गरमागरम चाय में ग्लूकोज़ बिस्किट्स का डिप और फिर मजेदार जायका शायद ही किसी ने ना लिया हो। पैकेट पर पैकेट खत्म हो जाएं लेकिन चाय बिस्किट के उस स्वाद के आगे नमकीन भी टिकती नहीं। समय के साथ-साथ बिस्किट्स की वैराइटी भी क्या खूब बदली। बिस्किट्स तो हैं ही लेकिन अब कुकीज़ का स्वाद भी लोगों को रास आने लगा है। बिस्किट बच्चों के फेवरेट हमेशा से ही रहे हैं और कुकीज़ ने बड़ों का दिल भी जीत लिया है। 

किसी फंक्शन में जाते हैं तो चाय और कुकीज जरूर खाते हैं और बच्चे तो बस मुठ्ठी में कुकीज लेकर इधर-उधर घूमते नज़र आते हैं। कमाल है ये बिस्किट्स की दुनिया। बिस्किट और कुकीज़ में मानो कॉम्पटीशन हो गया हो। बिस्किट, ऐसा स्नैक्स जो हमेशा आपके-हमारे बैग में नजर आ जाएगा। वहीं ट्रैवल कर रहे ज्यादातर लोगों के बैग में डिब्बों में रखे कुकीज़ दिखते हैं। तो क्या बिस्किट्स से ज्यादा अच्छे होते हैं कुकीज़? दोनों की अपनी अपनी अहमियत है। अगर बिस्किट्स बरसों से आपके चाय का साथी रहा है तो कुकीज़ भी बदलते दौर में आज पार्टियों या गेट टू गेदर की शान है। 

कुकीज़ के बारे में बताते हैं कि संयुक्त राज्य अमेरिका और कनाडा में एक छोटे, चपटे आकार के बेक किए गए पदार्थ को कुकीज़ कहते हैं जो ज्यादातर वसा, एग, आटा और चीनी का मिश्रण होता है। तो वहीं माना जाता है कि उत्तरी अमेरिका के बाहर अंग्रेजी भाषा बोलने वाले ज्यादातर देशों में ये बिस्किट नाम से जाना और पहचाना जाता है और कहीं-कहीं तो ये दोनों नाम से जाना जाता है। जितनी जगहें उतने नाम और उससे कहीं अधिक वैराइटी। है न कन्फ्यूजन।

 फिलहाल भारत में भी कुकीज़ और बिस्किट का अंतर लोग धीरे-धीरे जान-समझ रहे हैं। आटा कुकीज़, जीरे वाले कुकीज़, नारियल कुकीज़ के साथ-साथ ना जाने कितने ऐसे नाम हैं जिन्हें हम खाते हैं खिलाते हैं। आटे के कुकीज़ का ज़ायका भी जुबान पर सिर चढ़कर बोल रहा है। बड़े-बड़े बेकर्स भी पेस्ट्री के अलावा कुकीज़ के कारोबार पर फोकस कर रहे हैं। भई करेंगे ही अब ज़ायके की बात जो ठहरी। हालांकि बिस्किट्स की वैराइटी भी कम नहीं है। बच्चों को क्रीम बिस्किट्स के बीच की क्रीम चाटते तो आपने भी देखा होगा। पहले आपने इसी तरह जायका लिया भी हो। यकीन मानिए उसका भी अपना मजा होता है।

आज भी क्रीम बिस्किट्स की भरमार है। साथ ही नट्स के भी कई बिस्किट्स बाज़ार में उपलब्ध हैं। नमकीन बिस्किट्स में भी काफी वैराइटी लोगों की पसंद बनी है। जहां पहले ग्लूकोज़ बिस्किट्स और क्रीम वाले बिस्किट्स में एक या दो फ्लेवर हुआ करते थे, वहीं अब तो आप मार्केट में जाकर कन्फ्यूज़ ही हो जाते होंगे।
भई बिस्किट और कुकीज़ की दीवानगी बढ़ी है तो ऐसे में सेहत के लिहाज से बने बिस्किट और कुकीज की वैराइटी भी बाजार में बढ़ी है। 

क्रीम बिस्किट्स के बाद अब कैलोरी कॉन्शस लोगों के लिए बाजार में आए हैं डाइजेस्टिव बिस्किट्स। हल्के मीठे यह बिस्किट हैल्थ को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं। हालांकि इसमें भी कॉम्पटीशन कम नहीं है। मल्टीग्रेन से लेकर ओटमील तक के बिस्किट्स सबकी पसंद बन चुके हैं। तो क्या बिस्किट की इस वैराइटी में ग्लूकोज़ बिस्किट का क्रेज घटा है। मैं तो कहूंगी कि क्रेज कम जरूर हुआ है लेकिन अहमियत अभी बरकरार है। अब ग्लूकोज बिस्किट ज्यादातर रेसिपीज़ बनाने के काम आने लगे हैं। मैंने बहुत कम घरों में देखा कि लोग ग्लूकोज़ बिस्किट्स रखते हैं। चाय के साथ ज्यादातर डाइजेस्टिव बिस्किटस, मैरी बिस्किट या फिर कुकीज़ का क्रेज देखा जा सकता है।

वाकई बाकी खानपान की तरह बिस्किट की भी दुनिया बदलती जा रही है और हम नए-नए स्वाद से रूबरू होते जा रहे हैं। वैसे ग्लूकोज़ बिस्किट की एक टेस्टी याद शेयर करना चाहूंगी। हाल ही में मैंने चांदनी चौक के एक रॉयल रेस्ट्रो हवेली में चाय बिस्किट का स्वाद चखा। ना चाय गरम थी और ना ही ग्लूकोज़ बिस्किट का डिप। बल्कि चाय ठंडी थी और ग्लूकोज़ बिस्किट का चूरा ऊपर से डाला गया था। ये ऐसा स्वाद था जो आम चाय बिस्किट से बिल्कुल अलग था। बगैर डिप किए गए बिस्किट का ये जायका ट्विस्ट से भरा था। चाय-बिस्किट की जोड़ी मेहमानों की खातिरदारी लंबे समय से कर रही है।

अब चाय-कुकीज़ भी अपनी खूबी से मेहमानों का दिल जीत रही है। मैं तो कहूंगी दोनों की ये जोड़ी इसी तरह वैराइटीज के साथ आगे भी अपना सफर जारी रखे। फिर चाहे डिप के साथ हो या फिर बगैर डिप किए।