Summary: फातिमा सना शेख के साथ हुई छेड़खानी और हिंसा की चौंकाने वाली घटना
अभिनेत्री फातिमा सना शेख ने एक इंटरव्यू में बताया कि छेड़खानी का विरोध करने पर एक व्यक्ति ने उन्हें बुरी तरह मारा। इस घटना ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया और आत्मरक्षा के नजरिए को लेकर उनकी सोच बदल दी।
Fatima Assault Story: फिल्म ‘दंगल’ से घर-घर में पहचान बनाने वाली अभिनेत्री फातिमा सना शेख ने हाल ही में एक दिल दहला देने वाला अनुभव साझा किया, जिसने हर उस लड़की की हकीकत को उजागर किया है, जो किसी न किसी रूप में छेड़छाड़ या उत्पीड़न से गुजरती है।
एक इंटरव्यू में फातिमा ने बताया कि एक बार जब वह सार्वजनिक स्थान पर थीं, तब एक व्यक्ति ने उन्हें अनुचित ढंग से छूने की कोशिश की। उन्होंने साहस दिखाया और उसका विरोध करते हुए उसे थप्पड़ मार दिया। लेकिन इसके जवाब में वह व्यक्ति और उग्र हो गया और उसने उन्हें इतनी ज़ोर से मारा कि वह वहीं गिर गईं। यह सिर्फ एक झटका नहीं था, बल्कि एक गहरा आंतरिक घाव बन गया।
विरोध का मिला दर्दनाक जवाब
फातिमा ने इस अनुभव को साझा करते हुए कहा कि उन्होंने अपने आत्म-सम्मान और सुरक्षा के लिए आवाज़ उठाई थी, लेकिन बदले में उन्हें और अधिक हिंसा झेलनी पड़ी। इस घटना ने उन्हें यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि महिलाएं भले ही अपने हक के लिए बोलें, लेकिन समाज में कई बार ऐसा बोलना उनके लिए और अधिक खतरनाक हो सकता है।
इस घटना के बाद फातिमा पहले से कहीं ज़्यादा सतर्क रहने लगीं। उन्होंने महसूस किया कि किसी गलत व्यवहार का विरोध करते समय भी महिलाओं को यह देखना पड़ता है कि प्रतिक्रिया देने से स्थिति और बिगड़ तो नहीं जाएगी।
लॉकडाउन में भी पीछा
फातिमा ने एक और घटना साझा की, जो मुंबई में कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान हुई। वह मास्क पहनकर साइकिल चला रही थीं, जब एक टेम्पो ड्राइवर ने उन्हें लगातार फॉलो करना शुरू कर दिया। वह न केवल हॉर्न बजा रहा था बल्कि अजीबो-गरीब आवाज़ें निकालता रहा। जब तक फातिमा अपनी गली में नहीं मुड़ीं, वह उनका पीछा करता रहा।
यह घटना इस बात की मिसाल है कि महिलाओं के लिए कोई भी समय या स्थान सुरक्षित नहीं होता न लॉकडाउन का शांत समय, न मास्क के पीछे छिपा चेहरा, न ही साइकिल चलाना जैसे साधारण पल।
सिर्फ लड़की होना ही काफी है
फातिमा ने साफ तौर पर कहा कि महिलाओं को इस तरह के व्यवहार का शिकार बनने के लिए कुछ खास करने की ज़रूरत नहीं होती। सिर्फ लड़की होना ही काफी है। यह एक ऐसी सच्चाई है जो हर उम्र, वर्ग और पेशे की महिलाओं से जुड़ी है।
फिल्मों में सशक्त किरदार, असल जीवन में भी मजबूती
हालांकि इस दर्दनाक अनुभव के बावजूद फातिमा सना शेख ने खुद को संभाला और फिल्मी दुनिया में आगे बढ़ती रहीं। हाल ही में वे ‘मेट्रो…इन दिनों’ में नज़र आईं और अब उनकी नई फिल्म ‘आप जैसा कोई’ नेटफ्लिक्स पर रिलीज़ हो चुकी है। इस फिल्म में उन्होंने एक ऐसे किरदार को निभाया है जो सामाजिक सीमाओं को तोड़ते हुए अपने प्यार और आत्मसम्मान के लिए खड़ा होता है कुछ वैसा ही जैसा फातिमा असल जिंदगी में कर रही हैं।
फातिमा की कहानी बताती है कि हमें सिर्फ महिलाओं को सुरक्षित माहौल नहीं देना, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना है कि वे अपनी बात कह सकें बिना डरे, बिना सहमे।
