Summary: मां की अनदेखी का सच
प्रेगनेंसी में महिलाएं अक्सर दूसरों की ज़रूरतों को प्राथमिकता देकर अपनी सेहत, भावनाओं और आराम को नज़रअंदाज़ कर देती हैं।
Ignoring own needs during Pregnancy: भारतीय महिलाओं में त्याग, या कहा जाए खुद की अनदेखी को संस्कार से जोड़कर देखने की सामान्य प्रथा है, जो ज्यादातर महिलाओं में नजर आता है। महिलाओं की खुद की अनदेखी करना उनकी प्रेगनेंसी के दौरान भी बना रहता है। गर्भावस्था जो हर महिला के जीवन का सबसे खूबसूरत पल होता है, कई बार अपनी जरूरतो, घर की जिम्मेदारियों के बीच तनाव भरा हो जाता है। आईए जानते हैं इस लेख में आखिर महिलाएं क्यों गर्भावस्था के दौरान भी अपने आप को घर-परिवार से पीछे रखती हैं। क्या महिला का खुद की अनदेखी करना उनका त्याग है या तनाव का कारण आइए समझते हैं।
महिलाएं खुद को क्यों आखिर में क्यों रखती हैं
संस्कार: हमारे भारतीय समाज में स्त्री के शुरुआती परवरिश में ही यह सिखा दिया जाता है कि घर-परिवार की जरूरत का ख्याल रखना एक अच्छी बेटी और बहू दोनों का कार्य है। यही मानसिकता महिला के अंदर गर्भावस्था के दौरान भी बना रहता है।

अपराधबोध: महिला घर-परिवार संभालने का जो कार्य शुरू से कर रही होती है गर्भावस्था के दौरान अचानक उसे छोड़ना या टालना महिला को अपराधबोध से भर देता है। जैसे अगर मैं ज्यादा आराम करूंगी तो परिवार वाले मुझे अलसी ना समझे या मेरी तुलना किसी और से न करने लगें।
प्रेगनेंसी में खुद की जरूरत को ना समझने का असर
गर्भावस्था के दौरान जब महिला अपनी शारीरिक और मानसिक जरूरतो को अनदेखा करने का अर्थ अपना समर्पण समझ बैठती है तो इसका असर उसकी सेहत पर भी पड़ता है।
शारीरिक थकान: गर्भावस्था के दौरान अपने शरीर से पहले जैसा काम लेना महिला के शारीरिक थकान का कारण बनता है। लगातार अधिक काम और आराम की कमी महिला के कमर दर्द, पैरों में दर्द का कारण होता है। अपने खाने-पीने का ध्यान ना रखना महिला और होने वाले शिशु दोनों में पोषण की कमी का कारण होता है।
मानसिक थकान: अपने काम में किसी से मदद ना मांगना, महिला को अकेलेपन और तनाव की स्थिति में ला सकता है। महिला का खुद से हर वक्त यह कहना “मैं कर लूंगी” उसके अंदर के डर को बढ़ाने के साथ चिंता और अकेलेपन का कारण बनता है।
भावनात्मक स्तर पर: महिला का थके होने पर भी ऊर्जावान होने का अभिनय करना। बात करने की इच्छा होने पर भी चुप रहना। रोने का मन होने पर भी हंसना, खुद को हर वक्त मजबूत दिखाना महिला को भावनात्मक रूप से कमजोर और अकेला बनता है।
अपनी जरूरत को समझे, उसे हां कहें
महिला के लिए सिर्फ गर्भावस्था के दौरान ही नहीं आम दिनों में भी अपनी जरूरत को समझना और उसे हां कहना उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए जरूरी है।
खुद का ख्याल रखना स्वार्थ नहीं: गर्भवती महिला को यह समझना जरूरी है उनके अपने और आने वाले शिशु दोनों के स्वास्थ्य का ख्याल रखना जरूरी है। इससे भी ज्यादा महिला का यह समझना जरूरी है कि किसी भी व्यक्ति का खुद के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का ख्याल रखना स्वार्थ नहीं बल्कि उनका अधिकार है।
अपनी भावनाओं को कहना सीखे: अगर आप थकान, दर्द, डर या तनाव महसूस कर रही हैं तो उसे दबाने की बजाय अपने साथी और परिवार से कहें। कई बार स्थिति चुप रहने से बिगड़ी हैं। अपनी जरूरत को समझे, उसे अपनों से साझा करें। मदद मांगने में पीछे ना हटें।
