Sex Education for Kid: बच्चों से सेक्स एजुकेशन पर बात करना जरूरी है, ताकि वे अपने शरीर, भावनाओं और सुरक्षा को समझ सकें। सही समय पर खुलकर और प्यार से की गई बातचीत उन्हें जागरूक, आत्मनिर्भर और निडर बनाती है।
9 साल की रूही अपनी मां के साथ टीवी देख रही थी, अचानक स्क्रीन पर एक विज्ञापन आया जिसमें
‘सेफ टच’ और ‘बॉडी की सुरक्षा’ की बात हो रही थी। रूही ने मासूमियत से पूछा, ‘मां, ये ‘सेफ टच’ क्या होता है?’ मां पहले तो चौंकी, लेकिन फिर मुस्कराकर बोली, ‘आज रात सोने से पहले तुझे एक बहुत जरूरी बात बताऊंगी।
रात को कहानी सुनाने के बाद मां ने रूही से उसके शरीर के बारे में बात की-कौन-से अंग प्राइवेट होते हैं, किसका छूना सही है और किसका नहीं। मां ने उसे बताया कि अगर कोई कुछ अजीब करे या
वो असहज महसूस करे, तो उसे बिना डरे बोलना चाहिए। रूही ध्यान से सुन रही थी, उसने बीच-बीच में सवाल भी किए। मां ने बिना झिझक, सहज भाषा में हर सवाल का जवाब दिया। उस दिन के बाद रूही की आंखों में डर नहीं था, बल्कि आत्मविश्वास था क्योंकि उसकी मां ने उसे ज्ञान और सुरक्षा दोनों के पंख दे दिए थे।
बातचीत की शुरुआत सही उम्र और सही भाषा से करें
सेक्स एजुकेशन की शुरुआत बच्चों की उम्र और समझ के अनुसार होनी चाहिए। 3 से 5 साल की उम्र में ही बच्चों को उनके शरीर के अंगों के सही नाम और उनके महत्व के बारे में बताया जा सकता
है। ‘प्राइवेट पार्ट्स’ के लिए बच्चा जिस भाषा को समझे, उसी भाषा में लेकिन वैज्ञानिक रूप से सही नामों का उपयोग करें- जैसे- ‘पेनिस’ ‘वजाइना’ ‘ब्र ेस्ट’ आदि। जब आप छोटे-छोटे शब्दों में
सहज तरीके से बात करेंगे, तो बच्चा भी इसे किसी रहस्य की तरह नहीं, बल्कि सामान्य जानकारी की तरह लेगा। अगर शुरुआत से ही बच्चे को यह बताया जाए कि उसका शरीर उसकी मर्जी का है और कोई भी स्पर्श जो उसे असहज करे, गलत है- तो वह खुद को सुरक्षित महसूस करता
है। इससे झिझक या डर के बजाय खुलापन और समझ पैदा होती है।
सेफ टच और अनसेफ टच के बारे में समझाना

बच्चे को बताना जरूरी है कि उसका शरीर उसकी निजी जिमेदारी है और उसे कोई भी जबरदस्ती नहीं छू सकता। ‘सेफ टच’ यानी ऐसा स्पर्श जो प्यार, देखभाल या जरूरत के लिए हो- जैसे मां का गले लगाना, डॉक्टर का जांच के लिए छूना।
वहीं ‘अनसेफ टच’ वो है जो असहज कर दे या डर पैदा करे। बच्चे को सिखाएं कि अगर कोई ऐसा स्पर्श करे जिससे वह अजीब महसूस करे, तो वह तुरंत ‘ना’ कहे, वहां से हट जाए और किसी बड़े को
बताए। कहानियों, पपेट शो या वीडियो के जरिए भी इस विषय को मजेदार और सरल तरीके से समझाया जा सकता है। ये बातें दोहराते रहना जरूरी है ताकि बच्चा घबराए नहीं, बल्कि स्थिति को समझदारी से संभाले।
शरीर में बदलाव और भावनाओं पर खुलकर बात करें
जब बच्चा प्री-टीनेज या टीनएज में पहुंचता है, तो उसके शरीर में कई बदलाव आने लगते हैं- जैसे- बाल आना, पीरियड्स शुरू होना, गुप्तांगों में बदलाव, आवाज बदलना आदि। इन बदलावों पर
खुलकर बात करना जरूरी है ताकि बच्चा भ्रमित या डरा हुआ न रहे। उसे समझाएं कि ये सब प्राकृतिक है और हर किसी के साथ होता है। इसके साथ ही भावनाओं में बदलाव- जैसे- आकर्षण, झुंझलाहट या शर्म-भी सामान्य हैं। बच्चे को यह यकीन दिलाएं कि उसके सवालों पर आप हंसेंगे
नहीं, न ही डांटेंगे। अगर वो आपसे नहीं पूछेगा, तो वह गलत स्रोत से जानकारी लेने लगेगा, जो उसके लिए खतरनाक हो सकता है।
सुरक्षा, सहमति और निजी सीमाओं पर सिखाना

बच्चे को यह सिखाना बहुत जरूरी है कि उसका शरीर उसकी मर्जी है। उसे बताएं कि ‘सहमति’ क्या होती है- मतलब कोई काम करने से पहले दोनों की रजामंदी होनी चाहिए। चाहे वो गले लगाना हो या सेल्फी लेना, हर चीज के लिए ‘हां’ या ‘ना’ कहने का हक है। बच्चों को यह भी समझाएं कि अगर कोई दोस्त या रिश्तेदार भी बार-बार उन्हें असहज महसूस कराता है, तो उसे माफ करना जरूरी नहीं है। अपने बच्चे को ‘बिना डरे बोलने’ की ताकत दें, चाहे वो स्कूल टीचर हो, बड़ा भाई हो या कोई और।
निजी सीमाएं और सुरक्षा का पाठ जितना जल्दी बच्चा सीखेगा, उतना ही मजबूत इंसान बनेगा।
इंटरनेट पर सेक्स से जुड़ी जानकारी और जागरूकता

आजकल बच्चे मोबाइल और इंटरनेट का इस्तेमाल जल्दी करने लगते हैं । ऐसे में वे सेक्स से जुड़ी जानकारी के लिए अक्सर गूगल या यूट्यूब का सहारा लेते हैं । यह जानकारी अधूरी या गलत हो सकती है और भ्रम पैदा कर सकती है। इसलिए जरूरी है कि माता पिता खुद पहल करें और बच्चों को सही दिशा में जानकारी दें । उन्हें अच्छे शैक्षिक वीडियो, किताबें या वेबसाइट्स दिखाएं जो उम्र के
अनुसार हों। बच्चे से बात करें कि वह जो कुछ ऑनलाइन देखता है, वह हमेशा सच नहीं
होता। साथ ही इंटरनेट पर अपनी जानकारी कैसे सुरक्षित रखनी है, यह भी सिखाएं।
“अपने बच्चे को ‘बिना डरे बोलने’की ताकत दें, चाहे वो स्कूल टीचर हो, बड़ा भाई हो या कोई और। जितना जल्दी बच्चा सीखेगा, उतना ही मजबूत इंसान बनेगा।”
