दिन की शुरूआत लोग अमूमन एक कप गर्म चाय या कॉफी से करते हैं क्योंकि आलस्य भगाने के लिए ये पेय पदार्थ कारगर माने जाते हैं साथ ही कुछ गर्म-गर्म पीने की तलब भी पूरी हो जाती है लेकिन खाली पेट चाय-कॉफी नुकसानदायक है, कई बार इससे एसिडिटी की समस्या भी होती है। हममें से […]
Author Archives: Shweta Rakesh
बर्तन भी हैं स्वास्थ्य का आधार
सामान्यत: रसोईघर में स्टील, पीतल, कांसे, कांच, एल्युमिनियम, लोहे व प्लास्टिक, तकरीबन सब तरह की धातु के बर्तन उपलब्ध होते हैं। यह भी सच है कि बर्तन गर्म होने पर, मसाले भूनने पर या कोई भी खट्टे पदार्थ बनाने पर किसी न किसी रासायनिक प्रक्रिया से अवश्य गुजरते हैं जिसका असर भोजन पर होता है […]
रूप-लावण्य के प्रति सजगता भी जरूरी
सौन्दर्य आपके अन्दर से शुरू होता है। आप क्या खाते हैं, कितनी कसरत करते हैं, कितना आराम करते हैं, इसका आपकी त्वचा की कान्ति और बालों की चमक पर जितना असर होता है, उतना संभवत: किसी और वस्तु का नहीं। इसलिए सुबह की ताजा, स्वच्छ हवा में तीव्रगति से खूब पैदल चलें और जब भी […]
स्वस्थ रहना है तो पीते रहिए पानी
जितना कार्य उतना जल, यानि जो व्यक्ति जितना ज्यादा क्रियाशील होता, उसे उसी मात्रा में जल की जरूरत पड़ती है। अगर हम आधा गिलास पानी पीते हैं तो शरीर को 100 कैलोरी ऊर्जा मिलती है, यानि एक गिलास पानी पीने पर शरीर में 200 कैलोरी ऊर्जा का संचार होता है।
वर्षा ऋतु में कैसे रहें नीरोग
‘आदमी दुर्बल देहे, पक्ता भर्वात दुर्बल। स वर्षा स्वनिलदी नां, दूषणै बाध्यते पुनः।।’
अर्थात् वर्षा ऋतु में मनुष्य का शारीरिक सामर्थ्य न्यून हो जाता है। जिसके वजह पाचन अग्निमंद हो जाती है। वातापि दोष कुपित हो जाते हैं परिणामस्वरुप अपच, गैस और पेट विकार पैदा हो जाते हैं।
पर्यावरण है तो जीवन है
सन् 1972 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा आयोजित विश्व पर्यावरण सम्मेलन में वैश्विक स्तर पर पर्यावरण दिवस मनाने का निर्णय लिया गया। कारण स्पष्ट था -आधुनिक युग में बढ़ती आबादी , बेतरतीब पेड़ों की कटाई , जल प्रदूषण, औद्योगिक प्रदूषण आदि से जलवायु में तेजी से बदलाव और उससे हुए ग्लोबल वार्मिंग के […]
