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फेमस एकता कपूर का जलवा जिस बड़ी सी टीवी की दुनिया पर आज भी कायम है। उस टीवी की शक्ल 80 के दशक में बिलकुल भी वैसी नहीं थी, जैसी ये अब है। तब दूर से दर्शन कराता दूरदर्शन एक मात्र टीवी चैनल था। फिर इसी चैनल पर एक सीरियल की शुरुआत हुई, नाम था ‘हम लोग’। हम लोग भारत का पहला सीरियल है। 7 जुलाई, 1984 को शुरू हुए इस सीरियल के किरदार आज भी लोगों के दिलों में छिपे हुए हैं। फिर चाहे नैरेटर के तौर पर काम करने वाले अभिनेता अशोक कुमार हों या फिर बसेसर, नन्हें या बड़की के किरदार। इन सभी ने मिलकर एक ऐसे परिवार की रचना कर दी थी कि जिसे आज भी लोग भूल नहीं पाएं हैं। अबकी पीढ़ी तो इसे सिर्फ यूट्यूब पर ही देख सकती है लेकिन जिन्होंने इसे टीवी के सामने बैठकर देखा, उनके पास तो इसकी ढेरों यादें हैं। इसी सीरियल से जुड़ी ऐसी अनगिनत बातें हैं, जिन्हें आपको जरूर जानना चाहिए। इसलिए भी जानना चाहिए कि मनोरंजन का जो रूप आज आप देख रहे हैं, उसके बीज देश के इस पहले धारावाहिक ने ही बोए थे। ये एक ऐसा शो था, जिसको पसंद करने वाले दूसरों के घरों के टीवी पर भी कब्जा कर लिया करते थे। 
देश के पहले सीरियल 'हम लोग' की पूरी कहानी 5
1000 एपिसोड नहीं, 4 लाख खत-
ये धारावाहिक आजकल की तरह बहुत लंबा नहीं चला था। बल्कि ये सिर्फ 17 महीने आया था और इस दौरान कुल 154 एपिसोड बने थे। लेकिन ये एपिसोड भी ऐसे थे कि दर्शक इनके आने का इंतजार किया करते थे। खास बात ये रही कि इस दौरान अशोक कुमार को 4 लाख खत मिले थे। फैंस के इन खत में माता-पिता को उनकी शादी के लिए मनाने की बात कही गई थी। 
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मेक्सिकन सीरीज से प्रेरित-
हम लोग एक मेक्सिकन टेलीविजन सीरीज पर आधारित था। ये शिक्षा और मनोरंजन पर बना शो था। इसका आइडिया उस वक्त के इन्फॉर्मेशन एंड ब्रॉडकास्टिंग मिनिस्टर वसंत साठे को आया था। जो 1982 में मेक्सिकन ट्रिप से लौटे थे। फिर ‘हम लोग’ को मनोहर श्याम जोशी ने लिखा। 
मेक्सिकन लेखक भी आए भारत-
1984 में मेक्सिको से वेन कोनमिगो नाम की सीरीज लिखने वाले लेखक को भी बुलाया गया। उन्होंने यहां के लेखकों के साथ काम किया और कई सारे सामाजिक मुद्दों जैसे परिवार नियोजन, महिल सशक्तिकारण और दहेज के इर्द-गिर्द इस धारावाहिक का निर्माण किया। 
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सब साथ-साथ-
हमलोग की शूटिंग से जुड़ी भी एक खास बात है। इसके एक्टर्स सीधे शूटिंग पर नहीं जाते थे बल्कि वो पहले दिल्ली मंडी हाउस के पास हिमाचल भवन में मिलते थे। यहां उनकी रिहर्सल चलती थी। फिर सारे लोग एक वैन में बैठकर गुड़गांव जाते थे। जहां इस पूरे सीरियल की शूटिंग हुई थी। उन दिनों को याद करके आज भी इसके एक्टर भावुक हो जाते हैं।