Overview:नई पीढ़ी की हीरोइनें काम और पैरेंटिंग दोनों साथ निभा रही हैं
आलिया भट्ट और उनकी बेटी राहा की वैनिटी वैन की खबर न सिर्फ फैन्स के लिए दिलचस्प है बल्कि यह नई पीढ़ी की सोच को भी उजागर करती है। महेश भट्ट के शब्दों में, यह सचमुच एक ‘मंदिर’ है, जहाँ काम और मातृत्व दोनों का संगम देखने को मिलता है।
Alia Bhatt’s Daughter Raha Vanity Van: बॉलीवुड में आलिया भट्ट हमेशा से अपने टैलेंट और सादगी के लिए जानी जाती रही हैं। लेकिन अब वह सिर्फ एक अभिनेत्री ही नहीं, बल्कि एक मां की भूमिका भी पूरी निष्ठा से निभा रही हैं। आलिया की बेटी राहा की देखभाल और उनके आराम को ध्यान में रखते हुए सेट पर एक खास वैनिटी वैन तैयार की गई है। महेश भट्ट ने इसे ‘मंदिर’ जैसा बताया और यह भी कहा कि आज की नई पीढ़ी की हीरोइनें काम और पेरेंटिंग दोनों को संतुलित कर रही हैं।
राहा के लिए खास वैनिटी वैन
आलिया की बेटी राहा के लिए सेट पर एक अलग वैनिटी वैन बनाई गई है, जिसमें बच्चे की जरूरत की हर सुविधा मौजूद है। यह सिर्फ एक साधारण वैन नहीं, बल्कि छोटे बच्चे की सुरक्षा, आराम और देखभाल का पूरा इंतजाम किया गया है।
महेश भट्ट का भावुक बयान
महेश भट्ट ने इस वैनिटी वैन को ‘मंदिर’ कहकर संबोधित किया। उनका मानना है कि यह जगह सिर्फ राहा की देखभाल के लिए नहीं बल्कि मां-बेटी के बीच के पवित्र बंधन का प्रतीक भी है। उन्होंने बताया कि आलिया के लिए काम और मातृत्व दोनों समान रूप से अहम हैं।
नई पीढ़ी की हीरोइनें और बदलते समय की सोच
महेश भट्ट ने इस मौके पर कहा कि आज की एक्ट्रेसेज़ पहले से कहीं अधिक आत्मनिर्भर हैं। वे अपने करियर को भी पूरी शिद्दत से निभा रही हैं और साथ ही मां की भूमिका भी बखूबी अदा कर रही हैं। आलिया इसी नई सोच और आत्मविश्वास की मिसाल हैं।
आलिया का बैलेंसिंग एक्ट
मां बनने के बाद भी आलिया ने अपने करियर की रफ्तार को धीमा नहीं किया। उन्होंने फिल्मों और परिवार के बीच एक संतुलन बनाकर दिखा दिया कि यदि इच्छा और लगन हो तो दोनों भूमिकाएं एक साथ निभाई जा सकती हैं।
राहा के लिए प्यार और देखभाल
वैनिटी वैन में राहा के खेलने और आराम करने का खास इंतजाम है। आलिया चाहती हैं कि शूटिंग के बीच भी उनकी बेटी सुरक्षित और खुश महसूस करे। यह आलिया के मातृत्व की गहराई और जिम्मेदारी को दर्शाता है।
समाज के लिए एक नई मिसाल
आलिया भट्ट का यह कदम सिर्फ फिल्म इंडस्ट्री तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज के लिए भी एक प्रेरणा है। यह बताता है कि कामकाजी महिलाएं मातृत्व को बोझ नहीं बल्कि गर्व के साथ जी सकती हैं।
