धीरे-धीरे कुछ समय और बीता। अब निम्मा फागुन गाँव के चप्पे-चप्पे से परच गई थी और वहाँ की सब रीतियाँ और तौर-तरीके भी उसने सीख लिए। अब हरियाली तीज हो, कोई तिथि-त्योहार या फिर मुंडन और शादी-ब्याह जैसे खुशी के मौके, गाँव में गीत-संगीत के लिए लोग निम्मा परी को जरूर बुलाते। हर मौके पर […]
Author Archives: प्रकाश मनु
फागुन गाँव में मेला – फागुन गाँव की परी
फिर आया वसंत पंचमी का त्योहार, जिसका फागुन गाँव के लोगों को महीनों से इंतजार रहता। आखिर इसी दिन तो फागुन गाँव में बड़ा भारी मेला लगता था। गाँव के तालाब से लेकर बामन रेती और अहीरों के कछार तक। दूर-दूर के गाँवों से हजारों लोग आते और फागुन गाँव में जैसे मस्ती का सैलाब […]
कोई नई कहानी सुनाओ – फागुन गाँव की परी
निम्मा परी से मिलने के बाद सत्ते, बिट्टू और टुन्नू, तीनों को लगा, जैसे उनके पंख उग आए हैं। खुशी के मारे वे बावले से हो गए थे। तीनों सरपट दौड़े और बाहर खड़े दोस्तों के बीच जाकर बोले, “अरे भई, सुनो, सुनो। हम लोग पता नहीं, क्या-क्या सोच रहे थे। पर निम्मा परी तो […]
अम्मां, आज फुलके मैं सेंकूँगी – फागुन गाँव की परी
अब तो निम्मा परी बुधना के घर ही ठहर गई। धीरे-धीरे घर के सारे काम उसने सीख लिए। आटा मलना, चूल्हा जलाना। नदी से पीने के लिए घड़े भर-भरकर पानी लाना। रसोई और घर के कामों में अम्माँ की मदद करके उसे बहुत अच्छा लगता। यहाँ तक कि अम्माँ जी से दाल-सब्जी छोंकना भी उसने […]
बुधना की झोंपड़ी में – फागुन गाँव की परी
आखिर बुधना निम्मा परी को अपने साथ घर ले आया। बोला, “अम्माँ, आज रात ये यहीं रुकेंगी। कहती हैं कि तुम्हारी अम्माँ के हाथ की मोटी-मोटी रोटियाँ खाकर देखूँगी, कैसी लगती हैं?” सुनते ही बुढ़िया की पोपली हँसी दूर तक बिखर गई। बोली, “मैं ऐसी रोटियाँ थोड़े ही खिलाऊँगी इसे, जैसी हम खाते हैं। ऐसी […]
मैं तुम्हारे साथ चलूँगी – फागुन गाँव की परी
अब तो सारे गाँव में पता चल गया कि एक बड़ी सुंदर अनोखी मैम आई है, जिसने बुधना के साथ मिलकर सारे दिन ईंटें ढोई हैं। यहाँ तक कि आसपास के गाँवो तक भी खबर चली गई। लोग हैरान होकर जानना चाहते थे कि कौन है यह निम्मा परी? क्या सचमुच परी ही है, या […]
फागुन गाँव का बुधना – फागुन गाँव की परी
कुछ देर तो निम्मा परी यों ही विमूढ़-सी खड़ी रही। फिर आसपास के दृश्यों का नजारा लेते हुए, घूमने निकल पड़ी। नदी के किनारे लाल-पीले वनफूलों की झाड़ियाँ ही झाड़ियाँ थीं। खिलखिलाकर हँसती, बड़ी शरारती झाड़ियाँ। कुछ दूर आम, अमरूद, जामुन और शिरीष के पेड़ों की कतारें ही कतारें। बीच में एक टेढ़ी-मेढ़ी, पतली सी […]
जब निम्मा आई धरती पर – फागुन गाँव की परी
बात आज से कोई तीस बरस पुरानी है। या शायद इससे भी कुछ पुरानी हो, क्योंकि पुरानी बातों में कभी-कभी पंख लग जाते हैं और उनका कुछ ओर-छोर पता नहीं चलता। तो खैर, असल बात तो निम्मा परी की ही चल रही है ना! सुनाता हूँ, सुना ही देता हूँ वह कहानी।… हुआ यह कि […]
कैसी है यह अनोखी परी! – फागुन गाँव की परी
फागुन गाँव की निम्मा परी को भला कौन नहीं जानता? वह रोज हाथों में खुरपी और फावड़ा लिए, बुधना के साथ खेतों में काम करने जाती है। गाँव के बच्चे-बड़े किसी से भी पूछो, वह प्यार से निम्मा परी की ओर इशारा करके बता देगा, “देखो, देखो, वह रही निम्मा परी। अपने पति बुधना के […]
सब्जीपुर जिंदाबाद…! – सब्जियों का मेला
नाश्ते-पानी के बाद फिर से सम्मेलन शुरू हुआ तो विशाल मंच पर अपने ऊँचे सिंहासन पर मुग्ध भाव से हँसते-मुसकराते बैंगन राजा नजर आए। दोनों ओर चँवर ढुलाते सेवक और चोबदार। एक ओर महामंत्री आलूराम और अन्य प्रमुख दरबारी बैठे थे और सामने ठाठें मारती सब्जीपुर की उत्सुक प्रजा। बैंगन राजा के आदेश पर महासम्मेलन […]
