गरीबी के दीदार के नीचे एक अमीर कलेजा धडक रहा था। जिस्म के प्यार से ज्यादा रूह का नाद जिसे अधिक प्यारा लग रहा था। ऐसे अमीरों के अमीर और अमीर बादशाह के नाम से प्रख्यात ओलिया अमीर बापू को भला कौन भूल सकता है? इतिहास उसकी ओर ध्यान दें, न दे लेकिन लोगों ने […]
Author Archives: नटवर हेडाऊ
लाखा पीर – 21 श्रेष्ठ लोक कथाएं गुजरात
किसी तपस्वी जोगी जैसे घटादार बरगद की छाया में आज वडवाई की तरह अपनी जटाएं फैला कर कोई जोगंदर बैठे थे। खीमाणा के लोग कुछ कुतूहल से जोगींद्र को देखकर फिर आगे बढ़ जाते थे। किसी ने गांव में जाकर बात की- “लगधीर भा! देवण वट के नीचे कोई जोगी बैठे हैं।” लखधीर सोंढो और […]
मानबाई और मानसरोवर – 21 श्रेष्ठ लोक कथाएं गुजरात
पालनपुर शहर की एक ओर लम्बी होकर पडी एक सडक आज मानसरोवर रोड के नाम से जानी जाती है। मानसरोवर रोड के किनारे पर एक सरोवर भी है। पालनपुर में मुस्लिम राज की स्थापना से लेकर अर्वाचीन युग तक इतिहास के अनेक आरोह-अवरोह का साक्षी यह सरोवर आज तो अपनी रौनक गंवा बैठा है। लेकिन […]
लखधीर सोंढो – 21 श्रेष्ठ लोक कथाएं गुजरात
खीमाणा गांव में मानो काला कहर हो गया। हरेक हिंदु बच्चा मारे डर के घर में छिप गया। हरेक मुहल्ले में हाथ में बंदूकें लिऐ सिंध से आये सिंधी खडे थे। वे हिंदुओं को मारना नहीं चाहते थे, घर भी नहीं लूटने थे लेकिन गायें ले जानी थी। हिंदु का धर्म जिसे पवित्र मानता है […]
तेरवाडा – 21 श्रेष्ठ लोक कथाएं गुजरात
तेरवाडा ब्रिटिशर के जमाने में एक अख्तियारी सिविल और फौजदारी हुकुमत वाला बारह गांव का तहसील था। वहां के जागीरदार यानी हमारा बहुत पुराना कबीला है। इतिहास के मुताबिक, हमारा कबीला मुस्लिम सिंध बलोच के मुसलमानों में उच्च जाति का कबीला था। अभी हमारे यहां मरण और परण में हिंदू रिवाजों के मुताबिक व्यवहार चलते […]
खून का गौरव – 21 श्रेष्ठ लोक कथाएं गुजरात
कच्छ की धरती पर जिन दिनों जुल्म का सिक्का चलने लगा था, उन दिनों ही कच्छ की धरती पर एक आकर्षक जमादार ने जन्म लिया। कच्छ की कांपती धरती को उस जवांमर्द फतेहमन्द ने स्थिर किया! जुल्मियों का जुल्म मिटा कर सिंहासन को स्थिर किया। फतेहमन्द की जवामर्दी पर सारा कच्छ उस समय मानों पागल […]
ईमानदारी – 21 श्रेष्ठ लोक कथाएं गुजरात
धाणधार प्रदेश में बह रही ऊमरदशी नदी। उसके दोनों ही किनारे हरे-भरे। यह ऊमरकाशी नदी पूर्व से आगे बढकर कुमारिका से मिलने कोलियारा में प्रवेश करती है। लेकिन पुल से थोडा आगे बढ़ने के बाद नदी सूखी पड जाती है। धाणधार के कांकण किनारे मां के आंचल में रहे बच्चे की तरह ऊमरदशी के सूखे […]
कलाई का कसबी – 21 श्रेष्ठ लोक कथाएं गुजरात
तांबे के जैसी धरती का मालिक वाघेला वंश का वारिस दियोदर की गद्दी पर राज कर रहा था। उस वक्त एक भाई धर्म के पीछे पागल बना था, जबकि दूसरा भाई कलाई का कसबी बनने में बल और कल के जोर से राजा की फरियाद और सुख-दुःख का साथी बन रहा था। इस धरती पर […]
खेता भक्त – 21 श्रेष्ठ लोक कथाएं गुजरात
एक ओर कच्छ का रेगिस्तान, दूसरी ओर बनासकांठा! ऐसी उभय सरहद, जिनके कलेजे में पिघल जाती है ऐसे मढुत्रा गांव के पास ही आशासरा नाम का तालाब है। इस तालाब के पास ही कच्छ के रेगिस्तान की गर्म हवा को झेलता हुआ ईश्वरा महादेव का एक बिना घुम्मट का प्राचीन शिवालय है। इस शिवालय में […]
धारातीर्थ – 21 श्रेष्ठ लोक कथाएं गुजरात
नरा गोहिल की कनपट्टियां सफेद बास्ता जैसी हो गई। आंखों में पीलापन दिखने लगा। और उसकी भंवर और सर में भी एक भी काला बाल खोजने से मिले, ऐसी स्थिति नहीं थी। फिर भी मौत अभी भी बारह योजन दूर थी। नरा चाइडिया के मन में एक ही बात का अफसोस रह गया था कि- […]
