एंजेलिना जॉली ने जब से डबल मैस्टेक्टाॅमी कराई है, ब्रेस्ट रिकंस्ट्रक्शन और इसके टेस्ट के बारे में लोग ज्यादा से ज्यादा जानने की इच्छा रखने लगे हैं। ब्रेस्ट कैंसर एक ऐसा रोग है, जो महिलाओं में आम हो चुका है। इसमें ब्रेस्ट के सेल्स अनियंत्रित रूप से बढ़ने शुरू हो जाते हैं, जो कैंसर का रूप ले लेते हैं। फरीदाबाद स्थित एशियन अस्पताल के कैंसर सर्जरी के डायरेक्टर डॉ. अमीश चौधरी से बातचीत पर आधारित इस आर्टिकल में आपको ब्रेस्ट कैंसर से जुड़े सभी सवालों के जवाब मिलेंगे।

ब्रेस्ट कैंसर की शुरुआत ब्रेस्ट के किसी भी भाग ग्लैण्ड, ट्यूब और इससे जुड़े हुए टिशू से शुरू हो सकती है। लोब्यूल्स ऐसे ग्लैण्ड्स होती हैं, जो ब्रेस्ट में दूध को बनाने के लिए जिम्मेदार होती हैं। ट्यूब दूध को निप्पल तक ले जाती हैं। अटैच्ड टिशू चारों ओर होते हैं और सब हिस्सों को घेरे रहते हैं। अधिकांश ब्रेस्ट कैंसर डक्ट या मिल्क ग्लैण्ड से शुरू होते हैं। ब्रेस्ट कैंसर ब्लड वेसल्स और लिम्फ वेसल्स के माध्यम से ब्रेस्ट के बाहर तक फैल सकता है। जब ब्रेस्ट कैंसर शरीर के अन्य हिस्सों में फैलता है, तो इसे प्रसारित कैंसर (मेटास्टासाइज़्ड) कहा जाता है।

ब्रेस्ट कैंसर के दो मुख्य प्रकार इनवेसिव डक्टल कार्सिनोमा और इनवेसिव लोबुलर कार्सिनोमा है। ब्रेस्ट कैंसर के कारण जेनेटिक, हार्मोनल, लाइफस्टाइल और पर्यावरणीय कारक हो सकते हैं।

ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण 

● ब्रेस्ट में गांठ या उभार, जो आसपास के टिशू (ऊत्तकों) से अलग महसूस होता है

● ब्रेस्ट के आकार, शेप अथवा स्किन में परिवर्तन

● निप्पल का विपरीत दिशा में जाना

● निप्पल या ब्रेस्ट के आसपास की स्किन का छिलना, फटना या रंग फीका पड़ना

● ब्रेस्ट  के ऊपर की स्किन का रेड हो जाना या गड्ढे पड़ना 

ब्रेस्ट कैंसर का निदान 

विशिष्ट मामलों के आधार पर, ब्रेस्ट कैंसर के निदान के लिए, निम्नलिखित टेस्ट कराने की सलाह दी जाती हैः 

● ब्रेस्ट की जांच

● मैमोग्राफी

● ब्रेस्ट का अल्ट्रासाऊंड

● बायोप्सी

● ब्रेस्ट (एमआरआई)

● खून की जांच 

● बोन स्कैन

● सीटी स्कैन

● पैट (पीईटी) स्कैन

ब्रेस्ट कैंसर का उपचार

सटीक उपचार, ब्रेस्ट के कैंसर के प्रकार, इसके चरण, आकार तथा इस बात पर भी निर्भर करता है कि क्या कैंसर सेल्स हार्मोन्स के प्रति सेंसिटिव हैं। 

ब्रेस्ट कैंसर के उपचार के लिए की जाने वाली सर्जरी में शामिल हैं – 

● ब्रेस्ट कैंसर को निकालना (लम्पेक्टाॅमी)

● पूरे ब्रेस्ट को निकालना (मैस्टेक्टाॅमी)

● लिम्फ नोड्स (लसीका ग्रंथियों) को सीमित संख्या में निकालना (सेंटिनल नोड बायोप्सी)

● अनेक लिम्फ नोड्स (लसीका ग्रंथियों) को निकालना 

● दोनों ब्रेस्ट को निकालना (प्रीवेंटिव)

कई महिलाएं ब्रेस्ट कैंसर का ऑपरेशन कराती हैं और कई तो सर्जरी के बाद भी इलाज कराती हैं। जैसे – कीमोथेरेपी, हार्मोन थेरेपी, टार्गेटेड थेरेपी, इम्यूनोथेरेपी या रेडिएशन थेरेपी आदि। 

यदि आपको अपने ब्रेस्ट में कोई उभार या गांठ अथवा कोई और बदलाव महसूस हो रहा है, तो आपको तुरंत अपने डॉक्टर से सम्पर्क करना चाहिए।

ब्रेस्ट कैंसर से जुड़े कुछ जोखिम कारकों में कैंसर का पारिवारिक इतिहास, रेडिएशन से रिएक्शन, मोटापा, किशोरावस्था की जल्दी शुरूआत, देर से मेनोपॉज, शराब का सेवन, मेनोपॉज के बाद की हार्मोन थेरेपी शामिल हैं। 

इसके रोकथाम उपायों में नियमित जांच व चेकअप, एक्सरसाइज, हेल्दी वेट और डाइट शामिल है। 

ब्रेस्ट कैंसर की जांच 

अगर किसी महिला के परिवार में मां या मां के परिवार में से किसी का बीआरसीए जीन टेस्ट पॉज़िटिव आता है, तो वह बच्चे को जन्म देने की उम्र खत्म होने के बाद प्रोफिलैक्टिक मैस्टेक्टॉमी करा सकती है।  

प्रोफिलैक्टिक मैस्टेक्टॉमी ब्रेस्ट कैंसर के डेवलपमेंट के जोखिम को कम करने के लिए एक या दोनों ब्रेस्ट को हटाने के लिए की जाने वाली सर्जरी है। नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट के अनुसार, बीआरसीए 1 या बीआरसीए 2 जीन म्यूटेशन वाली महिलाओं में प्रोफिलैक्टिक मैस्टेक्टॉमी ब्रेस्ट कैंसर के विकास के जोखिम को 95% तक कम करने में सक्षम हो सकती है।

ब्रेस्ट रिकंस्ट्रक्शन 

ब्रेस्ट रिकंस्ट्रक्शन (स्तन पुनर्निमाण) सर्जरी आम तौर पर वैसी महिलाएं करा सकती हैं, जिन्होंने ब्रेस्ट कैंसर के इलाज के लिए सर्जरी कराई हो। वे अपने ब्रेस्ट के रूप और शेप के रिकंस्ट्रक्शन के लिए ब्रेस्ट रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी का ऑप्शन चुन सकती हैं। इसके लिए सर्जन रोगी के चिकित्सा इतिहास और हेल्थ के बारे में जानकारी लेता है और फिर वह रोगी को बताता है कि उसके लिए ब्रेस्ट रिकंस्ट्रक्शन का कौन सा ऑप्शन सही रहेगा। 

ब्रेस्ट रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी कई प्रकार की होती है, जिसमें कई बार एक से अधिक सर्जरी करनी पड़ सकती है, जैसे – 

1. इम्प्लांट का इस्तेमाल कर ब्रेस्ट रिकंस्ट्रक्शन

2. खुद के शरीर के टिशू (फ्लैप प्रक्रिया) का इस्तेमाल करके ब्रेस्ट रिकंस्ट्रक्शन

3. ब्रेस्ट की सर्जरी के बाद निप्पल और एरोला का पुनर्निर्माण

ब्रेस्ट रिकंस्ट्रक्शन की प्रक्रिया

ब्रेस्ट रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी से पहले रोगी को पता होना चाहिए कि सर्जरी के बाद उसकी बॉडी कैसी दिखेगी और वह कैसा महसूस करेगी। रोगी को सर्जरी से पहले कुछ समय तक कुछ दवाइयों से परहेज करना होता है और खास तरह की डाइट नहीं लेनी होती है आदि।

इस प्रक्रिया में अमूमन एक से अधिक ऑपरेशन करना पड़ता है। सबसे पहले ब्रेस्ट माउंड बनाया जाता है। उसके बाद एक्सपैंडर को भरने या निप्पल और उसके आसपास के हिस्से (एरिओला) को बनाने जैसी बाद की प्रक्रिया की जाती है। 

सर्जरी के बाद, रिकवरी इस बात पर निर्भर करती है कि रोगी ने किस तरह की ब्रेस्ट रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी करायी है। रोगी को सर्जरी की जगहों की देखभाल करने पर विशेष ध्यान देना पड़ता है। इसके अलावा ब्रेस्ट की देखभाल के साथ-साथ नियमित रूप से मैमोग्राम कराने पर भी अवश्य ध्यान देना चाहिए।

मरीजों को प्रत्यारोपण सर्जरी के बाद एक या दो सप्ताह तक या फ्लैप प्रक्रिया के बाद लंबे समय तक थकावट और गले में खराश महसूस होने की आशंका रहती है। हालांकि डाॅक्टर दर्द और अन्य असुविधा को नियंत्रित करने में मदद करने के लिए दवाएं देते हैं।

सर्जरी के प्रकार के आधार पर, रोगी आम तौर पर सर्जरी के कुछ दिनों के भीतर अस्पताल से घर जाने लायक हो जाता है और घाव और ड्रेन की देखभाल के लिए डाॅक्टर के निर्देशों का पालन करना आवश्यक होता है। बुनियादी तौर पर, रोगी को ब्रेस्ट रिकंस्ट्रक्शन के बाद 4-6 सप्ताह तक सिर पर वजन उठाने, हाई एक्टिविटी गेम्स और सेक्स संबंधी एक्टिविटीज से बचना होता है।

ब्रेस्ट रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी के दौरान और बाद के जोखिम 

ब्रेस्ट रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी में किसी भी अन्य बड़ी सर्जरी की तरह ही कुछ जोखिम भी होते हैं। इनमें शामिल हो सकते हैं- एनेस्थेसिया, ब्लीडिंग, ब्लड क्लॉट्स, ब्रेस्ट में लिक्विड का बनना, सूजन और दर्द, सर्जरी वाली जगह पर इन्फेक्शन, घाव भरने में समस्याएं आदि।

बाद में होने वाली समस्याओं में शामिल हो सकती हैं: टिशू की मृत्यु (नेक्रोसिस), निप्पल और ब्रेस्ट में सेन्सिटिविटी खत्म होना या सेन्सिटिविटी में बदलाव, मसल्स की ताकत में कमी, ब्रेस्ट प्रत्यारोपण में समस्या, कैप्सुलर कांट्रैक्टर आदि।

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