नवरात्रि व्रत के दौरान बाजार में व्रत से जुड़ी खाने-पीने की सामग्री जैसे कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा, समा चावल, साबूदाना, मूंगफली आदि की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में दुकानदार अधिक मुनाफा कमाने के चक्कर में मिलावटी खाद्य सामग्री बेचने लग जाते हैं। और आम लोग को इस बात की भनक तक नहीं लगती है।

आपको बता दें कि मिलावटी सामानों के सेवन से स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ता है। इसलिए जरूरी है कि आप नवरात्रि व्रत से जुड़ी किसी भी तरह की सामग्री को खरीदने से पहले उसकी शुद्धता की जांच अवश्य करें। इस लेख में हम आपको असली व मिलावटी सामानों की पहचान कैसे करें इसके बारे में बताने जा रहे हैं।

स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है

मिलावटी खाद्य पदार्थों का सेवन स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक माना गया है। दरअसल, व्रत के आटे से लेकर साबूदाने तक में ऐसी चीजों को मिलाया जाता है, जो आपके स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव डालते हैं। उदाहरण के तौर पर पर- कुटटू के आटे में मुख्य रूप से किनकी और काले रंग की मिलावट की जाती है, जो पाइल्स की समस्या की वजह बन सकती है। वहीं, अगर आप मिलावटी साबूदाने का सेवन करते हैं तो यह किडनी और लिवर जैसे शारीरिक अंगों को प्रभावित कर सकता है।

यूं पहचाने नकली साबूदाना

नवरात्रि व्रत में लोग साबूदाने की मदद से कई तरह के पकवान बनाना पसंद करते हैं, क्योंकि यह बेहद लाइट होता है और इसलिए इसके सेवन से पेट में भारीपन का अहसास नहीं होता। लेकिन इसके लिए जरूरी है कि आप असली साबूदाने का सेवन करें। नकली साबूदाने को पहचानने के लिए आप इन तरीकों को अपना सकते हैं-

  • साबूदाने की असली पहचान उसके चिपचिपेपन में ही छिपी होती है। जब भी आप साबूदाने को मुंह में डालते हैं, तो इसमें एक चिपचिपेपन का अहसास होता है और यह दांतों में चिपकने लगता है। वहीं अगर साबूदाना नकली होगा तो आपको उसके दाने मुंह में किरकिरे महसूस होंगे।
  • इसी तरह, आप साबूदाने को भिगोकर भी उसकी शुद्धता की जांच कर सकते हैं। अगर साबूदाना असली होता है तो उसे कुछ देर पानी में भिगोने से वह फूलने लगेगा। वहीं, अगर साबूदाना नकली होगा तो रातभर रखने पर भी फूलेगा नहीं।
  • आप जलाकर भी असली व नकली साबूदाने में फर्क कर सकते हैं। अगर इसमें से राख नहीं निकलती है, तो समझ लीजिए कि साबूदाना असली है। वहीं, अगर जलाने पर उसमें से धुआं निकलता है या फिर आपको अजीब सी स्मेल आती है तो समझिए कि साबूदाना नकली है।

कुट्टू के आटे में मिलावट की पहचान

कुट्टू के आटे में मिलावट करना बेहद आम होता जा रहा है। साबूदाने की तरह ही नवरात्रि व्रत के दौरान कुट्टू का आटा भी सबसे अधिक खाए जाने वाला खाद्य पदार्थ है। आप इसमें मिलावट की पहचान कुछ इस तरह कर सकते हैं-

  • कुट्टू के आटे की पहचान का एक मुख्य तरीका उसके रंग को चेक करना है। आमतौर पर, कुट्टू के आटे का रंग गहरा भूरा होता है। लेकिन जब इसमें मिलावट की जाती है या फिर लंबे समय तक इसे रखने से यह खराब हो जाता है या फिर इसमें फंगस लग जाती है तो इसका रंग बदल जाता है। इसलिए, जब आप इसे खरीदें तो यह देखें कि कहीं वह ग्रे या हल्का हरा तो नहीं है। अगर ऐसा है तो समझ लीजिए कि वह आपकी सेहत के लिए हानिकारक है और ऐसे कुट्टू के आटे को खरीदने से बचें।
  • इसके अलावा, कभी भी आप कुट्टू के आटे को खरीदने से पहले एक बार उसे छूकर अवश्य चेक करें। अगर आटा खराब या फंगस लगा होगा तो आपको इसमें खुरदुरापन महसूस होगा। हो सकता है कि आपको इसमें बीच-बीच में काले दाने भी दिखाई दें।

सिंघाड़े के आटे में मिलावट की पहचान

कुट्टू के आटे के अलावा नवरात्रि व्रत के दौरान भक्तगण सिंघाड़े का आटा भी खाना काफी पसंद करते हैं। आप इसमें मिलावट की पहचान कुछ इस तरह कर सकते हैं-

  • सिंघाड़े के आटे में अक्सर अरारोट को मिलाया जाता है और इसलिए अगर आपको असली व मिलावटी सिंघाड़े के आटे की पहचान करनी हो तो उसे छूकर की जा सकती है। आमतौर पर, सिंघाड़े का आटा दरदरा होता है। लेकिन अगर आप उसे छूते हैं और आपको उसमें चिकनाहट महसूस होती है तो इसका अर्थ है कि इसमें अरारोट की मिलावट की गई है।
  • इसके अलावा, इसके रंग के आधार पर भी शुद्धता की पहचान की जा सकती है। आमतौर पर, सिंघाड़े के आटे में हल्का पीलापन होता है, लेकिन अगर आपको आटा सफेद नजर आए तो यह भी संकेत है कि आटा मिलावटी है। दरअसल, मिलावट करने पर इसका रंग भी कुछ हद तक बदल जाता हैं।

नवरात्रि व्रत में माता की भक्ति करते हुए आप व्रत-उपासना करें, लेकिन इन तरीकों को अपनाकर असली व नकली खाने में फर्क भी करें और खुद को स्वस्थ रखें।

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