Artificial Food Colour: आजकल भोजन के स्वाद से पहले उसके रंग को देखकर पसंद किया जाता है। और बाहर जाकर खाना इस समय का ट्रैंड बन गया है। ऐसे में लोग इन बातों पर भी ध्यान नहीं देते कि वो क्या और कितना खा रहे हैं। बाहर मिलने वाले इन अधिकतर खाद्य पदार्थों में उसके रंग को बरकरार रखने के लिए आर्टिफिशियल फूड कलर का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं ये आर्टिफिशियल फूड कलर आपके स्वास्थ्य के लिए धीमा जहर साबित हो सकता है। दरअसल, हाल ही में कर्नाटक सरकार ने आर्टिफिशियल फूड कलर वाले भोजन पर बैन लगाया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कर्नाटक के स्टेट फूड एण्ड सैफ्टी क़्वालिटी विभाग ने हाल ही में 39 अलग-अलग चिकन, मछली और अन्य कबाबों की जांच की, जिसमें से 7 सैंपल में उन्हें आर्टिफिशियल फूड कलर ( सनसेट येलो और कारमोइसिन) पाया गया। सनसेट येलो और कारमोइसिन सेहत के लिहाज से खतरनाक है। इसके सेवन से कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी होने का खतरा हो सकता है। इस आर्टिकल में हम आपको आर्टिफिशियल फूड कलर के सेवन से होने वाले दुष्प्रभाव के बारे में बताएंगे।
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अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर

आर्टिफिशियल फूड कलर युक्त भोजन का लम्बे समय तक लगातार सेवन करने से किसी भी चीज़ पर फोकस करने की क्षमता प्रभावित होती है, जिसे अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर कहा जाता है। इस बीमारी को कार्सिनोजेन के नाम से भी जाना जाता है।
त्वचा और बालों को नुकसान

आर्टिफिशियल फूड कलर से बने भोजन को खाने से त्वचा और बालों को भी नुकसान पहुंचता है। स्टडी के मुताबिक, खाने में इस्तेमाल होने वाला पीला रंग जिसे टार्ट्राज़िन कहा जाता है, के इस्तेमाल से अस्थमा और पित्ती जैसी स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।
कैंसर का खतरा
आर्टिफिशियल फूड कलर का इस्तेमाल कर बनाए जाने वाले भोजन में बेंजीन पाया जाता है, जिसे कार्सिनोजेन नाम से जाना जाता है। इसके अलावा अन्य फूड कलर्स में बहुत से केमिकल होते हैं जो कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी का खतरा पैदा करे हैं।
नेचुरल फूड कलर पर दें ध्यान
अगर आपको अपने खाने में रंग का इस्तेमाल करना है तो आप लाल रंग के तौर पर चुकंदर के जूस या उसके पाउडर का चुनाव कर सकते हैं। पीले रंग के लिए आप केसर या कच्ची हल्दी का उपयोग करें। हरे रंग के लिए आप पालक के जूस या पालक के पत्तों के पेस्ट को अपने खाने में डालें।
