Summary: 10 महाविद्याओं के यंत्र, जोधपुर के अमरनाथ मंदिर में नई धार्मिक पहल
राजस्थान के जोधपुर शहर में स्थित अमरनाथ मंदिर इन दिनों आध्यात्मिक ऊर्जा का नया केंद्र बन गया है। इस मंदिर में पहली बार मां आदि शक्ति के दस महाविद्या यंत्र पत्थर पर उकेरकर स्थापित किए गए हैं। ये यंत्र मंदिर की छत पर और नए बनाए गए परिसर में भी लगाए गए हैं।
10 Mahavidyas in Rajasthan: राजस्थान का अमरनाथ मंदिर इन दिनों आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यह मंदिर जोधपुर शहर में स्थित है। इस मंदिर का नाम अमरनाथ है, जो भगवान शिव से जुड़ा हुआ नाम है। लोग दूर-दूर से इसे देखने और पूजा करने आ रहे हैं। अब हाल ही में इस महादेव मंदिर में पहली बार मां आदि शक्ति स्वरूप दस महाविद्याओं के यंत्र स्थापित किए गए हैं। महाविद्या का मतलब महान ज्ञान होता है। देवी शक्ति के 10 मुख्य रूपों को महाविद्या कहा जाता है। ये रूप ब्रह्मांड की कई शक्तियों का प्रतीक माना जाता है।
राजस्थान में पहली बार हुई महाविद्याओं स्थापना
दरअसल, अमरनाथ मंदिर में 10 महाविद्याओं के यंत्र पत्थर पर उकेरकर स्थापित किए गए हैं। इन यंत्रों को मंदिर की छत पर भी स्थापित किया गया है। इस मंदिर में इनकी स्थापना के लिए नया परिसर तैयार किया गया है। इस यंत्र आदिशक्ति के दस रूप— काली, तारा, त्रिपुरा सुन्दरी, भुवनेश्वरी, चिन्नमस्ता, भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला शामिल हैं। यह नई पहल न केवल धार्मिक आस्था को गहरा करती है, बल्कि लोगों को अध्यात्म के और करीब ले जाती है।
ये हैं मंदिर में स्थापित यंत्रों में आदिशक्ति के रूप

इन दसों रूपों में मां काली अज्ञान और नकारात्मकता का नाश करने वाली हैं।

तारा संकट में रक्षा करने वाली और मार्गदर्शन देने वाली देवी मानी जाती हैं।

त्रिपुरा सुंदरी सौंदर्य, प्रेम और आध्यात्मिक संतुलन की प्रतीक हैं।

वहीं भुवनेश्वरी पूरी सृष्टि की अधिपति शक्ति के रूप में पूजी जाती हैं।

छिन्नमस्ता आत्मबल और त्याग की देवी हैं, जो यह सिखाती हैं कि आत्मा की शक्ति सर्वोपरि होती है।

भैरवी क्रोध और जागरूकता की देवी हैं, जो अज्ञान को नष्ट कर आत्मज्ञान का मार्ग खोलती हैं।

धूमावती वैराग्य और अकेलेपन की शक्ति का प्रतिनिधित्व करती हैं, और कठिन समय में धैर्य और ज्ञान देती हैं।

बगलामुखी शत्रु नाश और वाणी पर नियंत्रण की शक्ति देती हैं, जिससे साधक को विजय प्राप्त होती है।

मातंगी कला, संगीत और वाणी की देवी हैं, जो मानसिक शुद्धता और रचनात्मकता प्रदान करती हैं।

कमला मां लक्ष्मी का स्वरूप हैं, जो धन, सुख और समृद्धि की देवी मानी जाती हैं।
क्या हैं मंदिर के पुजारियों का कहना?
मंदिर के प्रबंधन और पुजारियों के अनुसार, इस मंदिर में जो यंत्र स्थापित किए गए हैं, उन्हें एक विशेष विधि और मंत्रों के साथ स्थापित किया गया है। यह पहल जोधपुर में पहली बार हुई है। इस वजह से यह मंदिर अब शहर का एक अनोखा शक्ति उपासना केंद्र बन गया है। मंदिर में जो दस महाविद्याओं के यंत्र लगाए गए हैं, वे हर भक्त को देवी शक्ति का विशेष आशीर्वाद देने का माध्यम माने जाते हैं।
इस मंदिर से जुड़ी भक्तों की आस्था
भक्तों का मानना है कि यंत्रों के दर्शन और साधना से नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। स्थानीय लोग और श्रद्धालु कहते हैं कि अब यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा के केंद्र के रूप में भी महत्वपूर्ण बन गया है, जहां मां आदिशक्ति के दसों स्वरूपों की कृपा एक ही स्थान पर प्राप्त की जा सकती है।
