बॉलीवुड की इन फिल्मों ने तोड़ा महिलाओं को लेकर स्टीरियोटाइप: Stereotype Movie
Stereotype Movie List

Stereotype Movie: बॉलीवुड एक ही पुरानी कहानी को अलग-अलग तरह से इस्तेमाल करने के लिए काफी बदनाम है। सदियों पुरानी कहानियां समय के साथ थोड़ी बदल जाती हैं लेकिन मूल अवधारणा वही रहती है। इसका मतलब यह है कि इन फिल्मों के माध्यम से कुछ स्टीरियोटाइप को बढ़ावा दिया जाता है जो आगे चलकर लोगों के मन में घर कर जाती है।

हालांकि, कुछ फिल्में ऐसी भी हैं, जिनका इनमें कोई योगदान नहीं है। बल्कि ये फिल्में स्टीरियोटाइप को तोड़ रही हैं और लोगों की मानसिकता में बदलाव ला रही हैं। यहां ऐसी ही कुछ फिल्मों के बारे में हम आपको बताने वाले हैं।

Stereotype Movie:पैडमैन

Stereotype Movie
Stereotype Movie-Padman

पीरियड्स पर फिल्म के बारे में किसने सोचा होगा। इस फिल्म को ऐसे समाज में रिलीज करना जहां पीरियड्स को वर्जित माना जाता है और साथ ही अपवित्र भी, बदलाव की दिशा में एक बड़ा कदम था। ये फिल्म लोगों द्वारा काफी पसंद की गई थी। फिल्म में अक्षय कुमार, राधिका आप्टे और सोनम कपूर लीड रोल में नजर आए थे। फिल्म को आर बाल्की ने डायरेक्ट किया था।

इंग्लिश विंग्लिश

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English Vinglish

इस फिल्म में इस सोच को बदला कि कुछ नया सीखने की कोई उम्र सीमा नहीं होती। 40 साल की एक महिला, जिसे उसके चाहने वाले सिर्फ इसलिए अपमानित करते हैं क्योंकि वह अंग्रेजी नहीं जानती थी, पूरे उत्साह के साथ भाषा सीखकर अपना सम्मान हासिल करने की यात्रा पर निकल पड़ती है। फिल्म का आखिरी सीन काफी अच्छा था जब इंग्लिश सीखने के बाद भी शशि(श्रीदेवी का कैरेक्टर) हिंदी अखबार को तरजी देती है।

फिल्म में श्रीदेवी में मुख्य रोल प्ले किया था। इस फिल्म को गौरी शिंदे द्वारा डायरेक्ट किया गया था।

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तारे जमीन पर

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Taare Zameen Par

यह हमारे बचपन की सबसे पसंदीदा फिल्मों में से एक है। पालन-पोषण से लेकर पढ़ाने के तरीके तक, इस फिल्म का हमारे जीवन पर कई तरह से प्रभाव पड़ा। उम्रदराज लोगों का मानना था कि सफल होने का एकमात्र तरीका पढ़ाई है और अगर कोई बच्चा पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित नहीं कर सकता है, तो वह असफल रह जाएगा, हालांकि इस फिल्म ने अंत में इस बात को झूठा साबित किया। फिल्म में आमिर खान और दर्शील सफारी मुख्य रोल में थे। फिल्म को आमिर खान और अमोल गुप्ते ने डायरेक्ट किया है।

दंगल

Stereotype Movie Name
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इस फिल्म ने ये साबित किया कि बेटा हो या बेटी दोनों एक जैसे हैं। फिल्म का एक डायलॉग सबसे अधिक फेमस है कि गोल्ड तो गोल्ड होता है चाहे वो बेटा लाए या बेटी। एक पिता को अपनी बेटियों को ट्रेनिंग देते देखना लोगों के लिए कुछ नया था। जब फोगाट बहनें अपने पिता के अधीन प्रशिक्षण ले रही थीं, तब दुनिया को बाप-बेटी के रिश्ते का एक नया पहलू देखने को मिला। फिल्म में आमिर खान, साक्षी तंवर, फातिमा सना शेख ने लीड रोल प्ले किया था। फिल्म को नीतीश तिवारी ने डायरेक्ट किया था।

मोम

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Mom

हमारे दिमाग में एक अवधारणा बैठ गई है कि मां से अपेक्षा की जाती है कि वह बच्चे की देखभाल करे और उनकी सुरक्षा के लिए प्रार्थना करे जबकि पिता से अपेक्षा की जाती है कि वह बच्चे के लिए लड़े। यह स्टीरियोटाइप तब टूटा जब एक माँ नहीं बल्कि एक सौतेली माँ अपनी बेटी को न्याय दिलाने के लिए लड़ती है। फिल्म में मोम का किरदार श्रीदेवी ने निभाया था। ये श्रीदेवी की आखिरी फिल्म थी जिसे रवि उद्यावर ने डायरेक्ट किया था।

मिशन मंगल

Movie of Stereotype
Mission Mangal

एक नई माँ, एक तलाकशुदा, 40 की उम्र की एक माँ, 20 की एक अकेली महिला, रिटायरमेंट के कगार पर खड़ा एक बूढ़ा व्यक्ति या अपने करियर को स्थिर करने वाला एक युवा, हर कोई अपने सपनों को प्राप्त कर सकता है। ये फिल्म ने इस स्टीरियोटाइप को तोड़ा है। मिशन मंगल एक शानदार फिल्म है जिसमें विद्या बालन, अक्षय कुमार, शर्मन जोशी, सोनाक्षी सिन्हा, तापसी पन्नू जैसे कई कलाकार नजर आए हैं। फिल्म जगन शक्ति द्वारा डायरेक्ट किया गया है।

थप्पड़

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Thappad

जिस समाज में मेरिटल रैप और घरेलू हिंसा को भी परिवार का ‘आंतरिक मामला’ माना जाता हो, क्या आप एक थप्पड़ को बड़ी बात कर सकते हैं? ‘थप्पड़’ की नायिका ठीक वैसा ही करती है, भले ही वह पूरी तरह समर्पित पत्नी है। थप्पड़ फिल्म एक वेक-अप कॉल है जो फिल्म की हीरोइन के साथ साथ उन तमाम महिलाओं को याद दिलाता है कि उसने अपने पति की जरूरतों को पूरा करने के लिए खुद के आत्मविश्वास को खो दिया है।

टी-सीरीज़ के भूषण कुमार द्वारा निर्मित और अनुभव सिन्हा द्वारा निर्देशित, यह तापसी पन्नू स्टारर इस बात की याद दिलाती है कि कैसे पितृसत्ता समाज में रहने वाली महिलाओं को अपमान सहकर भी अपनी शादीशुदा जिंदगी को महत्वपूर्ण बनाए रखने के लिए सलाह देता है।

निल बट्टे सन्नाटा

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Nil battey sannata

द न्यू क्लासमेट के रूप में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रिलीज हुई, अश्विनी अय्यर तिवारी द्वारा निर्देशित यह मजेदार और विचारोत्तेजक फिल्म, समाज में महिलाओं के लिए शिक्षा के महत्व को रेखांकित करती है। कलर येलो प्रोडक्शंस और जेएआर पिक्चर्स के बैनर तले आनंद एल राय, अजय राय और एलन मैकएलेक्स द्वारा निर्मित, फिल्म में स्वरा भास्कर ने चंदा सहाय, एक हाई-स्कूल ड्रॉप-आउट, गृहिणी और सिंगल माँ के रूप में अभिनय किया, जो अपने लिए बड़े सपने देखती है।

जल्द ही, अपने लिए भी एक नए भविष्य के सपने देखने लगती है। फिल्म धीरे-धीरे दर्शकों को उन लोगों की मानवता को पहचानने के लिए मजबूर करती है जो गरीबी से जीवन के सभी मामलों में समानता से वंचित हो गए हैं।

बधाई हो

पिता बनने के उम्र में जब एक लड़का भाई बनता है तो कैसा महसूस करता है और उसके माता-पिता को कितना सुनना पड़ता है ये फिल्म इसपर आधारित है। फिल्म में नकूल(आयुष्मान खुराना) अपने मां के प्रेग्नेंसी को लेकर बहुत शर्मिंदा होता है, लेकिन अंत में उसे समझ आता है कि प्यार करने की कोई उम्र नहीं होती है। फिल्म में आयुष्मान के अलावा नीना गुप्ता, गजराज राव और सानिया मल्होत्रा लीड रोल में नजर आए हैं। इस फिल्म को अमित शर्मा ने डायरेक्ट किया था।

बॉलीवुड की ये वो फिल्में हैं जो आप सभी को जरूर देखनी चाहिए। इन फिल्मों समाज के कई स्टीरियोटाइप को तोड़कर ये साबित किया है कि सीखने की और प्यार करने की कोई उम्र नहीं होती है।