fifty shades freed novel in Hindi
fifty shades freed novel in Hindi

fifty shades freed novel in Hindi: “क्या मैं उसे बाहर भेज दूं।” हैना ने कहा।

“नहीं, वह कहां है।”

“वह रिसेप्शन में है। अकेली नहीं है। कोई और भी साथ है।”

ओह!

“मिस प्रेस्कॉट आपसे बात करना चाहती हैं।”

“सो तो है।”

“हैना एक मिनट! बोलो प्रेस्कॉट, क्या कहना चाहती हो?”

“लीला विलियम का नाम उस सूची में है जिन्हें आपसे नहीं मिलना चाहिए।”

“क्या?”

“जी, टेलर और वेल्क चाहते हैं कि वह आपके संपर्क में न आए।”

“क्या वह खतरनाक हो सकती है?”

“कह नहीं सकते मैम!”

“ओह अच्छा।”

“मैं वाशरूम में थी। उसने क्लेयर से बात की और उसने हैना को बुला लिया।” प्रेस्कॉट ने अपनी सफाई दी।

“अच्छा! उसे भी जाना पड़ता है।” मेरी हंसी छूट गई।

“जी मैम!” मैंने आज उसे पहली बार निशस्त्र देखा। उससे भूल जो हुई है।

“मैं क्लेयर से प्रोटोकॉल के बारे में बात करती हूं।” उसने चिंता के साथ कहा

“हां, क्यों नहीं? क्या टेलर को पता है कि लीला आई है।” मैंने मन ही मन सोचा कि काश उसने अभी मेरे पति को यह खबर न दी हो।

“मैंने उनके लिए संदेश छोड़ा है।”

तब तो वक्त कम है। मुझे जल्दी पता करना होगा कि वह मुझसे चाहती क्या है।

प्रेस्कॉट बोली, “मैम! आपको उससे नहीं मिलना चाहिए।”

“वह मुझसे किसी कारण से ही तो मिलने आई है।”

“अगर तुम्हें ज्यादा डर है तो उसकी तलाशी ले लो।”

“मैं बातचीत के दौरान साथ रहना चाहूंगी।”

मैंने हैना को पुकारा और मीटिंग कक्ष में लीला को बिठाने के लिए कहा।

लीला चाहती क्या है? मुझे नहीं लगता कि वह यहां मुझे कोई नुकसान करने आई होगी। उसने पहले भी कुछ नहीं किया था पर अब मेरे पति को बहुत गुस्सा आने वाला है। भीतर बैठी लड़की सब समझ रही है। मैंने सोचा कि क्रिस्टियन को बता दूं कि मैं क्या करने जा रही हूं।

फ्रॉम: एनेस्टेसिया ग्रे

सब्जेक्ट: मिलने वाले

डेट: 6 सितंबर 2011 15:27

टू: क्रिस्टियन ग्रे

लीला मुझसे मिलने आई है। मैं प्रेस्कॉट के साथ उससे मिल रही हूं।

मैं अपने हाथ के साथ थप्पड़ के हुनर को आजमा सकती हूं। क्या मुझे जरूरत होगी? मैं अब बड़ी हो गई हूं।

उससे बात करने के बाद तुमसे बात करती हूं।

एनेस्टेसिया ग्रे

संपादिका, एसआईपी

मैंने झट से फोन को दराज में रखा और अपने गालों पर चुटकी काटी ताकि उनका रंग लौट आए। अपनी पेंसिल स्कर्ट को ठीक किया और अपने ब्लाउज का पहला बटन खोल दिया। मैं तैयार हूं। मैं बड़े ही आत्मविश्वास के साथ लीला से मिलने चल दी। तभी फोन पर जानी-पहचानी धुन सुनाई दी। क्रिस्टियन का फोन है। मैंने उसे अनसुना कर दिया।

लीला पहले से बेहतर दिखी। वह बहुत ही आकर्षक है। गुलाबी गाल और भूरी आंखें। साफ और चमकीले बाल…। आज वह हल्के गुलाबी ब्लाउज और सफेद पतलून में है। वह मेरे जाते ही खड़ी हो गई और साथ ही उसके साथ आई वह युवती भी खड़ी हो गई। प्रेस्कॉट कोने में मंडरा रही है और उसकी नजरें लीला पर टिकी हैं।

“मिसेज ग्रे! मुझसे मिलने के लिए धन्यवाद।” वह बोली।

“सिक्योरिटी के लिए सॉरी!” मैं इसके सिवा कु
छ नहीं कह सकी।

“यह मेरी दोस्त सूसी है।”

“हाय!” हमने एक-दूसरे से कहा।

“बैठो!” पता नहीं ये मुझसे चाहती क्या है।

तभी दरवाजे पर हैना दिखी। मैंने उसे आने का संकेत दिया।

“एना! मि. ग्रे लाइन पर हैं।”

“उन्हें कहो कि मैं व्यस्त हूं।”

“वे अभी बात करना चाह रहे हैं।”

“हैना प्लीज!”

वह हिचकी।

“प्लीज!”

वह बाहर निकल गई। वे दोनों युवतियां मुझे हैरानी से देख रही हैं।

सूसी बोली! “मैं भी आपसे मिलना चाहती थी। हम लोग सब क्लब से हैं।”

ओह गॉड। ये क्या हो रहा है।

उसने आंख दबाई और चिहुंकी। शायद लीला ने उसे मेज के नीचे से टहोका दिया था।

मैं यहां क्या कह सकती हूं।

तभी वह बोली। “मैं चलती हूं। यहां तो लुलू का काम है।”

अब ये लुलू कौन है।.

मैं अभी इसी उलझन में थी कि इस बार प्रेस्कॉट के फोन पर मेरे पति का फोन आया। पहले शायद उसे डांट पड़ी और उसने मोबाइल मुझे थमा दिया।

क्रिस्टियन चिल्लाया!

“तुम क्या तमाशा कर रही हो।”

मैं वहां से उठ गई।

“मैंने किया क्या है?”

“मैंने खासतौर पर सबको मना किया था कि लीला तुमसे न मिले। एना! तुम मेरी बात बिल्कुल नहीं सुनतीं।”

“जब तुम शांत होगे। तब बात करेंगे।” मैंने कहा

“फोन बंद मत करना।”

“क्रिस्टियन गुडबाय!” मैंने फोन बंद कर दिया।

अब मेरे पास ज्यादा वक्त नहीं है। पूरी उम्मीद है कि क्रिस्टियन कुछ ही देर में यहां आ पहुंचेगा।

लीला ने अपने बालों से खेलते हुए कहा, “मैं आपसे माफी मांगना चाहती हूं।”

ओह..

हां बोलो,

“मुझे धन्यवाद देना है कि आपने कार और आपके घर में सेंधमारी के लिए मुझे जेल नहीं भेजा।”

“हूं! अब बेहतर महसूस कर रही हो?” मैंने पूछा

“हां! मैं पहले से ठीक हूं।”

“क्या डॉक्टर को पता है कि तुम यहां हो?”

उसने अपनी गर्दन हिलाई।

ओह

“माना कि मुझे नतीजे भुगतने होंगे पर मैं आपको, आपके पति और सूसी को मिलना चाहती थी।”

“तुम क्रिस्टियन से मिलना चाहती थीं?” अच्छा तभी यह यहां आई है।

“हां। मैं आपसे पूछना चाहती थी कि क्या यह सही रहेगा?”

मैंने उसे देखा और मैं उसे बताना चाहती थी कि यह सही नहीं रहेगा। मैं नहीं चाहती कि वह मेरे पति के पास भी जाए। वह यहां क्यों है? वह मुझे परेशान करना चाहती है? कोई मदद चाहती है?

“लीला! यहां मेरी नहीं, मेरे पति की मर्जी चलेगी कि वह मिलना चाहता है या नहीं? तुम्हें उससे ही पूछना होगा।”

“वे लगातार मेरी विनती को ठुकराते आए हैं।” उसने पलकें झपकाईं।

ओह शिट! मैं तो मुसीबत में पड़ गई।

“तुम्हारा उससे मिलना इतना जरूरी क्यों है?”

“मैं उन्हें धन्यवाद देना चाहती हूं। वह न होते तो मैं पागलखाने में सड़ती रहती। उनके और डॉक्टर की मदद के बिना कुछ नहीं हो सकता था। उन्होंने आर्ट स्कूल में दाखिल करवाया।”

मैं जानती हूं कि वह उसकी क्लास का पैसा दे रहा है। पर यह तो उसके स्वभाव का अंग है। उसे दूसरों की मदद करना आता है। मुझे खुशी है कि उसने लीला की मदद की।

“क्या तुम अपनी क्लास छोड़ कर आई हो?”

“हां दो क्लास छोड़ी हैं।”

“अब क्या चाहती हो?”

“मैं सूसी से सामान ले कर चली जाऊंगी। मि. ग्रे के पास मेरी दो पेंटिंग भी हैं।” ओह अब याद आया। हमारे बरामदे में दो नई पेंटिंग टंगी थीं तो वह इसने बनाई हैं।

“मिसेज ग्रे! आपसे अपने दिल की एक बात कहना चाहती थी।”

“हां, बोलो!”

“मैं अपने ब्वायफ्रेंड से बहुत प्यार करती थी जो पिछले साल मारा गया।”

“सॉरी”

“मैं अपने पति और एक आदमी से बहुत प्यार करती थी।”

“मेरे पति से।” न चाहते हुए भी मेरे मुंह से निकल ही गया।

“हां।” उसने भी हामी भरने में देर नहीं की।

“हां! उसे प्यार करना बहुत आसान है।”

“आपने सही कहा।” और वह हंसने लगी। उसके साथ ही मुझे भी हंसी आ गई पर मैं मन ही मन जानती हूं कि क्रिस्टियन किसी भी पल यहां होगा।

“तुम्हें उससे मिलने का मौका जरूर मिलेगा।”

“हां! मैं जानती हूं कि वह आपकी कितनी सुरक्षा चाहता है।”

“क्या मतलब?”

तो क्या उसने मुझे मेरे पति तक जाने का जरिया बनाया। वह जानती थी कि ज्यों ही मेरे पति को हमारी मुलाकात का पता चलेगा तो वह उसी समय आ जाएगा। ओह! कैसी चालाकी!

अचानक ही बाहर हलचल हुई और मैं जान गई कि मेरा पति आ गया। उसने भड़ाम से दरवाजा खोला और मेरी मुस्कान का जवाब तक नहीं दिया। वह गुस्से में है।

“प्रेस्कॉट! इसी समय काम से निकल जाओ।”

मैं सहम गई। यह तो गलत बात है। प्रेस्कॉट की क्या गलती है।

“क्रिस्टियन!”

उसने अंगुली दिखाई। तुम चुप रहो।”

मैं चुपचाप अपनी जगह बैठी रही। अब कुछ बोलना खतरे से खाली नहीं होगा।

“लीला! तुम यहां क्या भाड़ झोंक रही हो?”

“मैं आपसे मिलना चाहती थी पर आप मिलना नहीं चाहते थे।” उसका चेहरा स्याह हो गया था।

“तो तुम मेरी बीबी को धमकाने आ गईं।”

लीला मेज पर देखने लगी।

“लीला! आज के बाद तुम एना के पास भी दिखीं तो मैं सारी मदद बंद कर दूंगा। समझीं?”

“क्रिस्टियन!” मैंने फिर से बोलना चाहा पर उसकी ठंडी नजरों ने सारे उत्साह पर पानी फेर दिया।

“ये सूसन रिसेप्शन में क्या कर रही है?”

“यह मेरे साथ आई थी”

उसने बालों में हाथ फेरे। साफ दिख रहा है कि वह कितने गुस्से में है।

“क्रिस्टियन छोड़ो भी। ये तो सॉरी बोलने आई है।”

उसने मेरी बात को अनसुना किया और उससे पूछा

“क्या तुम बीमारी के दौरान इसके साथ ही ठहरी थीं?”

“हां”

“क्या वह जानती है कि तुम उसके साथ रहने के दौरान क्या कर रही थीं?”

“नहीं। वह छुट्टियों पर थी।”

उसने अपने होंठ पर अंगुली फेरी।

“तुम मुझसे क्यों मिलना चाहती थी। तुम डॉक्टर के हाथों कोई भी संदेश भेज सकती थीं। तुम्हें क्या चाहिए?”

लीला चुपचाप मेज के किनारे पर अपनी अंगुली फेरती रही।

“मुझे पता लगाना था।”

“क्या पता लगाना था?”

“कि आप ठीक हैं या नहीं?”

“मैं ठीक हूं।”

“हां”

“मैं बिल्कुल ठीक हूं। टेलर तुम्हें सी टैक छोड़ देगा ताकि तुम आगे जा सको। अगर तुमने वहां से कभी वापिस आने की कोशिश की तो याद रखना मेरी ओर से मिलने वाली हर तरह की मदद बंद हो जाएगी।”

“ओह क्रिस्टियन!”

“हां! मैं समझ गई।” लीला बोली।

“पर शायद यह अभी न जा सके। इसे यहां कुछ काम हो सकता है।” मैंने बीच में बोलना चाहा।

“एनेस्टेसिया! इस बात से तुम्हारा कोई लेन-देन नहीं है।”

“बेशक यह मुझसे संबंध रखता है। वह मेरे ऑफिस में मुझसे मिलने आई है।”

मैं मन ही मन चिढ़ गई। फिफ्टी शेड्स कहीं का!

“लीला तुमसे नहीं मुझसे मिलने आई है।” मुझसे बोले बिना रहा नहीं गया।

लीला मेरी ओर मुड़ कर बोली।

“मिसेज ग्रे! मुझे कुछ निर्देश दिए गए थे और मैंने उनका पालन नहीं किया।” उसने घबराहट के साथ मेरे पति को देखा।

“ये वही क्रिस्टियन ग्रे हैं, जिन्हें मैं जानती हूं।” मेरा हलक सूख गया। क्या वह उससे हमेशा ऐसे ही पेश आता होगा। क्या वह पहले मेरे साथ भी ऐसे ही पेश आता था। मुझे याद नहीं आ रहा था। लीला मुझे एक मुस्कान देते हुए वहां से उठ गई।

“मैं कल शाम तक रहना चाहती हूं। फिर वापिस जाना होगा।”

“मैं किसी को भेज दूंगा ताकि तुम्हें एयरपोर्ट छोड़ दे।”

“थैंक्यू”

“क्या तुम सूसन के घर हो??”

“हां”

“ठीक है।”

मैंने क्रिस्टियन को हैरानी से देखा। वह उस पर इस तरह हुक्म नहीं चला सकता। फिर उसे कैसे पता कि सूसन कहां रहती है।

“गुडबाय मिसेज ग्रे! मुझसे मिलने के लिए मेहरबानी।”

“गुडबाय… गुडलक।” मैं समझ नहीं पा रही कि अपने पति की एक्स सेक्स सब को बाय कैसे कहना चाहिए।

उसने मेरे पति से भी विदा ली।

“मुझे खुशी है कि आप खुश हैं। आपको जीवन में खुशियां पाने का पूरा हक है।” उसने कहा और उसके जवाब देने से पहले ही निकल गई। टेलर लीला के साथ था।

क्रिस्टियन दरवाजा बंद कर मुझे घूरने लगा

“मुझ पर गुस्सा मत दिखाना। किसी पर भी धौंस जमाओ या अपने डॉक्टर से मिलने जाओ। समझे?”

उसका मुंह खुला का खुला रह गया।

“तुमने कहा था कि ऐसा नहीं करोगी।” उसने आरोप लगाया।

“क्या नहीं करूंगी।”

“मुझे नीचा नहीं दिखाओगी?”

“नहीं। मैंने ऐसा कुछ नहीं किया। मैंने कहा था कि जो करूंगी, सोच-समझ कर करूंगी। मैंने तुम्हें बता दिया था कि वह यहां है। प्रेस्कॉट मेरे पास थी। अब तुमने उस बेचारी को काम से निकाल दिया। वह तो वही कर रही थी जो उसे कहा गया था। मैंने कहा था कि चिंता मत करना पर फिर भी तुम यहां आ गए। ऐसा कहां लिखा है कि मैं लीला से नहीं मिल सकती। मैं नहीं जानती थी कि ऐसे लोगों की भी एक सूची है जिनका मुझसे मिलना मना है।” मैंने अपनी भड़ास निकाल दी।

उसके चेहरे पर हंसी आ गई। यहां मेरे गुस्से का पारावार न ही है।

बेशक वह जिन नजरों से अपनी सब को देख रहा था। वे बहुत ही विरक्त करने वाली थीं। क्या उसके मन में किसी के लिए भी कोई भाव नहीं हैं?

“तुमने उससे इतनी रुखाई क्यों दिखाई?”

“एनेस्टेसिया! तुम सूसान और लीला जैसी औरतों को नहीं समझ सकतीं। ये कभी वक्त बिताने का खुशनुमा साधन थीं पर अब ऐसा नहीं है। तुम मेरे जीवन का केंद्र हो। आखिरी बार जब तुम दोनों एक कमरे में थीं तो उसने तुम पर बंदूक तान दी थी। मैं नहीं चाहता कि वह तुम्हारे पास भी आए। मैं यह खतरा मोल नहीं लेना चाहता।”

“पर क्रिस्टियन, वह बीमार थी।”

“मैं जानता हूं और अब यह भी पता है कि वह पहले से बेहतर है पर मैं उसे कोई और मौका नहीं देना चाहता। उसने जो भी किया, वह माफी के लायक नहीं था।”

“पर तुम अभी उसके हाथों का खिलौना बन कर हटे हो। तुम उससे मिलना नहीं चाहते थे। उसे पता था कि अगर वह मेरे पास आई तो तुम बचाव के लिए दौड़े आओगे और वही हुआ। उसकी मुराद पूरी हो गई।”

उसने कंधे झटके, “मैं तुम्हें अपनी बीती जिंदगी से उलझने नहीं देना चाहता।”

“नहीं, क्रिस्टियन! तुम जो भी, इस नई या पुरानी जिंदगी की देन हो। जो तुम्हें छूता है, वही मुझे भी छूता है। जब मैंने शादी के लिए हामी दी थी तो सब सोच लिया था क्योंकि मैं तुमसे प्यार करती हूं।”

“उसने मुझे चोट नहीं पहुंचाई। लीला तुमसे प्यार करती है।”

“मुझे परवाह नहीं है।”

मैं उसे आंखें फाड़े देखती रही। मुझे सदमा इस बात का था कि वह अब भी मुझे सदमा देने की क्षमता रखता था। यह तो वही क्रिस्टियन ग्रे है, जिसे मैं जानती थी। ये लीला के शब्द थे। मैं जिस आदमी को इतना चाहती हूं, वह उस औरत के लिए इतना बेलाग कैसे हो सकता है, जो कभी उसके जीवन का एक हिस्सा रही थी। फिर वह वक्त भी याद आया जब उसने उसके दर्द को महसूस किया था। खुद को जिम्मेदार माना था। यहां तक उसे अपने हाथों से नहलाया भी था। मेरे पेट में इन बातों को सोच कर ही बेचैनी सी होने लगी। वह कैसे कह सकता है कि उसे उसकी परवाह नहीं है। अब ऐसा क्या बदलाव आ गया है। कभी-कभी तो इसे समझ पाना मुश्किल हो जाता है। यह पता नहीं कौन से स्तर पर जी रहा है।

“तुम अचानक उसकी इतनी हिमायत क्यों कर रही हो?”

“देखो क्रिस्टियन! ऐसा तो नहीं है कि हम दोनों आपस में सहेलियां बन गईं हैं पर तुम्हें उसके लिए इतनी बेरहमी नहीं दिखानी चाहिए। क्या तुम्हारे पास दिल नहीं है।”

“मैंने तुम्हें एक बार कहा था कि मेरे पास दिल नाम की कोई चीज नहीं है।”

ओह! अब ये किशोरों वाली हरकतों पर उतर आया।

“ये सच नहीं है। तुम्हें उसकी परवाह है। अगर ऐसा होता तो तुम उसकी मदद न कर रहे होते।”

अचानक ही मुझे ऐसा लगने लगा कि जीवन में उसे यह एहसास दिलाना कि वह दूसरों के लिए कितना संवेदनशील है, यही मेरे जीवन का एकमात्र लक्ष्य हो गया है। वह इस बात को मानता क्यों नहीं? इसे मानवता और करुणा के पास कैसे लाया जाए।

वह गुस्से से बोला। “ये बहस यहीं खत्म हो गई। चलो अब घर चलें।”

साढ़े चार बजने को थे।

“मुझे तो अभी काम करना है।”

“घर चलो।”

“क्रिस्टियन! मैं तुमसे एक ही बात पर बहस कर-कर के तंग आ गई हूं।”

“मुझे पता है। जब भी मैं कुछ ऐसा करती हूं जो तुम्हें पसंद नहीं होता तो तुम अक्सर मेरे साथ निराले अंदाज में सेक्स करते हो जो या तो बहुत ही अजीब होता है या बहुत ही कमाल!” मेरे मुंह से निकल ही गया।

“अच्छा कमाल भी होता है?”

“हां”

“क्या मैं उस कमाल के बारे में जान सकता हूं।”

मुझे पता है कि वह मेरा ध्यान दूसरी ओर लगाने के लिए ऐसा कर रहा है।

ओह! यहां ऑफिस में ये क्या हो रहा है। मेरे भीतर बैठी लड़की ने फटकारा कि यह सब मैंने ही तो शुरू किया था।

उसने पास आ कर मुझे छुआ और बोला।

“मुझे तो इतना पता है कि मुझे तुम्हें खुश करना अच्छा लगता है।”

“एनेस्टेसिया! कमाल वाली बात तो बतानी होगी।” अब वह मस्ती के मूड में है।

“तुम लिस्ट चाहते हो?”

“क्या पूरी लिस्ट है।” वह खुश हो गया।

ओह यह बंदा भी कमाल है।

“खैर तुम्हारी हथकड़ियां।”

उसने अचानक ही मेरा हाथ थाम लिया।

“मैं तुम्हारे हाथों पर निशान नहीं डालना चाहता था।”

“ओह”

“घर चलो”

“कुछ काम बाकी है।”

“कल कर लेना। अब घर चलो।”

“वरना हम यहीं..”

“नहीं, नहीं। क्रिस्टियन मैं ऑफिस में ऐसा कुछ नहीं करना चाहती। तुम्हारी रखैल अभी यहां से गई है।”

“वह कभी मेरी रखैल नहीं थी। एना! वह अतीत है। उसे भुला दो।”

मैंने आह भरी। हो सकता है कि वह सही कह रहा हो। मैं तो उससे यही कहलवाना चाहती थी कि वह उसकी कद्र करता है। मान लो कि अगर मैं कभी उसके कहे पर नहीं चली तो क्या मैं भी अतीत कहलाऊंगी। पहले तो वह उसके लिए परेशान हुआ था और आज वह इस बारे में मना कर रहा है।

उसने एक झटके से मुझे अपनी ओर खींचा और चूमने लगा।

“ओह क्रिस्टियन! कभी-कभी तो तुम मुझे कितना डरा देते हो।”

“क्यों?”

“तुमने कितनी आसानी से लीला से मुंह फेर लिया”

“तो तुम्हें लगता है कि मैं तुम्हारे साथ भी ऐसा ही कर सकता हूं। तुमने ऐसा क्यों सोचा?”

“कुछ नहीं। मुझे एक किस दो और घर चलो।” ज्यों ही उसके होठों ने मेरे होठों को छुआ। मैं सब भूल गई।

मैं आज मुलायम चमड़े की बेड़ियों में हूं। उसने मेरे दोनों घुटने बांध रखे हैं और उसका मुंह…। मैंने आंखें खोलीं और उस सुख के बीच हिचकोले खाने लगी।

“एना! चरम सुख तक नहीं आना। तुम्हें इसी नियंत्रण को सीखना होगा। अपने पर काबू पाना सीखो।” उसने कहा

ओह! वह जानता है कि वह क्या कर रहा है। मैं बेबस हूं। मेरा शरीर उसके हाथों का खिलौना बना हुआ है। उसकी जीभ उस संवेदनशील अंग के आसपास मंडरा रही है।

“ओह एना! तुमसे रहा नहीं गया।” उसने फटकारा।

उसने मेरे पीछे एक धौल जमा दिया।

“आह।” मैं चिल्लाई।

उसने मेरे नितंब हाथों से पकड़े और अगले दांव की तैयारी में जुट गया।

हम दोनों एक दूसरे में समाए हुए थे कि उसने हांफते हुए कहा

“एना! तुम मेरी हो”

“हां! मैं तुम्हारी हूं।”

और हम दोनों चरम सुख के छोर पर एक साथ पहुंचे। मैं उसका नाम लेते हुए निढाल हो गई।

“ओह एना! मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं। यह कहते-कहते वह भी…”

उसने मेरा कंधा चूमा और चेहरे से बाल हटा दिए।

“मिसेज ग्रे! कैसा लग रहा है?”

“हां लिस्ट का कुछ हिस्सा तो पूरा हो गया।” मैंने चुहल की।

“चलो अब डिनर हो जाए।”

मैंने स्वीकृति में सिर हिलाया । बहुत जोर से भूख लगी है। मैंने उसकी छाती के बालों पर हाथ फिराते हुए कहा

“तुमसे कुछ कहना चाहती हूं।”

“बोलो”

“गुस्सा मत होना”

“हां, तुम्हें बड़ी परवाह पड़ी है।”

“मैं चाहती हूं कि तुम यह मानो कि तुम लीला की परवाह करते हो क्योंकि मैं अपने पति के उस रूप से प्यार करती हूं। जो दूसरों की कद्र करता है।”

मैं उसके आंतरिक संघर्ष को देखते हुए महसूस कर रही हूं।

“हां! हां। मैं परवाह करता हूं। अब खुश हो।”

“ओह थैंक्स! मुझे सुन कर अच्छा लगा।”

“यकीन नहीं आता कि मैं अपने पलंग पर लेटा, तुमसे किसके बारे में बात कर रहा हूं”

“नहीं, हम कोई बात नहीं कर रहे। चलो कुछ खाएं।”

“तुम तो सचमुच मुझे दीवाना बना देती हो। मिसेज ग्रे।”

“बढ़िया!” मैं आगे बढ़ी और उसे चूम लिया।

फ्रॉम: एनेस्टेसिया ग्रे

सब्जेक्ट: लिस्ट

डेट: 9 सितंबर 2011 09:33

टू: क्रिस्टियन ग्रे

वह तो सबसे ऊपर है।

मिसेज ग्रे

संपादिका

फ्रॉम: क्रिस्टियन ग्रे

सब्जेक्ट: कुछ नया बताओ

डेट: 9 सितंबर 2011 09:42

टू: एनेस्टेसिया ग्रे

तुमने पिछले तीन दिन यही कहा था

या हम कुछ नया आजमा सकते हैं।

क्रिस्टियन ग्रे

सीईओ, खेल का मजा लेते हुए

ग्रे इंटरप्राइजिस होल्डिंग्स, इंक

मैंने खीसें निपोरीं। पिछली कुछ शाम कितनी रंगीन रहीं। लीला की कहानी भूल गई है। अभी मुझे दीवारों पर उसकी पेंटिंग वाली बात पूछने का मौका नहीं मिला। कोई बात नहीं, पूछना भी नहीं चाहती।

तभी मेरा फोन बजा।

“एना”

“जी?”

“एना हनी! मैं जोस सीनियर बोल रहा हूं।”

“मि. रॉड्रिज! हैं, जोस के पापा मुझसे क्या चाहते हैं?

“हनी मैं तुम्हें रे के बारे में बताना चाहता था।”

“क्या हुआ? क्या हुआ उन्हें।” मेरा कलेजा दहल गया।

“रे का एक्सीडेंट हो गया है।”

“अरे नहीं। डैडी!” मेरी तो सांसें ही रूक गईं।

“वे अस्पताल में हैं। तुम जल्दी आ जाओ।”