Income Increasing Tips
Income Increasing Tips Credit: istock

Income Tax Return – देश में रहने वाले व्‍यक्ति, चाहे वह पुरुष हो या महिला को अपनी आय की जानकारी सरकार को देनी होती है। हर साल नौकरी करने वाले, अपना खुद का कारोबार करने वाले व्‍यक्तियों को इनकम टैक्‍स रिटर्न फाइल करना होता है। इनकम टैक्‍स भरने का सही तरीका पता हो तो इसे आप बिना किसी विशेषज्ञ की मदद के खुद ही आसानी से भर सकते हैं।

इनकम टैक्‍स रिटर्न फाइल में अगर कोई गलती हो जाती है, तो इसके लिए आपको नोटिस भी मिल सकता है। इसलिए इनकम टैक्‍स रिटर्न फाइल करने का सही तरीका और जरूरी दस्‍तावेजों की जानकारी होना बहुत जरूरी है।

किसे भरना होता है रिटर्न

इनकम टैक्‍स
Who Fill the income tax Form

अगर आपकी सालाना कुल कमाई 2.5 लाख रुपए से अधिक है तब आपको इनकम टैक्‍स रिटर्न फाइल करना जरूरी है। पुरुष और महिला दोनों के लिए वार्षिक 2.5 लाख रुपए की आय पर कोई टैक्‍स नहीं लगता है। सरकार ने कमाई के अनुसार कई टैक्‍स स्‍लैब बनाए हैं। आपकी सालाना कमाई जितनी होगी, उस टैक्‍स स्‍लैब के हिसाब से आपको टैक्‍स भरना होगा।

अलग-अलग होते हैं टैक्‍स फॉर्म

इनकम टैक्‍स
Different Income Tax Form

इनकम टैक्‍स रिटर्न फाइल करने के लिए अलग-अलग तरह के कुल सात फॉर्म होते हैं। इसलिए यह जानना भी जरूरी है कि आपके लिए कौन-सा फॉर्म है। आईटीआर-1 फॉर्म उन लोगों के लिए जो वेतन, पेंशन, हाउस प्रॉपर्टी, ब्‍याज या अन्‍य तरीकों से कमाई करते हैं और कुल आय 50 लाख रुपए तक है। आईटीआर-2 उन व्‍यक्तियों के लिए है, जिनको बिना किसी बिजनेस या पेशे से आय प्राप्‍त होती है। आईटीआर-3 उन व्‍यक्तियों के लिए जिनको किसी व्‍यवसाय या पेशे से आय होती है।

आईटीआर-4 उन लोगों के लिए जिनको व्‍यवसाय या पेशे से अनुमानित आय प्राप्‍त होती है। आईटीआर-5 इंजीविजुअल, एचयूएफ, कंपनी और फॉर्म-7 भरने वालों के अलावा अन्‍य सभी के लिए है। आईटीआर-6 उन कंपनियों के लिए है जो इनकम टैक्‍स कानून की धारा 11 के तहत छूट का दावा नहीं करते हैं। आईटीआर-7 फॉर्म उन व्‍यवसाय और लोगों के लिए जिन्‍हें धारा 139(4ए), धारा 139(4बी), धारा 139(4सी), धारा 139 (4डी), धारा 139 (4ई) या 139 (4एफ) के तहत टैक्‍स रिटर्न फाइल करना जरूरी है।

रिटर्न फाइल करने के लिए जरूरी दस्‍तावेज

इनकम टैक्‍स
Important Documents of Income Tax

इनकम टैक्‍स रिटर्न फाइल करने के लिए कई तरह के दस्‍तावेजों की आवश्‍यकता होती है, जिनकी जानकारी निम्‍नलिखित है:

-पैन कार्ड

-आधार नंबर

-बैंक स्‍टेटमेंट

-बैंक या पोस्‍ट ऑफ‍िस का ब्‍याज सर्टिफ‍िकेट

-बचत या निवेश का प्रमाणपत्र

-फॉर्म-16 (नौकरीपेशा के लिए)

-टीडीएस सर्टिफ‍िकेट

– फॉर्म 26एएस

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टीडीएस या टीसीएस की करें सही जांच

इनकम टैक्‍स रिटर्न फाइल करने से पहले 26एएस फॉर्म जरूर चेक करें। इस फॉर्म में आपके टैक्‍स की पूरी जानकारी होती है। इस फॉर्म में जो टैक्‍स डिटेल दी गई है, वो सही है या नहीं इसे देखना जरूरी होता है। अगर इसमें दर्ज कोई जानकारी गलत लग रही है तो आप उसे सही करवा सकते हैं। इनकम टैक्‍स डिपार्टमेंट की वेबसाइट पर ये फॉर्म उपलब्‍ध होता है।

इसके लिए आपको अपना लॉगिन आईडी और पासवर्ड बनाना होगा। यहीं से आप ऑनलाइन अपना इनकम टैक्‍स रिटर्न भी फाइल कर सकते हैं। 26एएस फॉर्म में कोई गलती में सुधार करवाने में 7 से 10 दिन का वक्‍त लगता है, इसलिए समय रहते इसकी जांच करना जरूरी है। 

एनुअल इंफोर्मेशन स्‍टेटमेंट भी देखें

इनकम टैक्‍स
Annual Information Statement

फॉर्म 26एएस को जांचने के बाद आपको इसका मिलान एनुअल इंफोर्मेशन स्‍टेटमेंट से भी करना चाहिए। एनुअल इंफोर्मेशन स्‍टेटमेंट में आपके द्वारा एक वित्‍त वर्ष में किए गए सभी लेन-देन की जानकारी दर्ज होती है। इसमें आपको कहां से कितनी आय हुई और आपने कहां कितना पैसा खर्च किया सब जानकारी होती है। अगर आपको लगता है कि इसमें कोई जानकारी छूट गई है तो इनकम टैक्‍स रिटर्न फाइल करते वक्‍त उसकी जानकारी देना आपका कर्तव्‍य है। 

बताएं क्रिप्‍टो से कमाई

नए इनकम टैक्‍स फॉर्म में डिजिटल वर्चुअल प्रॉपर्टी जैसे क्रिप्‍टोकरेंसी में आपने निवेश किया है और आपको इससे कमाई या नुकसान हुआ है तो अब इसकी जानकारी भी इनकम टैक्‍स डिपार्टमेंट को देनी होगी। इसकी जानकारी छुपाना भारी पड़ सकता है। क्रिप्‍टो पर सरकार ने 30 फीसदी टैक्‍स लगाने की घोषणा की है। इसलिए इनकम टैक्‍स विभाग की इस पर कड़ी नजर रहेगी।

बैंक जमा पर ब्‍याज को बताएं

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Interest Rate About Tax

ऐसा देखा गया है कि अधिकांश टैक्‍सपेयर्स अन्‍य स्रोतों से होने वाली आय की जानकारी इनकम टैक्‍स रिटर्न  में नहीं देते हैं। इसमें बैंक जमा पर मिलने वाला ब्‍याज भी शामिल है। अगर आपको बैंक डिपॉजिट या किसी अन्‍य योजना में जमा से ब्‍याज के रूप में आय हो रही है, तब इसकी जानकारी इनकम टैक्‍स रिटर्न में बताना जरूरी होता है। इसको लेकर अगर कोई कन्‍फ्यूजन है तो एनुअल इंफोर्मेशन स्‍टेटमेंट से इसके बारे में पता लगाया जा सकता है।

कैपिटल गेन स्‍टेटमेंट फॉर्म करें हासिल

आपने अगर शेयर बाजार या म्‍यूचुअल फंड में निवेश किया है तब आपको कैपिटल गेन स्‍टेटमेंट की भी जरूरत होगी। एक वित्‍त वर्ष में एक लाख रुपए से अधिक के लॉन्‍ग टर्म गेन पर 10 प्रतिशत टैक्‍स लगता है। वहीं शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन पर 15 प्रतिशत टैक्‍स लगता है। इस टैक्‍स की कैलकुलेशन कठिन होती है, इसलिए ब्रोकरेज फर्म खुद टैक्‍स कैलकुलेट करके स्‍टेटमेंट उपलब्‍ध कराते हैं। इनकम टैक्‍स रिटर्न फाइल करने से पहले ब्रोकर से कैपिटल गेन स्‍टेटमेंट जरूर हासिल कर लें, ताकि सही-सही जानकारी देना आसान हो।

विदेशी संपत्ति की भी दें जानकारी

इनकम टैक्‍स
Foreign Currency

अगर विदेश में आपकी कोई संपत्ति है और उससे आपको कोई आय प्राप्‍त हुई है, तो इसकी जानकारी भी इनकम टैक्‍स रिटर्न में देना जरूरी होता है। अगर विदेश में किसी बैंक में आपने पैसे जमा कर रखें हैं तो उसकी जानकारी भी देनी होगी। इन चीजों को छिपाने पर आपको कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। क्‍योंकि इस समय सरकार कालेधन के खिलाफ बहुत सख्‍त कदम उठा रही है और दुनियाभर से भारतीयों की संपत्ति की जानकारी जुटा रही है। 

पूंजीगत हानि-लाभ की दें जानकारी

रिटर्न फाइल करने का मतलब केवल आय की जानकारी देना नहीं है, बल्कि आपको अपने नुकसान का ब्‍योरा भी देना होता है। कई बार व्‍यवसाय में हमें पूंजीगत हानी भी होती है, इसे  आप अपने रिटर्न में शामिल कर कैपिटल गेन से समायोजित कर सकते हैं। इस नुकसान को आप आगे वर्षों के लिए कैरी फॉरवर्ड भी कर सकते हैं। आप आगामी 8 सालों में कभी भी कैपिटन गेन टैक्‍स के साथ इस नुकसान को समायोजित कर सकते हैं।

छूट लाभ लेने के लिए न दें गलत जानकारी

इनकम टैक्‍स रिटर्न फाइल करना है जरूरी
Fill correct Income Tax Form

कई बार देखा गया है कि लोग टैक्‍स बचाने के लिए गलत या अधूरी जानकारी अपने इनकम टैक्‍स रिटर्न फाइल में भरते हैं। राजस्‍व चोरी रोकने और करदाताओं का आधार बढ़ाने के लिए इनकम टैक्‍स विभाग नई-नई तकनीकों जैसे आर्टिफ‍िशियल इंटेलीजेंस और बिग डाटा एनालिटिक्‍स आदि का उपयोग कर रहा है। इससे उसके पास हर आयकरदाता की लगभग सभी वित्‍तीय जानकारी पहले से मौजूद होती है। इसलिए इनकम टैक्‍स रिटर्न में कोई भी गलत जानकारी देने से बचें, क्‍योंकि अगर चोरी पकड़ी गई तो भारी जुर्माना भरना पड़ सकता है।

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