Overview:अभिषेक बच्चन की 25 सालों की एक्टिंग यात्रा
अभिषेक बच्चन ने 30 जून 2000 को Refugee फिल्म से अपने करियर की शुरुआत की थी। 25 सालों के इस सफर में उन्होंने डर, चुनौतियों और मेहनत के साथ खुद को एक मजबूत एक्टर के रूप में साबित किया। कॉमेडी से डरने वाले अभिषेक ने कई हिट फिल्में दीं और हर रोल से कुछ नया सीखा। आज वे दर्शकों के प्यार और सफलता को सबसे बड़ी प्रेरणा मानते हैं।
Abhishek Bachchan 25 Years in Bollywood : 30 जून 2000 का दिन अभिषेक बच्चन के लिए बेहद खास था, क्योंकि इसी दिन उनकी पहली फिल्म Refugee रिलीज़ हुई थी। उस वक्त वो सिर्फ एक नया चेहरा नहीं थे, बल्कि बच्चन परिवार की एक नई उम्मीद भी थे। लेकिन अभिषेक ने यह सफर अपने बल पर तय किया, जहां उन्होंने हर तरह की फिल्मों में काम करके अपनी अलग पहचान बनाई।
25 साल बाद, जब वो अपने इस फ़िल्मी सफर को पीछे मुड़कर देखते हैं, तो कहते हैं कि शुरुआत बेहद डरावनी थी। Refugee जैसी गंभीर फिल्म से शुरुआत करना और फिर धीरे-धीरे Dhoom, Guru, Bol Bachchan और Housefull जैसी हिट फिल्मों तक पहुंचना, ये कोई आसान सफर नहीं था। अभिषेक का मानना है कि उन्होंने वक्त के साथ खुद को बेहतर बनाया है।
आज अभिषेक को इस बात की खुशी है कि उन्हें दर्शकों का प्यार और सराहना मिलती रही है। वो कहते हैं कि सफलता किसी भी एक्टर के लिए सबसे बड़ी खुशी होती है। यही दर्शकों का प्यार उन्हें आगे बढ़ने की ताकत देता है, और यही वजह है कि वो हर फिल्म में कुछ नया और बेहतर करने की कोशिश करते हैं।
पहली फिल्म में था डर,लेकिन मौका था खास
अभिषेक बच्चन की पहली फिल्म Refugee उनके लिए किसी सपने से कम नहीं थी। जब निर्देशक जेपी दत्ता ने उन्हें पहली बार एक अवॉर्ड फंक्शन में देखा, तभी उन्होंने अभिषेक को अपनी फिल्म में लेने का फैसला किया। अभिषेक कहते हैं कि ये उनके लिए बहुत बड़ा सम्मान था कि उन्हें पहली ही फिल्म में ऐसा मौका मिला। लेकिन अंदर ही अंदर वो बेहद घबराए हुए थे। हर नए इंसान की तरह उन्हें भी डर था कि वो कैमरे के सामने कैसे नज़र आएंगे। पहला दिन, पहला सीन और दर्शकों की उम्मीदें—सब कुछ बहुत भारी लग रहा था। लेकिन फिर भी उन्होंने हिम्मत दिखाई और आज उसी की बदौलत 25 साल बाद भी उनका नाम चमक रहा है।
कॉमेडी से डरते थे अभिषेक, फिर दी हिट फिल्में
अभिषेक बच्चन का मानना है कि कॉमेडी करना सबसे मुश्किल काम होता है। वो कहते हैं कि डायलॉग में अगर हंसी की टाइमिंग न हो, तो दर्शक कनेक्ट नहीं कर पाते। शुरू में उन्हें लगा था कि शायद वो कॉमेडी नहीं कर पाएंगे, लेकिन Bol Bachchan, Housefull 3 और Happy New Year जैसी फिल्मों ने साबित कर दिया कि वो इस जॉनर में भी माहिर हैं। कॉमेडी में बहुत कुछ स्क्रिप्ट पर निर्भर करता है, लेकिन अभिषेक ने अपने अभिनय से हर रोल को ज़िंदा किया। आज जब Housefull 5 जैसी फिल्म हिट होती है, तो वो खुद भी हैरान होते हैं कि जिस चीज़ से सबसे ज्यादा डरते थे, उसमें इतनी सफलता मिल गई।
हर किरदार से सीखा कुछ नया और बढ़े आगे
अपने 25 साल के करियर में अभिषेक ने हर तरह की फिल्में की हैं—Guru जैसी बायोपिक, Dhoom जैसी एक्शन फिल्म और Manmarziyaan जैसी इमोशनल स्टोरीज़। उनका मानना है कि हर फिल्म एक स्कूल होती है, जहां आप कुछ नया सीखते हैं। वो कहते हैं कि जब आप कैमरे के सामने होते हैं, तो हर बार एक नया अनुभव होता है। और यही अनुभव उन्हें हर बार बेहतर बनाने में मदद करता है। अभिषेक को एक्टिंग सिर्फ एक करियर नहीं, बल्कि एक यात्रा लगती है, जिसमें हर मोड़ पर कुछ नया जानने को मिलता है।
हर रोल निभाना बड़ी जिम्मेदारी
अभिषेक मानते हैं कि आज का दर्शक बहुत समझदार हो गया है। वो सिर्फ चेहरा देखकर फिल्में नहीं देखता, बल्कि कहानी और अभिनय पर ध्यान देता है। इसी वजह से हर एक्टर को अब बहुत सोच-समझकर काम करना होता है। अभिषेक कहते हैं कि अब वो पहले से कहीं ज्यादा सहज महसूस करते हैं कैमरे के सामने। उन्हें पता है कि हर सीन में क्या देना है और कैसे देना है। 25 साल का अनुभव उन्हें हर सिचुएशन को बेहतर ढंग से हैंडल करने में मदद करता है।
सफलता देती है हौसला, दर्शकों का प्यार है सबसे खास
अभिषेक कहते हैं कि जब कोई फिल्म सफल होती है, तो वो एक्टर के लिए किसी तोहफे से कम नहीं होती। यह इस बात का सबूत होता है कि दर्शकों ने उनके काम को सराहा है। Dasvi, I Want To Talk, और Be Happy जैसी फिल्मों की ओटीटी पर सफलता ने उन्हें यह यकीन दिलाया कि लोग उनके काम को पसंद करते हैं। और यही सराहना उन्हें हर बार कुछ नया और बेहतर करने के लिए प्रेरित करती है। वो मानते हैं कि जब तक दर्शकों का प्यार मिलता रहेगा, वो अपनी एक्टिंग में नयापन लाते रहेंगे।
