तैलीय भोजन खाने से होता है। ऐसिड रिफ्लक्स के रोगियों को इसके साथ उल्टी आना, जी मिचलाना, जलन और क्रोनिक कफ की समस्या भी होती है। इससे बचने के लिए एन्टेसिड की एक गोली खानी चाहिए लेकिन अगर ऐसा एक सप्ताह से भी ज्यादा समय से हो रहा है तो डॉक्टर से मिलना चाहिए।

गला
अगर आपका गला अक्सर खराब रहता है या गले में खुश्की रहती है। इसके साथ ही कुछ भी गटकने में कठिनाई और दर्द होता है तो आपको क्रॉनिक टॉन्सिलाइटिस हो सकता है। आपका गला सूखा-सूखा और सीने में जलन होती है तो ये जीईआरडी के सामान्य लक्षण हैं।

दिल
अगर आपके सीने के बीचोंबीच दर्द, दबाव या भारीपन महसूस हो जो घूमता हुए कंधे, बांह और जबड़े तक जाता हो तो यह दिल के दौरे का लक्षँण हो सकता है। इसके अलावा जब आपकी अकारण सांस फूले, खासकर लेटे समय ज्यादा तकलीफ हो और बैठकर राहत महसूस हो तो सावधान हो जाएं, यह आपके दिल से संबंधित हो सकता है। इसी तरह अगर आपको कभी ठंडे पसीने आने के साथ घबराहट हो और आसमान टूट पड़ने की आशंका लगे तो तुरंत अपने डॉक्टर से मिलें। हृदय संबंधित तकलीफों के अधिकतर लक्षण थकान से बढ़ जाते हैं और आराम करने पर राहत मिलती है। दिल का दौरा पड़ने की स्थिति में आपको कैसे भी आराम नहीं मिलेगा। अगर दिल का दौरा पड़ने की आशंका हो तो रोगी के मुंह में तुरंत डिस्प्रिन की गोली डाल दें और फौरन अस्पताल ले जाएं।

स्तन
40 साल से अधिक उम्र की महिलाओं को अपने घर पर अपने स्तनों की स्वयं जांच करनी चाहिए। इसके लिए अपने स्तन को हर ओर से अपने हाथों से दबा कर देखें। अगर आपको स्तनों में किसी भी प्रकार का तरल पदार्थ / डिसचार्ज या गांठ महसूस होती है तो किसी फिजीशियन या कैंसर विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए। उच्च जोखिम वाली महिलाओं को 40 साल की उम्र के बाद और सामान्य महिलाओं को 50 वर्ष की उम्र के बाद साल में एक बार मैमोग्राफी स्क्रीनिंग कराना बहुत जरूरी है। इससे उचित समय पर स्तन कैंसर की जानकारी मिल जाती है ताकि समय रहते इलाज शुरू किया जा सके।

बगल
अपने दोनों हाथ उठाकर अपनी बगल पर एक नजर डालें। यदि आपको गहरे धब्बे या काली त्वचा के खुरदरे धब्बे नजर आएं तो यह इंसुलिन प्रतिरोधन यानी डायबिटीज के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं।

नाखून
यदि आपको नाखूनों पर सफेद धब्बे नजर आएं जो नाखून की सतह के स्वाभाविक रंग से अलग लगे और आपको बाद में थकान भी महसूस होने लगे तो आपकी किडनी की सेहत के लिए यह बुरी खबर हो सकती है।

गांठ
आंखों की पलकों, घुटनों और कुहनियों में यदि आप छोटी और मुलायम गांठ महसूस करते हैं और यह सफेद या नर्म लगे तो इसका मतलब है कि ये सब कोलेस्ट्राल की जमी हुई अल्प मात्राएं हैं और आपको तत्काल अपने फिजिशियन से संपर्क करना चाहिए।

(पारस हॉस्पिटल, गुड़गांव के इंटरनल मेडिसिन कंसल्टेंट डॉ राजेश कुमार, फोर्टिस मेमोरियल एंड रीसर्च इंस्टिच्यूट, गुड़गांव के ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. अतुल मित्तल, मायरा स्किन एंड हेयर क्लीनिक की डॉ. सोनिया मंगल, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हार्ट इंस्टीच्यूट के कार्डियो चिकित्सक डॉक्टर विशाल रस्तोगी, नई दिल्ली और कोहिनूर हॉस्पिटल, मुंबई के कैंसर विशेषज्ञ डॉ. राकेश बाधे से बातचीत पर आधारित)