कम उम्र में हेयर कलर से होते हैं बहुत से नुक़सान
कुछ ये सोचकर डिसाइड नहीं कर पाते हैं की हेयर कलरिंग किस उम्र के बाद करना ज्यादा ठीक रहता है?
Hair Colouring Tips: कभी फैशन, कभी जरुरत तो कभी ट्रेंड में रहने के लिए बहुत से लोग अच्छे खासे पैसे खर्च कर के बालों में कलर करवाते हैं। कुछ ऐसे लोग भी होते हैं, जो कलर करवाना तो चाहते हैं, लेकिन हेयर कलरिंग के बारे में बहुत सी बातें सुनने के बाद डरते हैं। उन्हें लगता है कि कहीं ये कलर, उन्हें नुक़सान ना पहुंचा दे। कुछ ये सोचकर डिसाइड नहीं कर पाते हैं कि हेयर कलरिंग किस उम्र के बाद करना ज्यादा ठीक रहता है।

वैसे तो हेयर कलॉरिंग के लिए कोई तयशुदा उम्र नहीं है, लेकिन फिर भी अगर कोई करवाना ही चाहता है, तो कम से कम 16 साल की उम्र के बाद ही हेयरकलरिंग शुरू करनी चाहिए। ज्यादा छोटी उम्र में बाल कलर करवाने से आपको कई तरह की परेशानियां हो सकती है। आइये जानते हैं कि ऐसी कौन कौन सी समस्याएं हैं, जिनकी वजह से हमें एक सही उम्र में ही हेयर कलर के बारे सोचना चाहिए |
बालों का झड़ना

लगातार कलर कराते रहने से बाल रूखे और बेजान हो जाते हैं। 16 की उम्र तक आते-आते टीनएजर्स थोड़े से मैच्योर होने लगते हैं। उस समय वो अपने फैसले खुद लेना पसंद करने लगते हैं, खुद पर ध्यान देना शुरू कर देते हैं, अगर इस उम्र के बाद वो हेयर कलरिंग के बारे में सोचेंगे, तो अपने हिसाब से अपने बालों का ख्याल रख पाएंगे और कलर्ड बालों की जितनी केयर की जाती है बालों के झड़ने का खतरा उतना ही कम होता है। बेहतर होगा कि 16 की उम्र के बाद ही कलर करें या उसके बाद भी आपको लग रहा है कि अभी आप इससे कंफर्टेबल नहीं है, तो कतई न कराएं।
सिरदर्द और आँखों में जलन

किसी भी हेयर कलर में काफी ज्यादा स्ट्रॉन्ग मिकल्स मिक्स होते हैं, जिनकी वजह से ही ये रंग बालों में काफी दिनों तक बना रहता है। कम उम्र में अगर आप कलर करना स्टार्ट कर देते हैं तो आपकी आँखों पर काफी बुरा असर पड़ता है, जिसकी वजह से आंखों में जलन सिरदर्द जैसी परेशानियाँ होने लगती हैं। वैसे भी तो किसी भी उम्र के इंसान के लिए ये केमिकल वाले कलर अच्छे नहीं हैं, पर फिर भी जब तक आप इनसे बच सकते हैं इन्हें अवॉयड कीजिये। अपनी आँखों को स्वस्थ बनाये राखिए।
स्किन इन्फेक्शन

किसी भी तरह के केमिकल प्रोडक्ट्स का लगातार यूज़ करने से स्किन में इन्फेक्शन होने का डर बना रहता है। अपनी स्किन टाइप को ध्यान में रखते हुए ही कोई भी कलर चूज़ करें और किसी भी तरह का कलर करने से पहले स्ट्रैंड टेस्ट, पैच टेस्ट और सेंस्टिविटी टेस्ट करना बेकार का काम न समझें। इस से आपकी स्किन की सेंस्टिविटी का पता चलता है।
