summary: प्रेगनेंसी में ओवरथिंकिंग का साइलेंट प्रेशर
प्रेगनेंसी में ओवरथिंकिंग दिमाग पर साइलेंट प्रेशर बनाकर मानसिक थकान बढ़ाती है। हॉर्मोनल बदलाव, डर, जिम्मेदारियां और सोशल मीडिया इसे और गहरा करते हैं।
Pregnancy and Anxiety: प्रेगनेंसी एक महिला में न सिर्फ शारीरिक बदलाव लाता है, बल्कि मानसिक बदलाव भी लाता है। जिसका असर महिला के दिमाग पर होता है। गर्भावस्था के दौरान लगातार महिला का अपनी प्रेगनेंसी, डिलीवरी के बाद वह कैसे सब संभालेगी, इसके बारे में सोचते रहना महिला के मानसिक थकान का कारण बनता है। आईए जानते हैं इस लेख में गर्भावस्था के दौरान किन कारणों की वजह से महिला के शरीर से पहले दिमाग तक जाता है।
गर्भावस्था में दिमाग के थकने का कारण
ओवरथिंकिंग: गर्भावस्था के दौरान महिला के शरीर में तेजी से एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का लेवल बढ़ जाता है। जिसका असर न सिर्फ शरीर पर, बल्कि महिला के मूड, नींद, सोने, चिंता के स्तर पर भी पड़ता है। जिसकी वजह से महिला हर छोटी बात पर भी अत्यधिक सोचती है।
महिला आने वाली जिम्मेदारियां, उसे कैसे संभालेगी, डिलीवरी नार्मल होगी या नहीं, बच्चा स्वस्थ तो होगा, इन सभी के बारे में भी सोच कर अपने दिमाग को थकाती है।
परिवार या दोस्तों में दूसरी महिलाओं में गर्भावस्था की मुश्किलें सुनकर भी महिला अधिक सोचती है। कहीं मेरे साथ भी तो ऐसा नहीं होगा वाला विचार उसके दिमाग में ही चलता रहता है।
वर्तमान समय में महिला अपनी हर छोटी तकलीफ के बारे में जानने के लिए इंटरनेट का प्रयोग करती है। गूगल द्वारा सुझाए गए लक्षणों में महिला सबसे वर्स्ट केस के बारे में सोच सोचकर अपने दिमाग को थका देती है।

दिमाग के लगातार थके रहने का शरीर पर असर
महिला के लगातार सोचते रहने से उसके शरीर की ज्यादा ऊर्जा का खपत दिमाग करता है। जिसकी वजह से महिला खुद को थका हुआ और नींद की कमी महसूस करती है।
ज्यादा सोचने से महिला को नींद सही से नहीं आता। सोते समय बार-बार नींद का खुलना या बुरे सपने आने जैसी परेशानी होती है।
दिमाग के लगातार सोचते रहने की वजह से गर्भवती महिला के दिल की धड़कनें भी बढ़ जाती हैं।
ओवरथिंकिंग महिला को पूरी तरह थका देता है जिसकी वजह से वह अधिक चिड़चिड़ा और तनाव महसूस करती है।
दिमाग का थकान महिला के पाचन क्रिया को भी प्रभावित करता है। जिस कारण महिला को अपच की समस्या होती है।
ओवरथिंकिंग की परेशानी अगर गर्भवती महिला में लगातार बनी रहने पर महिला में हाई ब्लड प्रेशर रिस्क बढ़ जाता है।
गर्भवती महिला ओवर थिंकिंग पर कैसे कंट्रोल पाए
ब्रेन डिटॉक्स रूल: ब्रेन डिटॉक्स रूल, इसके अंतर्गत दिन में 20 मिनट गर्भवती महिला एक शांत जगह पर अपनी आंखें बंद करके बैठे और अपने सांसों पर ध्यान लगाए। ध्यान की प्रक्रिया के दौरान आप हल्के संगीत या मेडिटेशन संगीत का प्रयोग कर सकते हैं। ऐसा करने से आपके दिमाग में लगातार चलने वाले विचारों की चेन टूटती है और दिमाग अपनी ऊर्जा को फिर से रिसेट कर पाता है।
टू -डू लिस्ट बनाएं: आपको क्या-क्या करना है इसे याद रखने में अपने आप को थकाने की बजाय उन्हें लिख लें। एक लिस्ट बनाएं कि आप सारे दिन में क्या करना चाहती हैं।
डिजिटल डिटॉक्स: सोशल मीडिया पर 30 मिनट से ज्यादा समय न बिताएं। अपने सवालों और परेशानियों के जवाब के लिए गूगल से ज्यादा अपने डॉक्टर पर भरोसा करें। नेगेटिव लोगों या उनकी कहानियों से दूरी बनाएं।
पार्टनर से बात करें: आप कैसा महसूस कर रही हैं, आपको क्या डर है या चिंता है, इसके बारे में अपने साथी से खुलकर बात करें।
गर्भावस्था के दौरान वॉक और हल्का योग या व्यायाम करना शारीरिक और मानसिक दोनों प्रकार से फायदेमंद है। गर्भावस्था के दौरान संतुलित आहार और भरपूर नींद ले।
