Summary: प्रेम की अनोखी भाषा
दो मूक-बधिर युवाओं मीरा और निशांत की यह कहानी दिखाती है कि प्यार आवाज़ से नहीं, एहसास से बोला जाता है। उनकी सांकेतिक भाषा धीरे-धीरे एक ऐसी प्रेमभाषा बन जाती है, जो दिलों को सीधे छू लेती है।
Hindi Love Story: सूरज हल्का-सा ढल रहा था, और शहर के बीचोंबीच बने साइलेंट हार्मनी इंस्टिट्यूट की दीवारें हल्के सुनहरे रंग में नहाई हुई थीं। इसी इंस्टिट्यूट में हर शाम सांकेतिक भाषा की क्लास लगती थी और यहीं पहली बार निशांत ने मीरा को देखा था।
मीरा की मुस्कान में कुछ ऐसा था, जैसे बिना आवाज़ के भी पूरी दुनिया गुनगुनाने लगे। निशांत खुद मूक-बधिर था, लेकिन उसके भीतर एक अलग ही दुनिया बसती थी कला, संगीत और रंगों की दुनिया। वह अक्सर अपनी स्केचबुक में ऐसे चेहरे बनाता, जिन्हें वह कभी बोलते नहीं सुन पाएगा, पर महसूस ज़रूर कर सकता था।
पहली क्लास के बाद जैसे ही बच्चे बाहर निकले, मीरा अपनी दुपट्टे को संभालते हुए ढलते सूरज की तरफ देख रही थी। तभी निशांत ने आगे बढ़कर अपनी किताब उसके सामने खोली। उसमें एक स्केच था खिड़की के पास खड़ी एक लड़की का, जिसके बाल हवा में उड़ रहे थे। मीरा ने चित्र देखा, फिर उसे… और उसकी आँखें चमक उठीं। उसने अपने हाथों से सांकेतिक भाषा में पूछा, “ये मैं हूँ?”
निशांत ने हल्की मुस्कान के साथ सिर हिलाया, “तुम्हें देखते ही ये बन गया।”
उस दिन के बाद उनका मिलना रोज़ का सिलसिला बन गया। वो दोनों बिना आवाज़ के बातें करते, बिना शब्दों के हँसते और बिना बोले एक-दूसरे को समझते। मीरा को नृत्य पसंद था। वह स्टेज पर नहीं, बल्कि पेड़ों की परछाइयों के बीच नाचती थी। निशांत अक्सर उसका नृत्य देखता और अपने मन में उसकी हर हलचल को रेखाओं में उतार देता। धीरे-धीरे, उनकी सांकेतिक भाषा प्यार की भाषा बन गई।
एक शाम मीरा ने निशांत को अपने साथ झील किनारे बुलाया। हवा में खामोशी थी, लेकिन वही खामोशी उनके लिए संगीत थी। मीरा ने आसमान में चमकते चाँद की ओर इशारा किया और अपने हाथों से कुछ कहा, “अगर प्यार आवाज़ों पर चलता, तो हम कभी मिल भी नहीं पाते।”
निशांत ने उसके हाथों को थामते हुए जवाब दिया, “प्यार दिल की धड़कनों से चलता है… और तुम्हारी धड़कन मेरी भाषा बन गई है।”
मीरा की आँखें नम हो गईं। उसने अपने अंगूठे से हवा में एक दिल बनाया। निशांत ने उस दिल को पकड़ने का अभिनय किया और अपनी जेब में डाल लिया। दोनों हँस पड़े..बिना आवाज़ के, लेकिन पूरी दुनिया सुन सकती थी कि वे खुश हैं।
समय बीतता गया और उनके दिलों ने एक ही लय में धड़कना सीख लिया। लेकिन जिंदगी हर कहानी में एक मोड़ जरूर डालती है। इंस्टिट्यूट में वार्षिक प्रस्तुति होने वाली थी, जिसमें मीरा एक डांस परफॉर्मेंस करना चाहती थी। वह चाहती थी कि निशांत उसके लिए बैकड्रॉप पेंट करे…एक ऐसा दृश्य जो उसकी कहानी को बयान कर सके।
निशांत ने कई दिन तक मेहनत की..पहाड़, झील, आसमान, पेड़… उसने सब कुछ पेंट किया। लेकिन आखिर में उसने कुछ ऐसा बनाया जिसने मीरा को रोक दिया..एक लड़की जो आंखें बंद करके नाच रही थी, और सामने खड़ा एक लड़का जो उसे देख रहा था, जैसे उसकी खुशियों से उसकी दुनिया रोशन हो रही हो।
प्रस्तुति की रात, मीरा ने वही पेंटिंग बैकग्राउंड में लगवाई। जैसे ही उसने नृत्य शुरू किया, हॉल में बैठे लोग मंत्रमुग्ध हो गए। उसकी हर हरकत, हर हंसी, हर मुड़ना… सब जैसे सांकेतिक भाषा की कविता बन गए।
नृत्य के अंत में मीरा ने दर्शकों की बजाय निशांत की ओर देखा। उसकी सांसें तेज थीं, पर आंखों में चमक थी। उसने मंच पर ही हाथों से कहा, “निशांत, तुम मेरे नृत्य का संगीत हो…”
निशांत की आंखें भर आईं। उसने हाथ उठाकर जवाब दिया, “और तुम मेरी दुनिया की आवाज़…”
हॉल तालियों से गूंज उठा, लेकिन उनके लिए तो सब खामोश ही था। वे दोनों मंच के बीचोंबीच आकर एक-दूसरे के सामने खड़े हुए। कोई शब्द नहीं, कोई धुन नहीं… बस दो दिल थे, जो एक ही भाषा बोलते थे प्रेम की अनोखी भाषा..।
