Overview: सेक्स पर बात ना करने से मैरिड लाइफ पर असर
अगर पति-पत्नी सेक्सुअल रिलेशन पर बात नहीं करते हैं तो इससे उनके रिश्ते पर गहरा असर पड़ता है।
Silence On Sex: शादी करने के बाद इंसान को एक ऐसा पार्टनर ताउम्र के लिए मिल जाता है, जिससे वह हर तरह की शेयरिंग कर सकता है। अमूमन पति-पत्नी घर से लेकर पैसे, काम व बच्चों से जुड़ी हर बात शेयर करते हैं। लेकिन अक्सर यह देखने में आता है कि सेक्स की बात पर वे चुप्पी साध लेते हैं। दोनों पार्टनर आपस में शारीरिक रूप से नजदीक तो आते हैं, लेकिन सेक्स पर बात करना उन्हें ठीक नहीं लगता। वे इसे एक टैबू के रूप में लेते हैं। उन्हें लगता है कि सब कुछ ठीक ही तो है, तो ऐसे में सेक्स पर बात करने की क्या जरूरत है। लेकिन जब इस मामले में चुप्पी बढ़ती जाती है, तो उसका असर सिर्फ बेडरूम तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे रिश्ते पर पड़ता है।
दोनों पार्टनर अपने रिश्ते को अलग-अलग तरीके से देखने लगते हैं और उनके मन में कई तरह के सवाल पैदा होने लगते हैं। और जब इन सवालों के जवाब नहीं मिलते, तो दिल के अंदर एक अनकही दूरी बनने लगती है। बाहर से सब कुछ नॉर्मल दिखता है, पर अंदर-अंदर इमोशन जमा होते रहते हैं। तो चलिए आज इस लेख में हम बात कर रहे हैं कि अगर पति-पत्नी सेक्स पर बात नहीं करते हैं, तो उनके रिश्ते पर किस तरह असर पड़ता है-
बढ़ने लगती हैं गलतफहमियां

जब दोनों पार्टनर आपस में सेक्स के मुद्दे पर बात नहीं करते हैं तो उनके रिश्ते में गलतफहमियां बढ़ने लगती है। चूंकि कोई कुछ कहता ही नहीं है तो एक पार्टनर को लगता है कि सब कुछ ठीक है। वहीं, दूसरा पार्टनर अपसेट या इग्नोर महसूस कर सकता है। जिसकी वजह से लोग कुछ भी सोचना शुरू कर देते हैं और ऐसे में गलतफहमियां बढ़ने लगती हैं।
आत्मविश्वास हो सकता है कमजोर
समय के साथ हमेशा चीजें बदलती रहती हैं और यह काफी हद तक संभव है कि कपल्स शादी के कुछ सालों बाद पहले की तरह हर दिन इंटीमेट ना हो। लेकिन वे आपस में इस मुद्दे पर बात नहीं करते हैं, जिसकी वजह से एक पार्टनर का आत्मविश्वास डगमगा सकता है। हो सकता है कि उसके मन में यह विचार पैदा होने लगे कि अब वह उतना आकर्षक नहीं है और इसलिए पार्टनर पहले की तरह करीब नहीं आता है या फिर वह मिरर में खुद को देखकर जज करना शुरू कर दे।
दबती रहती हैं इच्छाएं

जब पार्टनर आपस में सेक्स पर बात नहीं करते हैं तो ऐसे में वे अपनी इच्छाओं व उम्मीदों को मन में ही दबाकर रखते हैं। लगातार ऐसा होने की वजह से मन में निराशा पैदा होती है और फिर छोटी-छोटी बातों पर झुंझलाहट बढ़ती है। बात कहीं और से शुरू होकर सेक्स पर ही आकर रुकती है। ऐसे में असली मुद्दे का पता तब चलता है, जब चीजें बहुत अधिक बिगड़ चुकी होती हैं।
