Master Chef clip
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Summary : पार्वती की कहानी है प्रेरणा

बेटे के साथ 10वीं–12वीं की पढ़ाई पूरी करने वाली पार्वती ने न सिर्फ परीक्षा पास की, बल्कि बेटे से ज़्यादा नंबर लाकर हौसले की नई कहानी लिखी।

MasterChef India 9 Parvati Soni: मास्टरशेफ इंडिया सीज़न 9 की शुरुआत 5 जनवरी से हो चुकी है। इस बार शो में जो चीज़ सबसे अलग नज़र आ रही है, वह हैं प्रतियोगियों की जिंदगी से जुड़ी सच्ची और भावुक कहानियां। जज कुणाल कपूर, विकास खन्ना और रणवीर बरार जब देश के अलग-अलग कोनों से आए कंटेस्टेंट्स से मिल रहे हैं, तो उन्हें सिर्फ अच्छा खाना ही नहीं, बल्कि हिम्मत और संघर्ष की कहानियां भी देखने को मिल रही हैं। ऐसी ही एक कहानी है बीकानेर की पार्वती सोनी की, जो अपने बेटे हिमांश सोनी के साथ मास्टरशेफ के किचन में उतरी हैं।

पार्वती सोनी पेशे से एक प्रोफेशनल शेफ हैं। वह फिलहाल जयपुर में रहती हैं और वहां सिटी पैलेस के रॉयल इंडियन रेस्टोरेंट में बतौर शेफ काम कर रही हैं। शो के दौरान पार्वती ने जजों को बताया कि उनके किचन में कुल 80 शेफ हैं और उनमें वह अकेली महिला हैं। यह बात सुनकर जज भी हैरान रह गए। पार्वती का कहना है कि उन्होंने ऐसे माहौल में खुद को साबित किया, जहां आमतौर पर महिलाओं की मौजूदगी बहुत कम देखने को मिलती है।

पार्वती का सफर आसान नहीं रहा। वह एक रूढ़िवादी समाज में पली-बढ़ीं, जहां लड़कियों का बाहर निकलना भी आसान नहीं होता। शादी के बाद उनकी जिंदगी ने नया मोड़ लिया। उनके पति न सिर्फ खुले विचारों वाले थे, बल्कि उन्होंने पार्वती को आगे बढ़ने के लिए हर कदम पर प्रोत्साहित किया। शादी से पहले पार्वती सिर्फ नौवीं कक्षा तक पढ़ी थीं। उसके बाद वह गृहिणी बन गईं और कभी-कभार पति के ज्वेलरी बिज़नेस में मदद कर देती थीं।

पार्वती बताती हैं कि शादी के बाद से ही उनके पति चाहते थे कि वह अपनी पढ़ाई पूरी करें। लेकिन समाज और सोच की दीवारें उनके मन में थीं। उन्हें लगता था कि शादी के बाद पढ़ाई कौन करता है। असली बदलाव तब आया, जब उनके बेटे बड़े हुए। बेटों ने भी मां को पढ़ने के लिए लगातार प्रेरित किया। पार्वती कहती हैं कि आखिरकार उन्होंने हिम्मत जुटाई और दोबारा पढ़ाई शुरू की। इस कहानी का सबसे खास हिस्सा तब आता है, जब पार्वती बताती हैं कि उनके बेटे हिमांश ने ही उनका 10वीं का फॉर्म भरा, उसी साल जब वह खुद बोर्ड परीक्षा देने वाला था। मां और बेटा दोनों ने साथ में 10वीं और फिर 12वीं की पढ़ाई की।

खास बात यह रही कि पार्वती ने 10वीं की परीक्षा में अपने बेटे से ज़्यादा नंबर हासिल किए।  पार्वती बताती हैं कि 12वीं की पढ़ाई के दौरान समय की कमी सबसे बड़ी चुनौती थी। नौकरी के चलते उन्हें पढ़ने का वक्त नहीं मिलता था। ऐसे में हिमांश वीडियो कॉल पर उन्हें चैप्टर पढ़कर सुनाता था, जैसे कोई कहानी सुना रहा हो। आज भी बेटा चाहता है कि मां आगे पढ़ें और आईएचएम (इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट) में दाखिला लें। 

ढाई दशक से पत्रकारिता में हैं। दैनिक भास्कर, नई दुनिया और जागरण में कई वर्षों तक काम किया। हर हफ्ते 'पहले दिन पहले शो' का अगर कोई रिकॉर्ड होता तो शायद इनके नाम होता। 2001 से अभी तक यह क्रम जारी है और विभिन्न प्लेटफॉर्म के लिए फिल्म समीक्षा...