राहुल और नीता की 11वी शादी की वर्षगांठ पर जब मैं पहुंची तो मुझे वहां नीता को इतना खुश देखकर आश्चर्य हुआ। दरअसल मुझे लगता था कि एक समय के बाद पति और पत्नी के रिश्तो में प्रागढ़ता मुश्किल है। क्योंकि मैंने अधिकांश कपल्स को छोटी-छोटी बातों पर लड़ते हुए देखा है और इधर तो बहुत से तलाक के केस भी सामने आए हैं। शायद इसी कारण मैंने आज तक विवाह नहीं किया था। नीता ने उस दिन सबके सामने अपने पति को कुछ इस तरह धन्यवाद दिया–“जब आपने मुझे अकेलेपन और अवसाद के साथ संघर्ष करते देखा, तो आपने मुझे समय दिया। आप मेरी मूर्खतापूर्ण इच्छा सुनते ही नहीं उसको पूरा भी करते थे। यही नहीं यदि मैं घर और बच्चों के बीच थक जाती थी, तो आप किसी ना किसी बहाने से बाहर से खाना मंगाते या स्वयं पिज़्ज़ा बनाकर सबको खिलाते। शायद बहुत कम ऐसे पति होंगे जो वीकेंड पर आराम करने की जगह अपनी पत्नी के साथ घर की सफाई करवाते हों। लेकिन आपने बिना थके बिना मुंह बनाए मेरे साथ घर की सफाई भी करवाई और मुझे पूरी तरह से आराम देने की कोशिश की। आज मैं सबके सामने कहतीं हूं कि आप एक अच्छे पति, अच्छे इंसान और बहुत नेक दिल व्यक्ति हैं। मेरी जिंदगी में आने के लिए धन्यवाद।।” 

 यह सब सुनना और देखना बहुत सुखद था। उस दिन एहसास हुआ कि आपसी संबंधों की मजबूती के लिए शारीरिक संबंध ही अनिवार्य नहीं, बल्कि आप एक दूसरे को कितना समझ पा रहे हैं, आप लोगों के बीच में कितनी अंतरंगता है, जिसे आप इंटिमेसी कहते हैं, जरूरी है। आइए जानिए वे पांच प्रकार की अंतरंगता जो एक कपल के रिश्ते को मजबूत करने के लिए बहुत जरूरी है।

पति-पत्नी के प्रेम,आपसी समझ व विश्वास के साथ-साथ एक चीज़ बहुत अहम् होती है और वह है,अंतरंगता। हालाँकि अगर यह सोचा जाए कि शारीरिक संबंध बनाने से ही सिर्फ़ आपसी रिश्ते ही बेहतर होते हैं तो ये ग़लत होगा। इसे कुछ इस तरह समझा जा सकता है कि जैसे जैसे रिश्ता पुराना होता जाता है और उम्र बढ़ने लगती है तो,सेक्सुअल फ़्रीक्वेंसी कम हो सकती है। लेकिन इस दौरान अंतरंगता बढ़ सकती है।

एक्सपर्ट्स के अनुसार,अंतरंगता के प्रमुख रूप से पाँच प्रकार हैं

1-भावनात्मक अंतरंगता

जिसका अर्थ है भावनाओं और विचारों को साझा करना और एक भावनात्मक स्तर पर जुड़ना। ऐसा सम्बंध जिसमें प्यार और भोग दोनों के चाह हो। एक महान लड़ाई या तर्क के बाद भी, आप दोनों सामान्य रूप से बिना किसी परेशानी के एक दूसरे से बात करने के लिए तैयार रहना। अपने साथी और स्वयं को यह अभ्यास करने के लिए प्रेरित करने से आप दोनों फिर से एक दूसरे की सराहना करने लगेंगे। यह वरदानों को गिनने जैसा है । इस तरह का रिश्ता आपको मानसिक,शारीरिक और आत्मिक तीनों सुख देता है।

2-आध्यात्मिक अंतरंगता

ज़रूरी नहीं दोनों एक ही ईश्वर पर विश्वास करें। लेकिन दोनो पार्ट्नर अपनी भलाई के लिए सर्वशक्तिमान से प्रार्थना करते हों। उन्हें एक सुप्रीम पावर पर अटूट विश्वास हो।

3-बौद्धिक अंतरंगता

इस प्रकार की अंतरंगता में पार्ट्नर एक दूसरे की भावनाओं का सम्मान करते हैं और एकदूसरे की ज़रूरतों को समझते हैं। एक निर्णय गहन चर्चा के बाद लिया जाता है, जहां दोनों के मूल्य मायने रखते हैं। छोटे से विचार विमर्श के बाद,पार्ट्नर किसी ऐसे गम्भीर मुद्दे के बारे में निर्णय ले सकते हैं जो उन्हें मानसिक संतुष्टि देता है।

4-रचनात्मक अंतरंगता

जब पार्ट्नर को महसूस हो कि उन दोनो के बीच प्रेम घटने की कगार पर पहुँच रहा है तो ,समझ लीजिए कि,रचनात्मक अंतरंगता को खादपानी देने का समय आ गया है। अपने पार्ट्नर के साथ उन दिनो की यादें ताज़ा करें जब आप दोनो एक साथ प्यार और अपनेपन की भावनाओं को साझा किया करते थे। एक दूसरे की भावनाओं की क़द्र करें,प्रशंसा करें,और एकदूसरे को कुछ नया करने को प्रेरित करें। बीते हुए समय की यादें आपके वर्तमान और भविष्य को सुखद बना देंगी।

5-प्रयोगात्मक अंतरंगता

एक स्वस्थ रिश्ता हर समय बेड रूम में रहने से कहीं ज़्यादा महत्व रखता है। जिन लोगों के बीच रिश्ता अभी अभी बना है और वो दोनों इस रिश्ते को सहज रूप से आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं उनके लिए एक्सपेरिमेंटल इंटिमेंसी आश्चर्यजनकरूप से सही सिद्ध होती है। इस रिश्ते में दोनों पार्ट्नर्ज़ के शौक़,लक्ष्य,काम करने के तरीक़े सब एक समान होते हैं। आप दोनों अपना बाक़ी समय कैसे बिताते हैं। चाहे वो फ़िल्म देखना हो,स्टोरी बुक पढ़ना हो,एक साथ कोई गेम खेलना हो,सैर सपाटा या फिर ड्राइव पर ही जाना हो।

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