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Who are the medal winners for India in Tokyo Olympics?

हमारा समाज पुरूष प्रधान समाज हैए जहां महिलाओं को पुरूषों के मुकाबले कम आंका जाता है। ऐसी मान्यता है कि जो कार्य लड़के कर सकते हैंए उन कार्यों को लड़कियां अंजाम नहीं दे सकती। कुछ इसी सोच के कारण लड़कों को पूरा आसमान सौंप दिया जाता हैए मगर उसमें उड़ान लड़कियां भर रही है। जी हां समाज की इस सोच को एक बार फिर टोक्यो ओलपिंक के दौरान लड़कियों ने पूरी तरह से झुटला लिया और खेंलों में एक के बाद एक पदक हासिल करए हम किसी से कम नहीं के नारे को सच कर दिखाया। आसमान की बुलंदियों को छूने वाली

 

Who are the medal winners for India in Tokyo Olympics?

लवलीना बोरगोहेन

 

भारत की लवलीना बोरगोहेन को टोक्यो ओलंपिक की महिला मुक्केबाजी की 69 किग्रा स्पर्धा में तुर्की की मौजूदा विश्व चैंपियन बुसेनाज सुरमेनेली के खिलाफ शिकस्त के साथ कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा है। लवलीना बोरगोहेन ने ओलंपिक में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर न सिर्फ देश का नाम रोशन किया है बल्कि इस खिताब से नवाज़ी जाने वाली भारत की तीसरी बॉक्सर बन चुकी हैं। इसके अलावा ओलंपिक में बॉक्सिंग में भारत को मेडल दिलानी वाली केवल दूसरी महिला बॉक्सर हैं। लवलीना से पहले केवल मैरी कॉम ने जीत का परचम लहराया था। अगर बाक्सिंग की बात की जाएए तो ओलंपिक में भारत को 9 साल के बाद ये सम्मान हासिल हुआ है। इससे पहले साल 2012 में भारत की मेज़बानी करती हुई मैरी कॉम ने लंदन ओलंपिक में भारत  को जीत दिलाई था। अब लवलीना ने बॉक्सिंग के क्षेत्र में पदक हासिल कर इस जीत के सफर को न सिर्फ आगे बढ़ाया। साथ ही इस फेहरिस्त में अपना नाम भी दर्ज कर लिया। लवलीना बोर्गोहेन एक आम परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उनका जन्म असम के गोलाघाट में हुआ था। लवलीना के अलावा उनकी दोनों बहनें लीचा और लीमा नेशनल बॉक्सिंग चैंपियन है। किक बॉक्सिंग से लवलीना ने अपने करियर की शुरूआत की लेकिन बाद में उन्होंने बॉक्सिंग में अपना हाथ आज़माया और यहीं से उनके करियर की शुरुआत हुई। लवलीना ने साल 2012 में बॉक्सिंग की तालीम पोदम बोरो से हासिल की। मैरी कॉम को अपना आर्दश मानने वालीं लवलीना ने इंटरनेशनल बॉक्सिंग की ट्रेनिंग वूमंस बॉक्सिंग कोच शिव सिंह से ही ली।

 

 

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 मीराबाई चानू

टोक्यो ओलिंपिक में भारत को पहला पदक दिलाने वाली मीरा बाई चानू भारत की बेटियों की एक लिए एक मार्गदर्शक हैं। जी हां टोक्यो ओलंपिक 2020 में वेटलिफ्टिंग में इतिहास रचने वाली मीराबाई चानू ने महिलाओं के 49 किलोग्राम भार वर्ग में 202 किलो य87 किलो स्नैच और 115 किलो क्लीन एंड जर्क वजन उठाया और भारत को खेलों के पहले ही दिन सिल्वर मेडल दिलाया। वे भारत की बेटियों के लिए एक ऐसी मिसाल हैंए जो उन्हें हर पल प्रेरित करती रहेगी और उन्हें ये भी विश्वास दिलाएगी कि खेलों में भी अपना मुस्तिकबिल खोजा जा सकता है। दूसरी लड़कियों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करने वाली मीराबाई चानू के भारत लौटने के बाद उनके सम्मान में कई कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। 8 अगस्त 1994 को जन्मी मीराबाई चानू इम्फाल की रहने वाली हैं। वे पहले तीरंदाज़ी में अपना करियर बनाना चाहती थी। मगर फिर धीरे धीरे वेटलिफ्टिंग को ही उन्होंने अपना जुनून बना लिया। ग्यारह वर्ष की नन्ही उम्र में मीराबाई चानू ने पहला गोल्ड मेडल लोकल वेटलिफ्टिंग प्रतियोगिता में जीता था। भारत के साथ साथ मणिपुर का नाम भी रोशन करने वाली मीराबाई चानू एक आम परिवार से ताल्लुक रखती हैं। मगर उनके परिजनों ने हर हालात में उनका पूरा साथ दिया और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित भी कियाए जिसकी बदौलत वो आज इन बुलंदियों तक पहुंच पाई है। मीराबाई चानू अब तक कई मेडल अपने नाम कर चुकी हैं। ग्लोस्को कॉमनवेल्थ गेम्स में साल 2014 में उन्होंने सिल्वर मेडल जीताए तो वहीं साल 2017 में उन्होंने वर्ल्ड वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक अपने नाम किया। तो वहीं साल 2018 में कॉमन वेल्थ गेम्स में भी चानू ने गोल्ड मेडल जीता।

 

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पीवी सिंधु

 

पीवी सिंधु ने अपने बेहतरीन खेल की बदौलत टोक्यो में हुए ओलंपिक 2020 में  भारत की सर्वप्रथम महिला डबल ओलंपिक पदक विजेता बनने का खिताब अपने नाम कर लिया है। । उन्होंने ओलंपिक खेंलों में दुनिया की 9वें नंबर की चीन की ही बिंग जिओ पर सीधे गेम में जीत के बाद भारत के लिए कांस्य पदक जीता। इस होनहार खिलाड़ी की पैदाइश हैदराबाद में पीवी रमना और पी विजया के घर 5 जुलाई 1995 को हुई थी। गौरतलब है कि इनके माता पिता भी वालीबॉल के नेशनल लेवल के खिलाड़ी रह चुके हैं। इनके पिता को साल 2000 में अर्जुन अवार्ड से नवाज़ा भी जा चुका है। पी वी सिंधु ने महज आठ साल की नन्ही उम्र से बैडमिंटन खेलना आरंभ किया और फिर उसके बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। इन्होंने स्कूली शिक्षा हैदराबाद में ही हासिल की। कड़ी मेहनत की बदौलत पीवी सिंधु ने आज एक खास मकाम हासिल किया हैए जो वाकई काबिले तारीफ है।

 

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भारतीय महिला हॉकी टीम

 

भारतीय महिला हॉकी टीम ने अपने जज्बे और हिम्म्त की बदौलत सबको चौंका दिया। एक के बाद एक मुकाबलों को जीतकर उन्होंने लोगो को हैरान किया। भले ही भारतीय महिला हॉकी टीम टोक्यो आलंपिक में कोई पदक न जीत पाई हो मगर उनके शानदार प्रदर्शन से पूरे देश को उन पर नाज़ है। टोक्यो ओलंपिक में लगातार तीन बार हार का सामना करने के बाद भारतीय टीम आखिर फाइनल तक पहुंच गई थी। चौथे मुकाबले में उन्होंने दक्षिण अफ्रीका को हरा दिया। उसके बाद उन्होंने ऑस्ट्रेलिया को हराया। मगर भारत को ब्रॉन्ज के लिए कड़े मुकाबले में ब्रिटेन के हाथों 4ण्3 से शिकस्त मिली