Life Lesson: धन की लालसा आपको चैन से जीने नहीं देती। जरा सोचिए यदि आपसे थोड़ा-सा भी धन खो जाता है तो आपकी रातों की नींद उड़ जाती है और मन में हाय-हाय मची रहती है या अचानक कोई व्यक्ति आपको लाखों रुपये देने को तैयार हो जाए तो भी आपकी रातों की नींद उड़ […]
Author Archives: श्री श्री रविशंकर
क्रोध और चेतना
Conscious Anger: तुमसे क्रोध तभी होता है, जब तु हारी चेतना जाग्रत नहीं होती। अब ऐसा हो गया तो हो गया, बस भूल जाओ अब। बात खत्म। अब, इस समय, इस वर्तमान क्षण में रहो, जाग्रत हो जाओ। विनम्रता हमारी आत्मा की पूर्णता का द्योतक है। क्रोध तो तु हारे चैतन्य की एक विकृति मात्र […]
त्याग का महत्त्व: Sacrifice Importance
Sacrifice Importance: त्याग शब्द का अर्थ बहुत समय से बहुत ही गलत समझा गया है। इस शब्द को बहुत ही तोड़ा-मरोड़ा गया है। लोग त्याग से जीवन की खुशियों से दूर हो जाने का अर्थ लेने लगते हैं और इस शब्द से ही डर जाते हैं । त्याग को हमने बहुत ही गलत समझा है। […]
भय का केंद्र बिंदु अहंकार है
Life Lesson: जब तुम सबको अपनी बुद्धि से परखना बंद कर देते हो, सबको प्रेम करने लगते हो, तब तुम्हारी आंखें द्वैत रूपी दोष से मुक्त हो जाती हैं। इसमें जागृति आती है। आलस्य, चिंताएं, असंतोष सब लुप्त हो जाते हैं। तुम अपने को ओजस्वी व केंन्द्रित महसूस करते हो। Also read: आंखें दिखेंगी दुगुनी […]
जीवन की घटनाओं को स्वप्न समझो: Spiritual Thoughts
Spiritual Thoughts: जिसे हम वास्तविकता कहते हैं, वह तो एक स्वप्न है, यह बात समझ में आना ही ‘ज्ञान है। एक रूपान्तरण घटता है और तुम्हारी चेतना जागरण, स्वप्न और सुषुप्ति के सामान्य स्तर से परे खड़ी हो जाती है और साक्षी भाव पनपने लगता है। सपनों को सच मानना अज्ञान है। सच को भी […]
साधना से परिवर्तन: Spiritual Thoughts
Spiritual Thoughts: जब किसी व्यक्ति को उदासी और खेद में घिरा पाओ तो समझना कि उसका रजस बढ़ गया है। जब तुम कुछ इन तीनों गुणों का खेल समझ कर देखोगे, तब तुममें व्यक्तियों के प्रति करुणा जागृत होगी, क्रोध या आवेग नहीं हम सबके जीवन में इन तीन गुणों का उतार-चढ़ाव होता रहता है। […]
प्रतीक्षा स्वीकृति भाव बढ़ाती है: Life Lessons in Hindi
Life Lessons in Hindi: प्रतीक्षा भी दो प्रकार की होती है। एक है निराश मन से प्रतीक्षा करना और निराश होते ही जाना। दूसरी है प्रेम में प्रतीक्षा, जिसका हर क्षण उत्साह और उल्लास से भरा रहता है। ऐसी प्रतीक्षा अपने में ही एक उत्सव है, क्योंकि मिलन होते ही प्राप्ति का सुख समाप्त हो […]
जीवन एक खेल है
Our life is a game: अहंकार बहुत कटु और कठोर है। इस ‘मैं को प्रयास से नहीं बल्कि दृष्टा बनकर विलीन कर सकते हैं। यदि अहं को मिटाने का प्रयास करें तो यह उतना ही दृढ़ हो जाता है। बहुत से लोग अहं को मिटाने का या उसे दूर करने का उपदेश देते हैं। यह […]
बुद्घत्व का मूलमंत्र है धैर्य – श्री श्री रविशंकर
प्रतीक्षा भी दो प्रकार की होती है। एक है निराश मन से प्रतीक्षा करना और निराश होते ही जाना। दूसरी है प्रेम में प्रतीक्षा, जिसका हर क्षण उत्साह और उल्लास से भरा रहता है। ऐसी प्रतीक्षा अपने में ही एक उत्सव है, क्योंकि मिलन होते ही प्राप्ति का सुख समाप्त हो जाता है।
वर्तमान क्षण में रहो – श्री श्री रविशंकर
संसार में जितना भी सृजनात्मक कार्य हुआ है, चाहे वह नृत्य के क्षेत्र में, संगीत में, ड्रामा या चित्रकला के क्षेत्र में, वह सब कुछ किसी अज्ञात शक्ति या केन्द्र से संचालित हुआ। बस सहज रूप से घट गया। तुम उसके कर्ता नहीं हो।
