Prem Leela :दंगल टीवी पर आने वाली नफरत और प्यार की कहानी ‘प्रेमलीला’ इन दिनो काफी रोचक मोड पर है। प्रेम के जीवन को बचाने के लिए लाडली ने अपने साथियों तक से बगावत कर ली। प्रेम को बचाने के समय उसे अहसास हुआ कि उसके मन में प्रेम के लिए प्यार की भावनाएं हैं। प्रेम के ठीक होने के बाद कुछ ऐसी परिस्थितियां सामने आईं की उन दोनों को शादी करनी पडती है। प्रेम लाडली का साथ देने के लिए उससे शादी कर लेता है। लाडली के लिए ये सपना ज्यादा समय तक सच नहीं रहने वाला। प्रेम उससे जल्द ही अलग होने वाला है शादी के बंधन के बाद भी दोनो की राहें अलग होने वाली हैं।
प्रेम करेगा लीला से बंधन तोडने की बात
लाडली की इज्जत बचाने के लिए प्रेम उसकी मांग भर देता है। लाखा के शादी के बहाने लीला को पाने का ख्वाब देखता है। प्रेम उसकी इस चाल को नाकामयाब कर देता है। प्रेम के लीला की मांग भरने के बाद गांव वाले उनकी शादी करवाते हैं। लीला शादी के बीच खुश है कि उसे प्रेम का साथ मिल रहा है। उसे लगता है कि उसे बचाने के लिए जो कदम प्रेम ने उठाया है उसके पीछे कुछ तो भावनाएं होंगी। ल्रेकिन जल्द ही लीला का भ्रम टूट जाता है। प्रेम को उसी समय छोटी लीला नजर आती है। वो उससे कहता है कि उसे माफ कर दे। उसे शादी मजबूरी में करनी पडी है। प्रेम कहता है कि पता नहीं क्यों लाडली को मुसीबत में देख उसकी मदद करने से खुद को रोक नहीं पाया। लेकिन प्रेम के दिल में सिर्फ उसकी लीला रहती है। इसके बाद वो लीला से मजबूरी के इस बंधन को तोडने की बात करता है।
क्यों प्रेम और लीला की राहें होंगी अलग
शादी के बाद लीला को एक कलश में प्रेम को अकेले में पानी पिलाने है। लेकिन मंदिर से लोगों के जाने के बाद प्रेम इस शादी के बारे में लाडली से बात करता है। वो लीला के सिर पर पानी डालता है। उसका सिंदूर बह जाता है। प्रेम कहता है कि वो सिर्फ लीला का है। वो कहता है लोग समझते नहीं हैं कि जबरदस्ती सिंदूर और मंगलसूत्र डलवाने से किसी की शादी नहीं हो जाती। वो लाडली से पूछता है कि कहीं तुम इस शादी को सच तो नहीं मान रही हो।
उसके जीवन में लीला के अलावा कोई और नहीं आ सकता। प्रेम लाडली के प्रति उसकी भावनाओं को समझ ही नहीं पा रहा। वो लाडली से कहता है कि बाी और एक राजपूत कभी एक नहीं हो सकता। उन्हें अब अपनी रास्ते जाना होगा। इसी में उनकी और उनके परिवार वालों की भलाई है। वो लीला से कहता है कि जब तुमसे पहली बार मिला था तो दोस्ती का हाथ बढाया था। आज हम आखिरी बार मिल रहे हैं। तो फिर एक बार दोस्ती का हाथ बढाता हूं।
जिस लीला की चाह में प्रेम भटक रहा है अब उसके साथ होने के बावजूद फिर एक बार अलग होने वाला है।

