भारतीय संस्कृति में गुरु का होना न केवल गर्व की बात थी वरन् गुरु का होना अनिवार्य भी था। जिसके पास गुरु नहीं होते थे उन्हें निम्न दृष्टि से देखा जाता था और उन्हें अनाथ, दरिद्र और अभागा समझा जाता था। संस्कृत में अनाथ उनको कहा जाता है जिनके गुरु नहीं होते हैं। गुरु तत्त्व […]
Author Archives: Shweta Rakesh
गुरु एक सेतु है, एक संभावना है -सद्गुरु
दुनिया में अगर कोई वास्तव में ईश्वर रहित संस्कृति है, तो वह भारत की संस्कृति है। यह एकमात्र ऐसी जगह है जहां इस बात को लेकर कोई एक मान्यता नहीं है कि ईश्वर क्या है। अगर आप अपने पिता को ईश्वर की तरह देखने लगें, तो आप उनके सामने ही सिर नवा सकते हैं। अगर […]
ईश्वर से संपर्क का सूत्र है गुरु – परमहंस योगानंद
प्रत्येक संत जो इस पृथ्वी पर आया है उसने ईश्वर की समस्त मानवीय संतानों के आध्यात्मिक उत्थान के लिए ईश्वर की इच्छा पूर्ति हेतु योगदान दिया है। महान संत दो उद्देश्यों से आते हैं। अनेक लोगों अथवा कुछ लोगों को प्रेरित एवं प्रबुद्ध करने के लिए और उन शिष्यों को प्रशिक्षण देने के लिए, जो […]
शिष्य वही जो गुरु की इच्छा जानें – स्वामी चिन्मयानन्द
शांत मन:स्थिति में, सन्मार्ग पर प्रवर्तित करने वाले शास्त्रों में गुरुओं के द्वारा कहे गये पवित्र उपदेशों का स्मरण करके, हमारे मन में उठने वाली संकल्प-विकल्प वाली वृत्तियां शांत हो जाती हैं। शास्त्र तथा आर्य संस्कृति की नैतिकता के अनुसार शिष्य या पुत्र की, गुरु या पिता के प्रति सेवा वृत्ति अखंड होनी चाहिए। गुरु […]
गुरु के बिना जीवन निरर्थक है – मुनिश्री तरुणसागरजी
किसी ने पूछा- गुरु क्यों जरूरी है? मैंने प्रति प्रश्न किया- मां क्यों जरूरी है? वे बोले- मां न हो तो हम संसार में नहीं आ सकते। मैंने कहा- गुरु न हो तो हम मुक्त नहीं हो सकते। गुरु का मतलब फैमिली- डॉक्टर। गुरु मन की चिकित्सा करता है। शिष्य के लिए गुरु का द्वार […]
सपने साकार होंगे
आपकी हर मंशा पूरी होगी बशर्ते कि पहले आप सुलझी हुई मति से चुनाव कर पाएं कि आपको क्या चाहिए। फिर उसे पाने के लिए दृढ़ संकल्प चाहिए। यदि मैं आप लोगों से पूछूं तो बहुतेरे लोग सकारात्मक ढंग से नहीं बता पाएंगे कि उन्हें क्या चाहिए, हालांकि यह जरूर बता सकते हैं कि क्या […]
प्रतिबद्ध बनो, प्रतिभाशाली बनो
सेवा के लिए प्रतिबद्धता ही संसार में हमारा सर्वप्रथम और प्रमुख ध्येय है। यदि तुम्हारे जीवन में भय या उलझन है, तो यह तुम्हारे प्रतिबद्धता के अभाव के कारण। यदि तुम्हारे जीवन में अस्त व्यस्तता है, तो संकल्प के अभाव के कारण। केवल यह विचार, ‘मैं यहां संसार में सेवा के लिए ही हूं’, ‘मैं’ […]
आस्था एवं संस्कृति को संजोते भारत के तीर्थ
पूरे भारत में रहन-सहन, खान-पान, आचार-विचार और भाषा के कारण विभिन्नता और विविधता पाई जाती है। इसी अंतर को तीर्थ की महत्ता ने मिटाया है। तीर्थभूमि के दर्शनों का संस्कार ही भारत के कोने-कोने में बसे भारतीयों को अपनी ओर खींचता है। इस प्रकार तीर्थ सांस्कृतिक एकता का जीता-जागता उदाहरण बन जाते हैं। यदि दक्षिणेश्वर […]
मां दुर्गा के नौ रूपों की आराधना
या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।। नवरात्रि यानि नौ रात्रियां, जिन्हें मां जगदम्बा के नौ रूपों की आराधना का श्रेष्ठï समय माना जाता है। नौ दिनों में तीन देवियों महालक्ष्मी, सरस्वती देवी व मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा होती है जिन्हें ‘नवदुर्गा’ भी कहते हैं। ये नौ देवियां […]
पहचानें खाद्य पदार्थों में मिलावट
मिलावट का असर सीधा हमारी सेहत पर पड़ता है लेकिन अब खाद्य पदार्थों को शुद्ध रूप से प्राप्त करना आज के युग में एक स्वप्न बनता जा रहा है। मिलावट के कारण अधिकांश लोग एलर्जी, एक्जीमा, पैरालिसिस (पक्षाघात) जैसी जानलेवा बीमारियों की गिरफ्त में आ रहे हैं। मिलावट की वजह से कैंसर होने तथा नेत्र […]
