googlenews
गुरु नानक देव

दुनियाभर में कार्तिक पूर्णिमा के दिन को श्री गुरु नानक देव जी के प्रकाश उत्सव के तौर पर मनाया जाता है। सिख्खों के पहले गुरु श्री गुरु नानक देव जी की पैदाइश 1469 में रावी नदी के किनारे स्थित तलवंडी नामक गाँव में हुई। बचपन से ही वे अपना अधिकतर समय आध्यात्मिक चिन्तन और सत्संग में व्यतीत करने लगे। उन्होंने लोगों को हमेशा अच्छा और सच्चा जीवन जीने के लिए प्रेरित किया और जीवन में आगे बढ़ने के लाइफ मैनेजमेंट के खास फंडे भी दिए, जो निम्न हैं।

अगर आपका शरीर गंदगी से मैला होता है, तो हम उसे पानी और साबुन से साफ करने का प्रयास करते हैं। मगर जब आपका मन मैला होता है या किसी के प्रति धोखा और ईर्ष्या का भाव आपके अंदर पैदा हो जाता है, तो ऐसे में अपने अपवित्र मन को ईश्वर के गुणगान और सिमरन जाप से स्वच्छ किया जा सकता है।

समस्त संसार दुखों और तकलीफों से घिरा हुआ है। ऐसे में जिसे खुद पर भरोसा है, वही विजेता कहलाता है। बाबा नानक जी ने हमेशा मानव को अपने आप पर विश्वास रखने के लिए प्रेरित किया। गुरु नानक जी के के मुताबिक जिस व्यक्ति को खुद पर विश्वास नहीं है वो कभी ईश्वर पर भी पूर्णरूप से विश्वास नहीं कर सकता।

गुरु नानक देव जी ने लोगों को नेक राह पर चलकर अपना कार्य ईमानदारी से करने की शिक्षा दी है। साथ ही उन्होंने मनुष्य के जीवन से काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार नाम के इन पांच विकारों यां शत्रुओं को बाहर निकालने पर ज़ोर दिया।

गुरु नानक देव जी ने हमेशा दीन दुखियों की मदद की और जरूरतमंदों का सहारा बने। उनके अनुसार जो व्यक्ति अपार धन संपदा होने के बावजूद कभी गरीबों की मदद के लिए आगे नहीं बढ़े, ऐसे व्यक्ति का धन पूरी तरह से व्यर्थ है।

हमें खुद को सभी धर्मों, सभी जातियों और रंगभेद से परे रखकर एक सच्चे मनुष्य की तरह व्यवहार करना होगा, जो गुरु के एक स्वरूप की आराधना में ही हर वक्त लीन रहता है। खुद को जातिवाद और ऊंच-नीच के भेद के चक्रव्यूह में फंसाकर इंसान उस परमपिता परमात्मा के सिमरन और भक्ति में लीन नहीं रह सकता।

गुरु नानक जी के अनुसार, आपने जो बीज बोया है, वैसी ही फसल आपको प्राप्त होगी। इसका अर्थ ये है कि जीवन में आप जैसा व्यवहार और आचरण दूसरों के प्रति रखते हैं, वैसा ही आपको भी मिलेगा। अगर आपने हमेशा दूसरों की मदद की है, तो आपको भी बदले में वैसा ही फल प्राप्त होगा और अगर आपने दूसरों के साथ धोखा और ठगी करके पैसा कमाया है, तो आगे आने वाले वक्त में इसका दुष्परिणाम जरूर आपके सामने आएगा।

हमेशा कम बोलें और अगर बोलना बेहद जरूरी है, तो हमेशा मीठी वाणी का ही इस्तेमाल करें जिससे किसी का दिल न दुखे। बाबा नान देव जी की शिक्षा के मुताबिक मनुष्य को केवल वही बात कहनी चाहिए, जिससे उसका सम्मान बढ़े। व्यर्थ की बात करने से बचना चाहिए। 

Leave a comment