Hindi Story: आरोही खिड़की से बहार देख रही थी. बारिश की बूंदे उसके मन को बारबार रंगो की दुनिया में खींच रही थी.आरोही ने आंख बचाकर इधर उधर देखा, उसकी दीदी वैभवी मेडिकल की पढ़ाई में व्यस्त थी और मम्मी मोबाइल में डूबी हुई थी.
चुपके से आरोही ने अपनी ड्राइंग फाइल निकली और बारिश की बूंदों को अपने पन्ने पर वो सजा ही रही थी कि पीछे से दीपक की आवाज आई”मैथ्स के सवाल कर लिए, या अभी भी वो ही नील बटे सन्नाटा ही हैं”
आरोही अपनी मासूम और बड़ी बड़ी आंखों को और बड़ा करते हुए बोली”पापा कर रही हूं, बस ये खत्म कर लूं”
दीपक दांत पीसता हुआ ,दूसरे कमरे में गया और अपनी बीबी प्रियांशी के हाथों से मोबाइल छीनते हुए बोला”मैडम कभी घर भी देख लिया करो”
“तुम्हारी छोटी बेटी हमारी नाक कटवा कर रहेगी”
नाइंथ ग्रेड में कितनी मुश्किल से पास हुई थी और अब भी इसे कोई परवाह नहीं हैं.
प्रियांशी इधर उधर देखते हुए बोली”अरे यहीं तो बैठ कर पढ़ रही थी”
आरोही तब तक दरवाज़े पर आ चुकी थी.
प्रियांशी आरोही को हल्के से चपत लगाते हुए बोली”तेरे कारण रात दिन सुनना पड़ता हैं क्यों नहीं तुम आराम से पढ़ सकती हो,?”
“अरे तेरा दिमाग कितना तेज़ हैं, नाना, नानी, दादा, दादी , चाचा ,चाची ,सब लोग ही तो इंजीनियर, डॉक्टर या आई ए एस है “
“आरोही वैभवी और मुझसे समझ ले प्लीज़,मगर पढ़ ले”
वैभवी गुस्से से बोली”मम्मी इसे तो ईजी लाइफ चाहिए ,पढ़ने में तो मेहनत करनी पड़ेगी “
दीपक भाषण देते हुए बोला”और इन पेंटिंग्स का क्या , ये शौक हो सकता हैं डियर मगर जिंदगी में पैसा कमाने के लिए पढ़ना पड़ेगा”
आरोही 15 वर्ष की थी वो उम्र के एक ऐसे दौर से गुजर रही थी जब ना उसे अपने परिवार की बात समझ आ रही थी और ना ही वो कुछ समझा पा रही थी.
कल मैथ्स का टेस्ट था, आरोही को मैथ्स की प्रॉब्लम कभी समझ ही नहीं आए थे.रात भर उसके सपने में मम्मी का रोना , पापा का चिल्लाना और मैथ्स टीचर मिस रोजलिन के कमेंट सुनाई देते रहे.ना जाने रात के किस पहर आरोही की आंख लगी थी. सुबह मम्मी के झंझोड़ने पर वो अचकचा कर उठ गई.आरोही आंखे मलते हुए बोली” मम्मी मुझे स्कूल नहीं जाना, बहुत तेज सिर में दर्द हो रहा हैं”
तभी पापा बोले”जल्दी तैयार हो जाओ, आज का टेस्ट तुम मिस नहीं कर सकती हो”
आरोही जबरदस्ती तैयार हुई और जल्दी जल्दी में उसने कुछ खाया भी नहीं.घर में किसी ने इस बात पर ध्यान नहीं दिया था.तनाव और खाली पेट के कारण टेस्ट से पहले आरोही उल्टी करने लगी.
घर पर कॉल किया गया और आरोही बिना टेस्ट दिए ही वापिस आ गई .प्रियांशी आरोही से नाराज़ थी.
“जान बूझ कर तुमने ये किया हैं”
“अब क्या जवाब दूंगी तुम्हारे पापा को?”
आरोही चुपचाप लेट गई.प्रियांशी का लगातार बड़बड़ाना ,पिता का डर और मैथ्स की टेंशन इतनी अधिक थी कि दोपहर होते होते आरोही को तेज़ बुखार हो गया था.
जब दोपहर को भी आरोही कमरे से नहीं निकली तो प्रियांशी उसके कमरे में पहुंची,देखा आरोही बुखार से तप रही हैं.
प्रियांशी घबरा गई और उसने गीली पट्टी करनी शुरू कर दी और दीपक को फोन किया.
दीपक ने फोन पर सबसे पहले ये पूछा”आरोही ने एग्जाम तो दे दिया था ना?
प्रियांशी के मना करने पर दीपक ने कहा”नाटक कर रही हैं उसे कुछ नहीं हुआ हैं.कोई जरूरत नहीं हैं डॉक्टर की , मर नहीं जाएगी”
प्रियांशी ने आरोही को खाना खिलाया और क्रोसिन दी और आरोही के सिर पर हाथ फेरते हुए रोने लगी” क्यों नहीं पढ़ती तू बेटा”
“तेरे पापा ने तेरे कारण मेरा जीना मुहाल कर रखा हैं”
आरोही की आंखे भी भर आई और सुबकते हुए बोली”मम्मी मुझसे नहीं होता मैथ्स, मैं बहुत कोशिश करती हूं”
“मैं वैभवी दीदी की तरह टॉपर नहीं बन सकती, मुझे आर्ट्स में कुछ बड़ा करना हैं”
प्रियांशी बोली “कर लेना मगर टेंथ में अच्छे नंबर लाने भी जरूरी हैं”
शाम को दीपक आया तो आरोही को देखकर बोला”आरोही कब तक मुझे शर्मिंदा करोगी, तुम्हारे स्कूल से फोन आया था ,तुमने एग्जाम मिस कर दिया है”
“जब तक तुम मैथ्स का एग्जाम पास नहीं करोगी वो तुम्हारा बोर्ड का रजिस्ट्रेशन नहीं करवाएंगे”
“वो मुझे कह रहे हैं कि तुम्हारा ओपन स्कूल से रजिस्ट्रेशन करवा दूं”
“अब ये दिन भी देखना रह गया था”
आरोही डरी डरी सी बैठी थी ,मन ही मन वो सोच रही थी कि अगर उसके हाथ में होता तो वो क्यों इतना कुछ सहती, शत प्रतिशत नंबर के साथ सबका मुंह ना बंद कर देती.
आरोही चुपचाप आंख बंद करके लेटी रही और अपने पापा की कड़वी बाते, आंसुओं के साथ पीती रही.कितनी मिन्नते करी थी आरोही ने कि उसे मैथ्स के बजाय म्यूजिक दिलवा दे.मगर उसके परिवार की इज़्ज़त और काबिलियत मैथ्स पढ़ने में ही थी.
गिरते पड़ते आरोही के प्रिबोर्ड एग्जाम आ गए थे.तीनों ही प्रिबोर्ड में आरोही मैथ्स में फेल थी.प्रियांशी ने दफ्तर से छुट्टी ले ली थी और दीपक ने भी.दोनों माता पिता कमर कस कर आरोही को तैयारी करवा रहे थे, मगर इससे आरोही अंदर से घबरा रही थी.
वो बैठ कर पढ़ती जरूर थी मगर सब कुछ उसके सिर के ऊपर से जा रहा था.चौथा प्रिबोर्ड हुआ, आरोही को पता था कि वो पास नहीं हो पाएगी.
घर आते ही दीपक बोला”आरोही पेपर तो बहुत ईजी था, तुम्हे कब तक रिजल्ट मिलेगा?”
आरोही बोली” जी पापा, एक दो दिन में मिल जाएगा, मगर आरोही का मन अंदर से रो रहा था”
पापा बोले”बेटा बोर्ड के लिए और अधिक मेहनत करेंगे और तुम्हे इस बार डिस्टिंक्शन अवश्य मिलेगी”
“चल पेपर डिसकस कर लेते हैं”
आरोही हकलाते हुए बोली”पापा मैं अभी थकी हुई हूं, कल करे?”
दीपक बोला”ठीक हैं”
आरोही ने अंदर से कमरा बंद कर लिया , लाइट के बंद होते ही उसे लगा मानो उसके जीवन का अंधकार और प्रगाढ़ हो गया हैं.
नहीं वो पेपर में कुछ भी करके नहीं आई है.कल फिर से उसका नाम फेलियर की लिस्ट में होगा.
क्या जवाब देंगी वो मम्मी , पापा को?
आरोही का कमरा जो शाम के तीन बजे बंद हुआ ,शाम के सात बजे तक भी नहीं खुला तो प्रियांशी को चिंता सताने लगी.
उसने एक दो बार हल्के से दरवाज़ा भी खटखटाया मगर फिर सोचा हो सकता है सो रही होगी.
जब डिनर के समय भी दरवाज़ा नहीं खुला तो प्रियांशी ने जोर जोर से दरवाज़ा खटखटाया मगर अंदर कोई हरकत नहीं हुई.
दीपक ने मास्टर की से दरवाज़ा खोला तो अंदर का नज़ारा देखकर वो सकपका गया, आरोही वैभवी के काले दुपट्टे से पंखे से लटक रही थी.
सामने दीवार पर लाल रंग से बड़े बड़े अक्षरों में लिखा हुआ था”सॉरी पापा”
ना जाने रात के किस पहर पुलिस आई ,कौन आरोही की बॉडी को पोस्ट मार्टम के लिए ले गया था.
दीपक को कुछ पता नहीं, जब उसे होश आया तो उसे ऐसा लगा , हर तरफ आरोही ने सॉरी पापा अपने खून से लिख दिया हो.
दीपक घर आकर बहुत देर तक रोता रहा , प्रियांशी सूजी आंखे लिए हुए कमरे के बाहर खड़ी थी.
“पंडित जी आए हैं, आरोही के कर्म कांड के लिए”
पंडित जी बोले”मौत का क्या समय लिखूं?”
ना जाने दीपक को क्या हुआ? अचानक से उठ कर तेज़ तेज़ चिल्लाने लगा, मौत के समय का तो पता नहीं ,मगर मौत की वजह मैं हूं
मैं हूं हत्यारा बाप.
प्रियांशी और वैभवी फटी फटी आंखों से दीपक को देख रही थी.उनकी चुप्पी मानो इस बात की गवाही दे रही हो कि दीपक ही हत्यारा हैं
