Sawan 2025
Sawan 2025

Summary: सावन में क्यों जाती हैं बेटियां मायके? जानिए धार्मिक और पारंपरिक महत्व

सावन के महीने में शादीशुदा बेटियों का मायके जाना एक शुभ और पारंपरिक परंपरा मानी जाती है। इससे न सिर्फ उन्हें मां-पिता का आशीर्वाद मिलता है बल्कि दांपत्य जीवन में भी सुख-समृद्धि आती है।

Sawan Tradition: हिन्दू धर्म में सावन के महीने का बहुत ही खास महत्व होता है। यह महीना भगवान शंकर को समर्पित होता है और इस पूरे महीने में उनकी पूजा विशेष रूप से की जाती है। साथ ही इस महीने में कुछ खास रीति-रिवाजों, परंपराओं और मान्यताओं का भी पालन किया जाता है, जिसमें शादीशुदा महिलाएं अपने हाथों में हरी-हरी चूड़ियाँ पहनती हैं, हाथों में मेहंदी लगाती हैं और इस महीने में ही अपने मायके भी जाती हैं। खासकर शादी के बाद नवविवाहित लड़कियों का मायके जाना बहुत शुभ माना जाता है। लेकिन क्या आपको पता है कि सावन के महीने में बेटियां मायके क्यों जाती हैं और इस मान्यता के पीछे का क्या कारण है? नहीं, तो कोई बात नहीं, हम आपको इस मान्यता के बारे में विस्तार से बता रहे हैं।

Sawan Tradition
What is the religious significance of going to the maternal home in the month of Sawan

हिंदू धर्म से जुड़े सभी रीति-रिवाज, परंपराएं और मान्यताओं का पालन हमेशा से किया जाता रहा है। इसी में से एक है सावन के महीने में मायके जाने की परंपरा। दरअसल सावन के महीने में भगवान शंकर की पूजा की जाती है। इस महीने में नवविवाहित लड़कियों को मायके आने पर अपनी माता से आशीर्वाद प्राप्त होता है और सौभाग्य प्राप्त करने का भी अवसर मिलता है, जिससे उन्हें जीवन भर सुहागिन और धन्य रहने का आशीर्वाद मिलता है। साथ ही वे अपनी माता के साथ शिव-पार्वती की पूजा कर पाती हैं।

maternal home in Sawan
Why do we go to maternal home in Sawan

सावन के पवित्र महीने में मायके जाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। शादी के बाद पहले सावन पर नवविवाहित लड़कियों का मायके जाना काफी शुभ माना जाता है। दरअसल ऐसा माना जाता है कि बेटी से ही घर का भाग्य जुड़ा होता है और वे घर की लक्ष्मी होती हैं। ऐसे में जब वे शादी के बाद अपने ससुराल चली जाती हैं तो उनके ना रहने पर घर में उदासी छा जाती है और जब वे सावन के महीने में अपने मायके आती हैं, तो अपने साथ ढेरों खुशियाँ लेकर आती हैं। साथ ही उनका भाग्य घर को नियंत्रित करता है और इससे पारिवारिक जीवन में खुशियां बढ़ती हैं और घर में सुख-समृद्धि भी आती है।

special tradition
Going to the mother’s house is a special tradition

शादी के बाद सावन में बेटियों का मायके जाना एक विशेष परंपरा है। इस परंपरा का पालन सदियों से किया जा रहा है। ऐसी मान्यता है कि इस परंपरा का पालन करने से मायके और ससुराल के बीच सामंजस्य अच्छा बना रहता है और मेल-मिलाप भी बढ़ता है। साथ ही शादी के बाद पहला सावन मायके में बिताने से दांपत्य जीवन सुखी होता है और पति-पत्नी के बीच का प्यार भी बढ़ता है।

सावन के महीने में बेटियों के मायके आने के पीछे एक वजह यह भी बताई जाती है कि शादी के बाद लड़कियां अपने ससुराल में अकेला महसूस करती हैं, उन्हें अपने घरवालों की बहुत याद आती है। ऐसे में मायके आकर वे मानसिक और शारीरिक रूप से खुद को बेहतर महसूस करा पाती हैं।

ए अंकिता को मीडिया इंडस्ट्री में 9 वर्षों का अनुभव है। इन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की और खास तौर पर लाइफस्टाइल और एंटरटेनमेंट बीट में रुचि रखती हैं। लेखन के अलावा वेब सीरीज़ देखना, घूमना, संगीत सुनना और फोटोग्राफी...