chitthi aayi hai author views
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Author Views: गृहलक्ष्मी के आलेख बहुत सकारात्मक और ऊर्जादायक होते हैं। जैसे की जुलाई अंक का खुश रहने का मंत्र अपने पास आलेख गहराई से पढ़ा और समझा जाए तो यह आलेख अपने आप में जीवन जीने का मूल मंत्र छुपाए हुए है। हर इंसान की जिंदगी एक कैनवास की भांति होती है। लेकिन उसमें रंग भरना अपने हाथ में होता है। पैसा, करियर, परिवार, शिक्षा यह सब खुश रहने के कारक हो सकते हैं, लेकिन एकमात्र कारक नहीं। एकमात्र कारक इंसान स्वयं है, तभी तो एक मजदूर फटे पुराने कपड़ों में 10 घंटे परिश्रम करते हुए, स्वेद बिंदुओं से नहाते हुए भी खुश रह सकता है। जबकि एक राजा आलीशान महल में आलीशान जिंदगी जीते हुए भी असंतुष्ट हो सकता है। गरीबी और अमीरी निर्धारित करने की एकमात्र रेखा है- संतुष्टिण हर बार की तरह मौसम अनुसार स्वास्थ्य, सौंदर्य और स्वाद के नुस्खे समेटे हुए यह अंक भी संग्रहणीय बन पड़ा है।

  • संगीता
    जोधपुर (राजस्थान)

गृहलक्ष्मी मैगजीन एक बहुत ही बेहतरीन पत्रिका है, जो विभिन्न विषयों पर सटीक जानकारी और मनोरंजन प्रदान करती है। इसमें छपने वाला हर एक अंक बहुत ही खास होता है, चाहे वो कहानी के रूप में हो, खानपान के बारे में हो या फैशन से संबंधित हो, हर एक पन्ना जानकारियों व मनोरंजन से भरपूर होता है। कई सालों से मैं इस पत्रिका से जुड़ी हूं। हर बार इसमें मुझे नयेपन का एहसास होता है। यह पत्रिका हर किसी को पढ़नी चाहिए, गृहलक्ष्मी मैगजीन दिन पे दिन तरक्की करे और आगे बढ़े यह मेरी आरजू है।

  • लता उप्रेती
    प्रयागराज (उ.प्र.)

नमस्कार सखियों, क्या आप भी अपने घर में कॉकरोच की वजह से परेशान हैं और बार-बार पेस्ट कंट्रोल करवाकर थक गई हैं? चलिए, आज एक आसान से घरेलू नुस्खे की मदद से इस समस्या को बाय-बाय करते हैं। 1 कप मैदा, 3/4 कप बोरिक पाउडर, कुछ दाने चीनी के मिलाकर दूध से आटा गूंथ लीजिए। कंचे के आकार की गोलियां बनाकर अच्छे से धूप में सुखा लीजिए। अब इन गोलियों को अलमारी में, जगह-जगह कोनों में या जहां पर भी कॉकरोच आते हैं रख दीजिए। 100 प्रतिशत कारगर नुस्खा है।

  • दीपिका जैन
    नई दिल्ली

मैं पेशे से एक हॉबी सेंटर जो बच्चों व महिलाओं का है व जिम चलाती हूं। साथ ही महिलाओं के लिए लाइब्रेरी है, जिसमें सभी तरह की किताबों के साथ गृहलक्ष्मी भी होती है। महिलाएं हर महीने आते ही गृहलक्ष्मी पढ़ने का अनुरोध करती हैं और उनमें गृहलक्ष्मी आते ही मार-काट मच जाती है। मुझे तो गृहलक्ष्मी न्यूट्रीशियन वैल्यू और स्वास्थ्य की नजर से बेहद पसंद है। पहले मैं व पति डॉ. के पास जल्दी-जल्दी बच्चों को अपने स्वास्थ्य को लेकर भागते रहते थे। पर इन चौहद सालों में जब से गृहलक्ष्मी आई है
व हम पढ़ने लगे, इसमें छपी नसीहतों से स्वास्थ्य तो उत्तम रहता ही है पैसों की भी बचत होती है। किचन कुकरी में डायबटीज और थायराइड में करेंगी फायदा छपी, 7 टिफिन रेसिपीज मुझे बेहद अच्छी लगी। गृहलक्ष्मी सभी की मनभावन पत्रिका है, जिसने आज भी अपना स्तर बना के रखा है।

  • सोनिया गुप्ता
    मम्फोर्डगंज, प्रयागराज (उ.प्र.)
Author Views-Grehlakshmi related to emotions
Grehlakshmi related to emotions

आज समय भले ही सोशल मीडिया का हो लेकिन फिर भी मुझे मैगजीन पढ़ने का शौक है और गृहलक्ष्मी जैसी- जिसको मैंने अपने बचपन से देखा है। लेकिन पढ़ना एक उम्र के बाद शुरू किया। मैंने पहले भी एक बार ‘चिठ्ठी आई है’ कॉलम के लिए लेटर भेजा है लेकिन वो छपा नहीं। लेकिन मैं इस बार भी उम्मीद कर रही हूं। छपे या न छपे मैं अपनी बात फिर से लिख रही हूं। शायद किसी न
किसी दिन तो संपादक महोदय को मेरी चिठ्ठी मिले। मैं गृहलक्ष्मी मैगजीन का संपादकीय जरूर पढ़ती हूं। उसमें कई अहम बातों का जिक्र होता है। पहले सिर्फ मैगजीन में छपने वाली तस्वीरें मेरे आकर्षण का केंद्र होती थी लेकिन कुछ समय ये मुझे इसको पढ़ना भी अच्छा लगने लगा है। इसमें छपने वाली कहानियां कही न कहीं आम जीवन से जुड़ी होती है, जिसको पढ़कर मुझे एहसास होता है
कि दुनिया काल्पनिक जीवन के अलावा भी बची हुई है। वरना लोग इसी तरह से कल्पनाओं में जीवन बिता देते हैं। खैर मैं इतना ही लिख रही हूं अगर मेरी भावनाओं को आपकी मैगजीन में जगह मिलती है तो मुझे ख़ुशी होगी क्योंकि मैगजीन हम महिलाओं की भावना से जुड़ी है।

गहना
बिजनौर (उत्तर प्रदेश)

गृहलक्ष्मी सिर्फ एक पत्रिका नहीं, मेरे लिए वो प्रेरणा की किताब है। हर महीने जब मैं इसको खरीदकर लाती हूं और पढ़ती हूं तो है जैसे किसी ऐसे ने दस्तक दी हो जो मुझ से जुड़ा है। इस मैगजीन में आने वाली कहानियों से लेकर रेसिपी तक, हर पन्ना कुछ नया सिखाता है। विशेष रूप से महिलाओं की जिंदगी से जुड़ी सच्ची कहानियां मुझे अंदर तक छू जाती है। इसके अलावा संपादकीय में उठाए गए मुद्दे समाज की सच्चाई को उजागर करते हैं। मेरा मन करता है कि मैं भी कभी अपनी कहानी आपसे साझा करूं। शायद एक दिन मेरी बात भी किसी को प्रेरणा दे सके। और आप नए-नए
सामाजिक मुद्दों पर लेख और कहानियां छापें।

  • कौशल्या
    नई दिल्ली

पुरस्कृत पत्र

संगीता, जोधपुर (राजस्थान)