Hindi Kahani: पितामह ब्रह्मा से जब ब्राह्मणों ने ऋषियों में श्रेष्ठ श्वेत मुनि की परम कथा को सुनना चाहा तो पितामह ने बताया कि श्वेत नामधारी मुनि गिरी गौहर में गिरकर निरन्तर निवास करने लगा। देवेश्वर की अभ्यर्थना और भक्ति से ‘नमस्ते रुद्र मंथये’ का जाप करते हुए महेश्वर का स्तवन करने लगा। उस मुनि […]
Author Archives: डॉ. विनय
बालक ध्रुव की कथा
Hindi Kahani: ऋषियों के द्वारा यह पूछे जाने पर कि ने किस प्रकार भगवान् विष्णु को प्रसन्न करके उनसे आशीर्वाद प्राप्त किया और ग्रहों के मध्य एक अटल नक्षत्र के रूप में प्रमुख स्थान पाया। सूत ने बताया कि-एक बार स्वयं उन्होंने मार्कण्डेय मुनि से यह चरित्र सुनने की इच्छा प्रकट की। तब मार्कण्डेय मुनि […]
राजा चन्द्रवश की कथा
Hindi Kahani: रवि के वंश में राजा त्रिधन्वा तथा ययाति के बाद चन्द्रवरा का वर्णन इस प्रकार है-राजा त्रिधन्वा ने अपने एक सहस्र अश्वमेध यज्ञों के फल से समस्त देवों का पूज्य होकर परम दृढ़ पद प्राप्त किया। उनका महान् बलवान पुत्र सत्यव्रत का विवाह विदर्भ कन्या से हुआ। उसके इस आचरण से राजा ने […]
महादेवी उमा की उत्पत्ति व दक्ष-यज्ञ के विध्वंस की कथा
Hindi Story: सूत जी ने महर्षियों की इच्छानुसार महादेवी उमा की उत्पत्ति , दक्ष-यज्ञ के विध्वंस की कथा संक्षेप में सुनाते हुए बताया कि दक्ष के यहां सती नाम धारिणी कन्या ने महादेव रुद्र को अपना पति स्वीकार किया । देवर्षि नारद के शाप से ग्रस्त महाराज दक्ष द्वारा शिव की अवज्ञा और अनादर के […]
रुधिर नामक राक्षस की कथा
Hindi Kahani: सूत जी ने एक आख्यान सुनाते हुए कहा कि पुराने समय में एक रुधिर नाम का राक्षस था । उसने एक बार वसिष्ठ मुनि के पुत्र शक्ति का भक्षण कर लिया था। यह राक्षस विश्वामित्र के द्वारा प्रेरित किया गया था। जब वसिष्ठ को यह ज्ञात हुआ कि उनका परम श्रेष्ठ तथा धर्मज्ञ […]
कालदेवी के उत्पन्न होने की कथा
Hindi kahani: कालदेवी को उत्पन्न करने के बाद त्र्यम्बक देव के चले जाने पर उपमन्यु ने अभ्यर्चना करके फल की प्राप्ति थी। किसी समय में बालक उपमन्यु ने अपने मामा के यहां थोड़ा-सा दुग्ध पान कर लिया था। पुनः उसको पान की इच्छा से उसने अपनी मां से जिद की। मां अपनी निर्धनता के कारण […]
लक्ष्मी की उत्पत्ति की कथा
Hindi kahani:लक्ष्मी की उत्पत्ति और उसके आवास के स्थलों तथा वास के योग्य स्थानों का निरूपण करते हुए सूत जी ने बताया कि प्रभु नारायण अनादि, श्रीमान तथा सबके धाता हैं। उन्होंने ही मोहन के लिए इस जगत् को दो रूप दिए। ब्राह्मण वेद और सनातन वेद के हाथों का तथा श्रेष्ठ पद्मा श्री का […]
