Overview: हार्मोनल बदलावों की वजह नहीं होती है सेक्स की इच्छा, जानिए
अगर आप अपने पार्टनर से दूर-दूर रहने लगी हैं तो यह हार्मोनल बदलावों की वजह से हो सकता है। जानिए इस लेख में।
Sex Drive and Hormonal Changes: महिला के लिए हर वक्त एक जैसा नहीं होता है। कभी ऐसा होता है कि आप बहुत खुश होती हैं तो कभी बेवजह उदासी का अहसास होता है। कभी-कभी आप हॉर्नी महसूस करती हैं तो कभी ऐसा लगता है कि पार्टनर से बहुत ज्यादा दूरी बना लें। मतलब एक पल तक तो सब रोमांटिक चल रहा था, और अगले ही पल बस गले लगकर सो जाने का मन करता है। अगर आपके साथ अक्सर ऐसा होता है तो आपको बिल्कुल भी घबराने की जरूरत नहीं है। अधिकतर महिलाओं के साथ ऐसा होता है और इसकी असली वजह होती है हमारे हार्मोन।
हमारे शरीर पर कई तरह के हार्मोन्स का असर होता है, जैसे एस्ट्रोजेन, प्रोजेस्टेरोन और टेस्टोस्टेरोन। जब ये हार्मोन शरीर में ऊपर-नीचे होते हैं, तो हमारे मूड, एनर्जी और सेक्स की इच्छा पर ही भी असर डालते हैं। हार्मोन्स में होने वाले ये उतार-चढ़ाव एकदम सामान्य है, पीरियड्स के दौरान, प्रेग्नेंसी में, बच्चे के जन्म के बाद या फिर मेनोपॉज़ के पास आते वक्त आपके साथ ऐसा हो सकता है। यह कुछ ऐसे वक्त होते हैं, जब आपको मूड स्विंग्स, थकान या दर्द का अहसास होता है और ऐसे में आपके लिए “सेक्सी” महसूस करना मुश्किल होता है। ऊपर से अगर आपको स्ट्रेस है या नींद की कमी या बर्थ कंट्रोल पिल्स का सेवन कर रही हैं तो आपकी स्थिति बद से बदतर हो सकती है। हालांकि, आपको बिल्कुल भी टेंशन लेने की जरूरत नहीं है, क्योंकि यह सब हमेशा के लिए नहीं होता। जब आप समझ जाती हैं कि हार्मोन्स आपकी इच्छा को कैसे प्रभावित करते हैं, तब आप इसे बदल भी सकती हैं। थोड़े से लाइफस्टाइल बदलाव, खुलकर बातचीत करने और सही देखभाल से आपका वही पुराना “स्पार्क” फिर से लौट सकता है और पहले से भी ज़्यादा मजबूत बन सकता है।
तो चलिए आज इस लेख में हम आपको बता रहे हैं कि हार्मोनल बदलाव आखिर किस तरह सेक्स ड्राइव को कम करते हैं और इसे नेचुरली वापस लाने के क्या तरीके हैं-
हार्मोन सेक्स ड्राइव को कंट्रोल करते हैं
हार्मोन हमारी सेक्स ड्राइव को कंट्रोल करते हैं और इसलिए जब ये बदलते हैं, तो हमारी चाहत भी बदल जाती है। ख़ासकर एस्ट्रोजन, प्रोजेस्टेरोन और टेस्टोस्टेरोन का सीधा असर सेक्स ड्राइव पर पड़ता है। जब पीरियड्स, प्रेग्नेंसी या मेनोपॉज़ के दौरान इन हार्मोनों का लेवल ऊपर-नीचे होता है, तो मूड, एनर्जी और “मूड में होने” की इच्छा भी बदल जाती है।
जहां एस्ट्रोजन योनि को नम और सेंसेटिव रखता है, जिससे सेक्स के पल आरामदायक और सुखद महसूस होते हैं। इसलिए, जब एस्ट्रोजन कम हो जाता है तो ड्राइनेस और असहजता महसूस होती है। इससे पार्टनर के करीब आने की इच्छा भी स्वाभाविक रूप से कम हो जाती है।
वहीं, जब शरीर में प्रोजेस्टेरोन हार्मोन बढ़ जाता है, तो थकान, सूजन या चिड़चिड़ापन महसूस हो सकता है। जिसकी वजह से रोमांस करने की इच्छा नहीं होती है।
टेस्टोस्टेरोन हार्मोन भी सेक्सुअल इच्छा और उत्तेजना को बढ़ाता है। उम्र या स्ट्रेस बढ़ने पर इसका स्तर घटता है, और चाहत का जोश कम पड़ने लगता है।
जिंदगी के अलग-अलग पड़ाव का असर

महिलाओं के शरीर में होने वाले ये हार्मोनल बदलाव जिन्दगी के अलग-अलग पड़ावों में सबसे ज्यादा देखने को मिलते हैं। मसलन-
- बच्चे के जन्म के बाद एस्ट्रोजन और टेस्टोस्टेरोन दोनों घट जाते हैं, ऊपर से नींद की कमी और नई जिम्मेदारियां सेक्स की इच्छा को काफी हद तक कम कर देती हैं।
- इसी तरह मेनोपॉज के दौरान एस्ट्रोजन तेज़ी से गिरता है, जिससे ड्राइनेस, मूड स्विंग्स और हॉट फ्लैश जैसी दिक्कतें होती हैं। ऐसे में सेक्स करने की इच्छा ही नहीं होती है।
- वहीं, पीरियड्स या पीएमएस के समय भी हार्मोनल बदलाव बहुत तेजी से होते हैं। जिसकी वजह से कुछ महिलाओं को सूजन, दर्द या चिड़चिड़ापन महसूस होता है, जिससे इच्छा अस्थायी रूप से घट जाती है।
स्ट्रेस और बर्थ कंट्रोल गोलियां बढ़ा सकती हैं परेशानी
यूं तो महिलाओं को अलग-अलग फेज में सेक्स ड्राइव की समस्या का सामना करना पड़ता है। लेकिन अगर स्ट्रेस बढ़ता है तो इससे भी सेक्स हार्मोन पर नेगेटिव असर पड़ता है। वहीं, कुछ बर्थ कंट्रोल पिल्स भी टेस्टोस्टेरोन को कम करती हैं, जिससे नेचुरल इच्छा और भी घट जाती है।
सेक्स ड्राइव को वापिस लाने के लिए क्या करें

अगर हार्मोनल बदलावों की वजह से सेक्स ड्राइव कम होने लगी है तो आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है, क्योंकि यह हमेशा के लिए नहीं जाता। जैसे ही हार्मोन बैलेंस हो जाते हैं तो आपकी सेक्स इच्छा अपने आप लौट आती है। इसके लिए बस आपको अपने लाइफस्टाइल में बदलाव, खुलकर बात करना, या डॉक्टर की मदद से बहुत फर्क पड़ सकता है।
- सबसे पहले अपने खाने में उन चीजों को शामिल करें, जो उन हार्मोनों को सपोर्ट करती हैं। मसलन डार्क चॉकलेट सेरोटोनिन और डोपामिन बढ़ाता है। वहीं, नट्स, सीड्स, एवोकाडो, केला, अंडे, पनीर, तरबूज आदि को अपनी डाइट का हिस्सा बनाएं।
- कोशिश करें कि ज्यादातर नेचुरल और कम प्रोसेस्ड चीज़े खाएं। साथ ही शुगर कम लें, क्योंकि ज्यादा शुगर हार्मोनल बैलेंस को बिगाड़ सकती है।
- नींद के साथ समझौता ना करें। जब नींद पूरी नहीं होती, तो शरीर ज्यादा कॉर्टिसोल बनाता है और टेस्टोस्टेरोन कम होता है। इससे सेक्स की इच्छा काफी कम होती है। इसलिए, 7-8 घंटे की अच्छी नींद लें।
- एक्सरसाइज को अपने डेली रूटीन का हिस्सा बनाएं। इससे ब्लड फ्लो बढ़ता है, एंडोर्फिन निकलते हैं और कॉन्फिडेंस बढ़ता है। हालांकि, इस बात का ध्यान रखें कि आप ओवर एक्सरसाइज ना करें, क्योंकि इससे उल्टा असर पड़ता है और इससे एस्ट्रोजेन कम हो जाता है।
- हाइड्रेशन का खास ख्याल रखें। इससे भी अच्छा असर पड़ता है। पर्याप्त पानी पिएं और खीरा, संतरा और नारियल पानी जैसी हाइड्रेटिंग चीजों को अपनी डाइट का हिस्सा बनाएं।
- स्ट्रेस को मैनेज करने की कोशिश करें। जब शरीर में स्ट्रेस हार्मोन बढ़ जाता है, तो शरीर खुद-ब-खुद सेक्सुअल इच्छा को “ऑफ” कर देता है। इसलिए, इसे मैनेज करने के लिए मेडिटेशन, जर्नलिंग या सेल्फ-केयर करें। ये आपके दिमाग को शांत करते हैं।
